अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण मंगलवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी नीचे गिरे। मजबूत घरेलू जीडीपी के बावजूद, वैश्विक अस्थिरता और विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया है।

  • BSE सेंसेक्स 121.48 अंक गिरकर 76,835.79 पर आया; NSE निफ्टी 52.6 अंक फिसलकर 24,027.80 पर पहुंचा।
  • अमेरिका-ईरान तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल 0.76% बढ़कर 91.22 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
  • विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने ₹7,985.88 करोड़ की इक्विटी बेची।
  • भारत की वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही की जीडीपी वृद्धि 7.8% रही, जो उम्मीदों से अधिक है।

मंगलवार (1 सितंबर, 2026) को भारतीय शेयर बाजारों की शुरुआत निराशाजनक रही। बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में नीचे की ओर खिसक गए। इस गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिका व ईरान के बीच ताजा तनाव है, जिसने निवेशकों की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।

30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 121.48 अंक गिरकर 76,835.79 पर आ गया, जबकि NSE निफ्टी 52.6 अंक गिरकर 24,027.80 पर बंद हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीति को लंबे समय तक सख्त रखने की संभावना ने उभरते बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता को कम कर दिया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत कच्चे तेल के आयात पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे इसका शेयर बाजार मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक अस्थिरता के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाता है। जब ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर चालू खाता घाटे और मुद्रास्फीति पर पड़ता है, जिससे बजाज फिनसर्व और इंटरग्लोब एविएशन जैसे शेयरों में गिरावट देखी गई।

"अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय इक्विटी बाजारों में सावधानी का माहौल बना रहेगा।"

हालांकि, बाहरी दबावों के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती एक राहत की खबर है। भारत की वास्तविक जीडीपी वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 7.8% बढ़ी, जो आरबीआई के 7% के अनुमान से काफी अधिक है। यह दर्शाता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू आर्थिक गति बनी हुई है।

एशियाई बाजारों में भी यही रुझान देखा गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। वहीं, अमेरिकी बाजारों ने भी सोमवार को गिरावट के साथ कारोबार समाप्त किया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा ₹7,985.88 करोड़ की भारी बिकवाली ने बाजार की गिरावट को और तेज कर दिया।

पैरामीटरवर्तमान मूल्यबदलाव/स्थिति
BSE सेंसेक्स76,835.79-121.48 अंक
NSE निफ्टी24,027.80-52.6 अंक
ब्रेंट क्रूड$91.22 / बैरल+0.76%
भारत जीडीपी (Q1)7.8%अनुमान से अधिक
क्या आप जानते हैं?: भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 80% से अधिक आयात करता है, यही कारण है कि वैश्विक तेल कीमतों का सीधा असर भारतीय रुपये और शेयर बाजार पर पड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आज सेंसेक्स क्यों गिरा? सेंसेक्स में गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति की आशंका है।

FII की बिकवाली का बाजार पर क्या प्रभाव पड़ता है? जब विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) बड़े पैमाने पर शेयर बेचते हैं, तो बाजार में शेयरों की मांग कम हो जाती है, जिससे कीमतों में गिरावट आती है।