चेन्नई स्थित हेल्थ-टेक कंपनी ट्रैकरवेव ने अपने राजस्व को चार गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। कंपनी अब भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र के डिजिटल परिवर्तन और अमेरिका-यूरोप के बाजारों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

  • ट्रैकरवेव ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹50 करोड़ के राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • AIIMS और ESI जैसे प्रमुख सरकारी अस्पतालों में RTLS तकनीक के व्यापक रोलआउट की योजना।
  • उत्पादकता में 30-40% की वृद्धि और निवेश की 6 महीने में रिकवरी का दावा।
  • उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बाजारों में विस्तार के लिए वैश्विक सिस्टम इंटीग्रेटर्स के साथ साझेदारी।

चेन्नई स्थित हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी कंपनी ट्रैकरवेव (Trackerwave) ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए लगभग ₹50 करोड़ के राजस्व का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। यह पिछले वर्ष के ₹12 करोड़ के राजस्व से चार गुना से अधिक की वृद्धि है। कंपनी की इस विकास रणनीति का मुख्य केंद्र भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचा है, जो तेजी से डिजिटल हो रहा है।

ट्रैकरवेव मुख्य रूप से रियल-टाइम लोकेशन सिस्टम (RTLS) विकसित करती है। कंपनी को उम्मीद है कि उसकी वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा राज्य और केंद्र सरकार के अस्पतालों, विशेष रूप से AIIMS (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) और ESI (कर्मचारी राज्य बीमा) जैसे संस्थानों में बड़े पैमाने पर रोलआउट से आएगा। वर्तमान में, कंपनी ओडिशा, महाराष्ट्र और चंडीगढ़ के सरकारी अस्पतालों के साथ काम कर रही है।

तकनीकी नवाचार और कार्यान्वयन

कंपनी की तकनीक ब्लूटूथ (BLE), वाई-फाई और अल्ट्रा वाइडबैंड (UWB) का उपयोग करके अस्पतालों के भीतर GPS जैसी सटीक पोजिशनिंग प्रदान करती है। इसके तहत रिसीवर को लगभग 30 मीटर के अंतराल पर लगाया जाता है, जबकि टैग्स को मरीजों, कर्मचारियों या महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों से जोड़ा जाता है। एक डिजिटल 3D मैप के जरिए ऑपरेटर वास्तविक समय में यह ट्रैक कर सकते हैं कि कोई व्यक्ति या वस्तु किस मंजिल या कमरे में है।

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, ट्रैकरवेव का मॉडल केवल तकनीक बेचने के बारे में नहीं है, बल्कि परिचालन दक्षता बढ़ाने के बारे में है। जब अस्पताल प्रबंधन को यह पता होता है कि उनके महंगे उपकरण (जैसे पोर्टेबल एक्स-रे या वेंटिलेटर) कहाँ हैं, तो समय की बचत होती है और मरीज की देखभाल में सुधार होता है। यह विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले सरकारी अस्पतालों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

"RTLS तकनीक न केवल संपत्ति के प्रबंधन को सुव्यवस्थित करती है, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में प्रतिक्रिया समय को कम करके जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।"

कंपनी का दावा है कि उनके पोर्टल-मैनेजमेंट समाधान से अस्पताल की उत्पादकता में 30-40% का सुधार हो सकता है। एक उदाहरण में, कुछ परिचालन कार्यों के लिए आवश्यक जनशक्ति 200 लोगों से घटकर 120 रह गई। इसके अलावा, CT और MRI जैसी महंगी मशीनों की तुलना में इस तकनीक की लागत काफी कम है, जिससे अस्पताल मात्र छह महीने में अपना निवेश वसूल कर सकते हैं।

वैश्विक स्तर पर, ट्रैकरवेव पहले से ही पांच देशों में मौजूद है। हालांकि, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण कंपनी ने अपनी विस्तार योजनाओं का पुनर्मूल्यांकन किया है, लेकिन फिर भी उसने इस क्षेत्र में 2 मिलियन डॉलर का व्यवसाय हासिल किया है। अब कंपनी का मुख्य लक्ष्य उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बाजारों में प्रवेश करना है।

क्या आप जानते हैं?: ट्रैकरवेव की तकनीक केवल लोकेशन ही नहीं, बल्कि तापमान, आर्द्रता और गैसों जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों की भी निगरानी कर सकती है, जो वैक्सीन और दवाओं के भंडारण के लिए अनिवार्य है।
विशेषतापारंपरिक अस्पताल प्रबंधनट्रैकरवेव RTLS प्रबंधन
संपत्ति ट्रैकिंगमैनुअल सर्च / रजिस्टररियल-टाइम डिजिटल 3D मैप
जनशक्ति दक्षताउच्च श्रम आवश्यकता30-40% अधिक उत्पादकता
निवेश रिकवरीलंबी अवधि (वर्षों में)अत्यधिक तीव्र (लगभग 6 महीने)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: RTLS तकनीक अस्पतालों में कैसे काम करती है?
यह ब्लूटूथ और वाई-फाई रिसीवर्स के नेटवर्क का उपयोग करती है, जो टैग किए गए मरीजों और उपकरणों की सटीक स्थिति को डिजिटल मैप पर दिखाते हैं।

प्रश्न 2: क्या यह तकनीक केवल निजी अस्पतालों के लिए है?
नहीं, ट्रैकरवेव विशेष रूप से भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के अस्पतालों (जैसे AIIMS) के डिजिटल परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित कर रही है।