आरबीआई के संभावित हस्तक्षेप और एफसीएनआर(बी) योजना के तहत भारी निवेश के कारण भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 26 पैसे बढ़कर 95.17 पर बंद हुआ। यह सुधार वैश्विक अस्थिरता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच आया है।
- रुपया 26 पैसे की बढ़त के साथ 95.17 पर बंद हुआ।
- आरबीआई द्वारा मुद्रा को संभालने के लिए बाजार में हस्तक्षेप की प्रबल संभावना।
- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक तनाव ने दबाव बनाया।
- FCNR(B) योजना के तहत 73 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह दर्ज।
मुंबई के विदेशी मुद्रा बाजार में सोमवार (31 अगस्त, 2026) को भारतीय रुपये ने एक शानदार वापसी की। शुरुआती गिरावट के बाद, रुपया 26 पैसे की बढ़त के साथ 95.17 (अनंतिम) पर बंद हुआ। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं के कारण डॉलर में आई तेजी को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सक्रिय रूप से हस्तक्षेप किया है।
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.56 पर खुला और पूरे सत्र के दौरान 95.11 से 95.56 के बीच उतार-चढ़ाव करता रहा। पिछले शुक्रवार को रुपया मामूली 2 पैसे की बढ़त के साथ 95.43 पर बंद हुआ था। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रिकवरी न केवल आरबीआई के हस्तक्षेप बल्कि MSCI रीबैलेंसिंग और FCNR (B) योजनाओं से जुड़े डॉलर प्रवाह के कारण संभव हुई है।
Why This Matters
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, रुपये की यह स्थिरता भारत के आयात बिल, विशेष रूप से कच्चे तेल के लिए महत्वपूर्ण है। जब अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ती है, तो निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर डॉलर में निवेश करते हैं, जिससे रुपया कमजोर होता है। ऐसे समय में आरबीआई का हस्तक्षेप मुद्रा में अत्यधिक गिरावट को रोकता है, जिससे घरेलू मुद्रास्फीति पर नियंत्रण बना रहता है।
"भारतीय रुपये ने दो दिनों में शानदार वापसी की है, जो आरबीआई के समय पर हस्तक्षेप और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार का परिणाम है।"
वैश्विक स्तर पर, डॉलर इंडेक्स 99.52 पर कारोबार कर रहा था, जिसमें 0.18% की गिरावट देखी गई। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। ब्रेंट क्रूड 3.70% बढ़कर 91.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इसका मुख्य कारण मध्य पूर्व में तनाव, विशेष रूप से ईरान के लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले और उसके बाद की जवाबी कार्रवाई है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है।
एक महत्वपूर्ण सकारात्मक पहलू यह रहा कि आरबीआई की विशेष USD-INR विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा (FCNR(B) जमा) ने 21 अगस्त, 2026 तक 73 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह जुटाया है। यह एनआरआई (NRI) समुदाय के भारत पर अटूट विश्वास को दर्शाता है।
| पैरामीटर | वर्तमान स्थिति (31 अगस्त) | पिछली स्थिति (28 अगस्त) |
|---|---|---|
| रुपया क्लोजिंग | 95.17 | 95.43 |
| परिवर्तन | +26 पैसे | +2 पैसे |
| ब्रेंट क्रूड | $91.36 | कम |
घरेलू शेयर बाजार में गिरावट देखी गई, जहां सेंसेक्स 307.24 अंक गिरकर 76,957.27 पर और निफ्टी 95.25 अंक गिरकर 24,080.40 पर बंद हुआ। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुक्रवार को 5,039.80 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की।
Frequently Asked Questions
1. रुपये की कीमत में अचानक बढ़ोतरी का मुख्य कारण क्या था?
इसका मुख्य कारण आरबीआई का बाजार हस्तक्षेप और FCNR(B) योजना के तहत भारी मात्रा में डॉलर का प्रवाह था।
2. कच्चे तेल की कीमतों का रुपये पर क्या प्रभाव पड़ता है?
तेल की कीमतें बढ़ने से भारत का आयात बिल बढ़ता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।