केरल की महिला किसानों के नेटवर्क कुडुम्बश्री ने ओणम उत्सव के दौरान सब्जी और फूलों की बिक्री से ₹10.07 करोड़ का ऐतिहासिक टर्नओवर हासिल किया है। इस पहल ने 33,000 से अधिक महिला किसान समूहों को आर्थिक मजबूती प्रदान की है।
- ओणम बाजार के छह दिनों में ₹10.07 करोड़ का कुल टर्नओवर दर्ज।
- 'ओणकानी' पहल के तहत 1,580 टन कीटनाशक मुक्त सब्जियों की बिक्री।
- 33,000 से अधिक संयुक्त देयता समूहों (JLG) की महिलाओं ने हिस्सा लिया।
- त्रिशूर जिला ₹2.85 करोड़ के टर्नओवर के साथ शीर्ष पर रहा।
केरल सरकार के बाजार हस्तक्षेप प्रयासों को समर्थन देते हुए, कुडुम्बश्री के कृषि आजीविका वर्टिकल ने इस वर्ष ओणम के दौरान एक अभूतपूर्व सफलता दर्ज की है। राज्य के सभी 14 जिलों में आयोजित ओणम बाजारों ने 20 से 25 अगस्त की छह दिवसीय अवधि में कुल ₹10.07 करोड़ का टर्नओवर प्राप्त किया, जो महिला सशक्तिकरण और टिकाऊ कृषि की दिशा में एक बड़ा कदम है।
'ओणकानी': कीटनाशक मुक्त खेती का नया युग
कुडुम्बश्री की 'ओणकानी' पहल, जिसका मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को स्थानीय और उच्च गुणवत्ता वाली कीटनाशक मुक्त सब्जियां उपलब्ध कराना है, इस बार बेहद सफल रही। इस पहल के तहत कुल 1,580.88 टन सब्जियों की बिक्री हुई, जिससे ₹8.91 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष खेती का क्षेत्रफल पिछले वर्ष के 8,913 एकड़ से बढ़कर लगभग 20,500 एकड़ हो गया है।
किसानों ने ओणम की मांग को पूरा करने के लिए लोबिया, भिंडी, लंबी फलियां, टमाटर, हरी मिर्च, करेला, तोरई, लौकी, बैंगन, कद्दू और पेठा जैसी विविध सब्जियों की खेती की। यह विस्तार न केवल बाजार की आपूर्ति को सुनिश्चित करता है, बल्कि रसायनों के उपयोग को कम कर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ाता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कुडुम्बश्री केवल एक स्वयं सहायता समूह नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली आर्थिक इंजन बन गया है। जब सरकारी हस्तक्षेप और जमीनी स्तर के प्रबंधन का मेल होता है, तो बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाती है और लाभ सीधे उत्पादक (महिला किसानों) तक पहुँचता है। यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकेंद्रीकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
'निरप्पोलिमा': फूलों की खेती में वृद्धि
फूलों की खेती के लिए शुरू की गई 'निरप्पोलिमा' पहल के तहत, लगभग 5,500 JLG फार्म समूहों ने 113.17 टन फूलों का उत्पादन किया, जिससे ₹1.16 करोड़ का टर्नओवर हुआ। गेंदे के फूलों की खेती सबसे अधिक की गई, हालांकि अन्य किस्मों को भी बढ़ावा दिया गया। फूलों की खेती का क्षेत्रफल भी 1,820 एकड़ से बढ़कर 1,966.93 एकड़ हो गया है।
"कृषि में महिलाओं की भागीदारी जब संगठित रूप से बाजार से जुड़ती है, तो वह न केवल परिवार की आय बढ़ाती है बल्कि पूरे क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता को नियंत्रित करती है।"
टर्नओवर के मामले में जिलों का प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा। त्रिशूर ने ₹2.85 करोड़ के साथ पहला स्थान प्राप्त किया, उसके बाद पलक्कड़ (₹1.62 करोड़), कन्नूर (₹85.5 लाख) और तिरुवनंतपुरम (₹79.93 लाख) का स्थान रहा।
| जिला | टर्नओवर (करोड़ में) |
|---|---|
| त्रिशूर | 2.85 |
| पलक्कड़ | 1.62 |
| कन्नूर | 0.85 |
| तिरुवनंतपुरम | 0.79 |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: ओणकानी पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को स्थानीय, उच्च गुणवत्ता वाली और कीटनाशक मुक्त सब्जियां प्रदान करना और महिला किसानों की आय बढ़ाना है।
प्रश्न 2: किस जिले ने सबसे अधिक टर्नओवर दर्ज किया?
उत्तर: त्रिशूर जिले ने ₹2.85 करोड़ के टर्नओवर के साथ सबसे अधिक प्रदर्शन किया।