तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों में किसानों ने कावेरी-वैगई-गुंडार नदी जोड़ो परियोजना के लिए राज्य के पहले बजट में आवंटित ₹150 करोड़ को अपर्याप्त बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि यह राशि आधी सदी पुरानी इस महत्वाकांक्षी योजना को सार्थक गति देने के लिए नाकाफी है, जिसके लिए वे कम से कम ₹2,000 करोड़ की मांग कर रहे हैं। इस परियोजना का उद्देश्य सात जिलों में आठ लाख एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करना है।
- किसान कावेरी-वैगई-गुंडार नदी जोड़ो परियोजना के लिए ₹2,000 करोड़ के पर्याप्त बजटीय आवंटन की मांग कर रहे हैं।
- तमिलनाडु सरकार के पहले बजट में इस परियोजना के लिए केवल ₹150 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिससे व्यापक निराशा है।
- यह परियोजना तमिलनाडु के सात दक्षिणी जिलों में आठ लाख एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करने का लक्ष्य रखती है।
- परियोजना के पहले चरण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) का अनुमानित व्यय ₹6,900 करोड़ है।
तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों में कृषि समुदाय ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत पहले वित्तीय बजट पर गहरी निराशा व्यक्त की है। किसानों ने बुधवार को मदुरै में विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें लंबे समय से प्रतीक्षित कावेरी-वैगई-गुंडार लिंक नहर परियोजना के लिए आवंटित मात्र ₹150 करोड़ की राशि की कड़ी आलोचना की गई। किसानों का कहना है कि यह राशि आधी सदी पुरानी इस महत्वाकांक्षी पहल को सार्थक प्रगति देने के लिए पूरी तरह से अपर्याप्त है, और उन्होंने कम से कम ₹2,000 करोड़ के तत्काल आवंटन की मांग की है।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली नवगठित तमिलनाडु सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत बजट ने दक्षिणी जिलों के कृषि समुदायों में व्यापक असंतोष पैदा कर दिया है। कावेरी-वैगई-किरुथमल-गुंडार सिंचाई किसान संघ (संबद्ध) और दक्षिणी जिला किसान संघ के प्रतिनिधियों ने मदुरै में पीडब्ल्यूडी कार्यालय परिसर में एकत्र होकर इस विशाल परियोजना के लिए ₹2,000 करोड़ के फंड की मांग की।
यह मेगा-परियोजना तमिलनाडु के लिए एक 'आधी सदी का सपना' मानी जाती है, जिसका लक्ष्य करूर, तिरुचि, पुदुक्कोट्टई, शिवगंगा, रामनाथपुरम, विरुधुनगर और थूथुकुड़ी सहित सात जिलों में आठ लाख एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करना है। इस परियोजना से क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आने और किसानों को बार-बार होने वाले कृषि संकट से बचाने की उम्मीद है।
संघ के महासचिव एम. अर्जुनन ने वित्तीय आवंटन की तीखी आलोचना करते हुए इसकी अपर्याप्तता पर जोर दिया। अर्जुनन के अनुसार, आवंटित ₹150 करोड़ की राशि नहर की खुदाई के 5 किलोमीटर भी पूरे करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने पिछले निष्पादन मील के पत्थर का हवाला देते हुए बताया कि मयन्नूर बैराज में 'जीरो पॉइंट' से मात्र 4.5 किलोमीटर की खुदाई के लिए 2021 में स्वीकृत धन का उपयोग करते हुए ₹165 करोड़ का खर्च आया था। यह मौजूदा आवंटन की तुलना में परियोजना की वास्तविक लागत का एक स्पष्ट संकेत देता है।
परियोजना को तीन अलग-अलग चरणों में संरचित किया गया है। केवल महत्वपूर्ण पहले चरण के लिए, जिसका उद्देश्य मयन्नूर से पुदुक्कोट्टई में दक्षिण वेल्लारू तक 118 किलोमीटर की नहर का निर्माण करना है, ₹6,900 करोड़ की एक व्यापक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पहले ही तैयार की जा चुकी है। इस विशाल ब्लूप्रिंट के मुकाबले वर्तमान राजकोषीय प्रावधान को देखते हुए, श्री अर्जुनन ने तर्क दिया कि इस गति से प्रगति होने पर परियोजना को पूरा होने में आधी सदी और लग जाएगी।
Why This Matters
कावेरी-वैगई-गुंडार जैसी नदी जोड़ो परियोजनाएं न केवल कृषि उत्पादकता के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि एक क्षेत्र की समग्र जल सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ऐसे बड़े पैमाने के बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में अपर्याप्त निवेश से ग्रामीण आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, पलायन बढ़ सकता है और खाद्य सुरक्षा को खतरा हो सकता है। यह तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों के लिए एक जीवनरेखा है, और इसके अधूरे रहने से दशकों पुरानी आशाएं धराशायी हो सकती हैं, जिससे राजनीतिक और सामाजिक अशांति बढ़ सकती है।
दीर्घकालिक जल प्रबंधन और कृषि स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो परियोजनाओं में पर्याप्त और निरंतर बजटीय सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कृषि बेल्ट की ओर से गहरी निराशा व्यक्त करते हुए, श्री अर्जुनन ने मुख्यमंत्री विजय से आग्रह किया कि वे दक्षिणी जिलों को बार-बार होने वाले कृषि संकट से बचाने के लिए चालू वित्तीय बजट के भीतर परियोजना के लिए कम से कम ₹2,000 करोड़ का पर्याप्त धन आवंटित करें। किसानों का मानना है कि यह पर्याप्त आवंटन ही परियोजना को पटरी पर लाने और उनके दशकों पुराने सपने को साकार करने की दिशा में पहला कदम होगा।
Frequently Asked Questions
- कावेरी-वैगई-गुंडार परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- किसानों के अनुसार, ₹150 करोड़ का आवंटन क्यों अपर्याप्त है?