बिहार के मधेपुरा में स्थित लोकोमोटिव फैक्ट्री अब केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के लिए इंजीनियरिंग का केंद्र बन गई है। अल्स्टॉम के 30% वैश्विक इंजीनियरिंग कार्य अब भारत से संचालित हो रहे हैं।

  • मधेपुरा फैक्ट्री अल्स्टॉम के वैश्विक इंजीनियरिंग कार्यों का 30% हिस्सा संभाल रही है।
  • यहाँ भारत के सबसे शक्तिशाली 12,000 हॉर्सपावर वाले लोकोमोटिव बनाए जाते हैं।
  • कंपनी ने अब तक 650 लोकोमोटिव की आपूर्ति कर दी है और 90% से अधिक स्थानीयकरण (Localization) हासिल किया है।

बिहार के मधेपुरा में स्थित इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव फैक्ट्री (MELPL) ने भारतीय रेलवे और वैश्विक इंजीनियरिंग जगत में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड (MELPL) के प्रबंध निदेशक विवेक गर्ग के अनुसार, यह फैक्ट्री अब अल्स्टॉम के वैश्विक इंजीनियरिंग कार्यों का 30% हिस्सा संभाल रही है। यह विकास न केवल बिहार के लिए, बल्कि 'मेक इन इंडिया' पहल के लिए भी एक बड़ी जीत है।

तकनीकी शक्ति और स्वदेशीकरण

MELPL भारत के सबसे शक्तिशाली 12,000 हॉर्सपावर वाले लोकोमोटिव का निर्माण करती है। ये इंजन समर्पित माल ढुलाई गलियारों (Dedicated Freight Corridors) पर चलते हैं और 6,000 टन तक का भार खींचने की क्षमता रखते हैं। 2015 में जब यह संयुक्त उद्यम (Joint Venture) शुरू हुआ था, तब डिज़ाइन और प्रमुख घटक यूरोप से आते थे। हालांकि, आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।

वर्तमान में, कंपनी ने 90% से अधिक स्थानीयकरण हासिल कर लिया है। मोटरों का निर्माण यहीं होता है, प्रोपल्शन सिस्टम कोयंबटूर में बनाया जाता है, और लोकोमोटिव के कार बॉडी (Shells) कोलकाता में तैयार किए जाते हैं। यह एक पूर्णतः एकीकृत भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमाण है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मधेपुरा का यह मॉडल भारत को केवल एक 'असेंबली हब' से बदलकर एक 'डिज़ाइन और इंजीनियरिंग हब' के रूप में स्थापित कर रहा है। जब वैश्विक कंपनियों का इंजीनियरिंग कार्य भारत में स्थानांतरित होता है, तो यह उच्च-स्तरीय कौशल विकास और बौद्धिक संपदा के सृजन को बढ़ावा देता है।

मधेपुरा प्रोजेक्ट ने भारत में इंजीनियरों का एक ऐसा बड़ा पूल तैयार किया है जो अब वैश्विक शहरी ट्रेनों और लोकोमोटिव डिजाइन में योगदान दे रहे हैं।

भविष्य की योजनाओं की बात करें तो, मौजूदा अनुबंध के तहत 800 लोकोमोटिव का लक्ष्य है, जिसमें से 650 की आपूर्ति हो चुकी है। कंपनी भारतीय रेलवे के साथ उत्पादन की निरंतरता बनाए रखने के लिए चर्चा कर रही है ताकि भविष्य में निर्यात के अवसरों को भी तलाशा जा सके।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारतीय रेलवे का आधुनिकीकरण दशकों से चल रहा है, लेकिन भारी माल ढुलाई के लिए उच्च क्षमता वाले इंजनों की कमी हमेशा एक चुनौती रही है। मधेपुरा फैक्ट्री की स्थापना इस कमी को दूर करने और माल ढुलाई क्षमता को 1,600 मिलियन टन से बढ़ाकर 3,000 मिलियन टन करने के लक्ष्य के साथ की गई थी।

Did You Know?: मधेपुरा फैक्ट्री का GST योगदान बिहार के कुल GST संग्रह का लगभग 1% है।

Frequently Asked Questions

1. मधेपुरा फैक्ट्री में किस प्रकार के इंजन बनाए जाते हैं?
यहाँ 12,000 हॉर्सपावर के शक्तिशाली इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बनाए जाते हैं जो भारी माल ढोने के लिए उपयुक्त हैं।

2. अल्स्टॉम की इस कंपनी में कितनी हिस्सेदारी है?
मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड में फ्रांसीसी कंपनी अल्स्टॉम की 74% हिस्सेदारी है।