एमेरिटस की नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 60% से अधिक जेन-जी युवा एआई (AI) के कारण लगातार कौशल सुधारने के दबाव में मानसिक रूप से थक चुके हैं। युवा अब पारंपरिक लीडरशिप के बजाय वर्क-लाइफ बैलेंस और पर्यावरण के प्रति योगदान को अधिक महत्व दे रहे हैं।
- 60% से अधिक जेन-जी युवा लगातार नई स्किल्स सीखने के दबाव से 'बर्नआउट' महसूस कर रहे हैं।
- 75% युवा मानते हैं कि जॉब मार्केट में टिके रहने के लिए कौशल विकास अनिवार्य है।
- विदेश में पढ़ाई करने की इच्छा में गिरावट आई है; छात्र अब भारत में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
- करियर के लिए अब वेतन से ज्यादा वर्क-लाइफ बैलेंस और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है।
भारत में नई पीढ़ी के कामकाजी और छात्र जीवन में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एमेरिटस (Emeritus) की नवीनतम रिपोर्ट, 'इंडियाज जेन-जी आउटलुक 2026', यह खुलासा करती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तीव्र प्रगति ने युवाओं के बीच एक अनजाना डर और भारी मानसिक थकान पैदा कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, 60% से अधिक जेन-जी (Gen Z) उत्तरदाताओं ने महसूस किया है कि वे खुद को लगातार अपडेट रखने की होड़ में 'बर्नआउट' का शिकार हो रहे हैं।
यह रिपोर्ट 15 से 28 वर्ष की आयु के 1,010 लोगों पर आधारित है, जो प्रमुख भारतीय महानगरों से लिए गए हैं। रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जहाँ 75% युवा मानते हैं कि प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए सही कौशल सीखना आवश्यक है, वहीं यही निरंतर सीखने की प्रक्रिया उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक शैक्षणिक समस्या नहीं है, बल्कि एक गहरा सामाजिक-आर्थिक बदलाव है। एआई द्वारा संचालित कार्यक्षेत्र अब केवल डिग्री पर निर्भर नहीं है; 65% युवाओं का मानना है कि वर्तमान बाजार में केवल एक डिग्री सफलता की गारंटी नहीं दे सकती। यह बदलाव कंपनियों को अपनी प्रशिक्षण नीतियों और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए मजबूर करेगा।
"यह बदलाव बहुत तेजी से हो रहा है। नीतियां बदल रही हैं, विश्वविद्यालय आ रहे हैं, और अब 'ब्रेन ड्रेन' (प्रतिभा पलायन) की स्थिति बदल रही है," एमेरिटस के सह-संस्थापक और सीईओ अश्विन डामेरा ने कहा।
रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है—विदेश जाकर पढ़ने का आकर्षण कम हो रहा है। लगभग 48% छात्रों ने कहा कि पिछले एक वर्ष में विदेशों में शिक्षा प्राप्त करने में उनकी रुचि कम हुई है। इसका मुख्य कारण बढ़ता खर्च, वीजा संबंधी जटिलताएं और विदेश में काम करने की अनिश्चितता है। इसके विपरीत, भारत में स्थित अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के कार्यक्रमों में छात्रों की रुचि तेजी से बढ़ी है।
शिक्षा के बदलते रुझान
आज का युवा केवल ऊंचे पद या भारी वेतन के पीछे नहीं भाग रहा है। लगभग 79% उत्तरदाताओं ने कहा कि वे चाहते हैं कि उनका करियर पर्यावरण में सकारात्मक योगदान दे। साथ ही, 65% युवाओं का मानना है कि करियर में सफलता का मतलब अनिवार्य रूप से उच्च नेतृत्व भूमिका (Leadership Role) निभाना नहीं है।
| विशेषता | पारंपरिक दृष्टिकोण | जेन-जी (Gen Z) दृष्टिकोण |
|---|---|---|
| प्राथमिकता | उच्च पद और वेतन | वर्क-लाइफ बैलेंस और प्रभाव |
| शिक्षा का लक्ष्य | केवल डिग्री प्राप्त करना | निरंतर स्किल अपग्रेडेशन |
| विदेश में पढ़ाई | अत्यधिक पसंदीदा | घटती रुचि (लागत और वीजा कारणों से) |
हाइब्रिड शिक्षा के प्रति भी रुझान बढ़ा है, जहाँ छात्र भारत में रहकर ही अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ जुड़ना चाहते हैं। यह मॉडल उन्हें वैश्विक एक्सपोजर भी देता है और स्थानीय स्थिरता भी सुनिश्चित करता है।
Frequently Asked Questions
1. जेन-जी में बर्नआउट का मुख्य कारण क्या है?
एआई के कारण तेजी से बदलते कार्यक्षेत्र में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए निरंतर कौशल सुधारने का दबाव मुख्य कारण है।
2. विदेश में पढ़ाई के प्रति रुचि क्यों कम हो रही है?
बढ़ती लागत, वीजा की समस्याएँ और वहां काम करने की अनिश्चितता प्रमुख कारण हैं।