भारत में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ाने के लिए फीडस्टॉक की कुशल खरीद और प्रबंधन अब सबसे महत्वपूर्ण कारक बन गया है। सरकार की ₹23,731 करोड़ की GOBARdhan योजना के बावजूद, आपूर्ति श्रृंखला की बाधाएं एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
- CBG उत्पादन के लिए फीडस्टॉक (कच्चा माल) की निरंतर आपूर्ति और गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण है।
- प्रेस मड, कृषि अवशेष और पशु गोबर प्रमुख फीडस्टॉक हैं, लेकिन इनकी उपलब्धता मौसमी है।
- सरकार ने GOBARdhan योजना के माध्यम से CBG उत्पादन को 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
- सप्लाई चेन के लिए 'एग्रीगेटर मॉडल' और 25 किमी के दायरे में स्रोत होना आर्थिक रूप से व्यवहार्य है।
भारत सरकार द्वारा कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के लिए एक स्थिर ढांचा प्रदान किए जाने के बाद, उद्योग विशेषज्ञों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों का मानना है कि अगला बड़ा कदम फीडस्टॉक की खरीद, भंडारण और प्रबंधन के लिए एक कुशल आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करना है। CBG संयंत्रों की व्यवहार्यता और उनके उत्पादन की गुणवत्ता सीधे तौर पर कच्चे माल की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
वर्तमान में, प्रेस मड (गन्ने के प्रसंस्करण के बाद बचा अवशेष), धान और गेहूं का भूसा, और पशु गोबर CBG उत्पादन के लिए सबसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले फीडस्टॉक हैं। हालांकि, प्रत्येक के साथ अपनी अनूठी लॉजिस्टिक चुनौतियां जुड़ी हुई हैं। उदाहरण के लिए, प्रेस मड और पशु गोबर में नमी की मात्रा अधिक होती है, जिससे उन्हें संयंत्र के करीब से प्राप्त करना आवश्यक हो जाता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए CBG क्षेत्र का सफल होना अनिवार्य है। यदि फीडस्टॉक की आपूर्ति में व्यवधान आता है, तो यह न केवल संयंत्रों की परिचालन लागत को बढ़ाएगा, बल्कि भारत के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को भी धीमा कर देगा।
आपूर्ति श्रृंखला की व्यवहार्यता महत्वपूर्ण है; हम 25 किमी के दायरे को एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में देखते हैं।
प्रेस मड की उपलब्धता सीमित है क्योंकि चीनी मिलें वर्ष में केवल चार से पांच महीने ही संचालित होती हैं। इसी तरह, धान के भूसे का संग्रह केवल फसल कटाई के समय (लगभग 15 दिनों के भीतर) किया जाना चाहिए, इससे पहले कि किसान अपने खेतों को अगली फसल के लिए तैयार करें। भंडारण के दौरान आग लगने का खतरा और मानसून में नमी से बचाव करना भी एक बड़ी चुनौती है।
इस समस्या के समाधान के रूप में, भारतीय बायोगैस एसोसिएशन (IBA) के अध्यक्ष गौरव केडिया ने एक 'एग्रीगेटर-आधारित मॉडल' का सुझाव दिया है। यह मॉडल किसानों और संयंत्रों के बीच एक सेतु का काम करेगा, जिससे किसानों को कानूनी जटिलताओं से मुक्ति मिलेगी और उन्हें CBG उत्पादन के उप-उत्पाद के रूप में 'बायो-स्लरी' (जैविक उर्वरक) भी प्राप्त होगा।
| फीडस्टॉक का प्रकार | प्रमुख चुनौती | परिवहन क्षमता |
|---|---|---|
| प्रेस मड | सीमित मौसमी उपलब्धता | कम दूरी (नमी के कारण) |
| धान का भूसा | तेजी से संग्रह की आवश्यकता | मध्यम दूरी (बैलिंग के बाद) |
| पशु गोबर | बिखरा हुआ स्रोत | बहुत कम दूरी |
Frequently Asked Questions
1. GOBARdhan योजना क्या है?
यह भारत सरकार की एक योजना है जिसका उद्देश्य जैविक कृषि-संसाधनों का उपयोग करके CBG उत्पादन को बढ़ाना है।
2. एग्रीगेटर मॉडल क्यों जरूरी है?
यह किसानों और औद्योगिक संयंत्रों के बीच समन्वय स्थापित करता है और कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करता है।