गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा है कि मध्यस्थता केंद्रों को केवल अदालतों के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि एक प्राथमिक समाधान के रूप में देखा जाना चाहिए। गिफ्ट सिटी (GIFT City) में आयोजित GHAC मध्यस्थता सप्ताह के दौरान उन्होंने गुजरात के कानूनी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया।
- मध्यस्थता को अदालतों के विकल्प के बजाय प्राथमिक समाधान माना जाना चाहिए।
- मजबूत मध्यस्थता पारिस्थितिकी तंत्र GIFT City में विदेशी निवेश को आकर्षित करेगा।
- सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों और गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश ने कार्यक्रम में शिरकत की।
गांधीनगर (GIFT City): गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने एक महत्वपूर्ण विजन प्रस्तुत करते हुए कहा है कि मध्यस्थता केंद्र (Arbitration Centers) केवल अदालतों का एक वैकल्पिक माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे कई महत्वपूर्ण मामलों में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। यह बयान गांधीनगर स्थित GIFT City में आयोजित 'GHAC मध्यस्थता सप्ताह - 2026' के उद्घाटन के दौरान दिया गया।
इस तीन दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय 'गुजरात के संस्थागत मध्यस्थता पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण' (Building Gujarat’s Institutional Arbitration Ecosystem) रखा गया है। कार्यक्रम में कानूनी जगत की दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की, जिनमें सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीश (न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन, न्यायमूर्ति विपुल पंचोली और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया) और गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल शामिल थीं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि गुजरात सरकार का यह कदम वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य में राज्य की स्थिति को बदलने वाला है। मध्यस्थता को सुव्यवस्थित करने से न केवल कानूनी बोझ कम होगा, बल्कि यह GIFT City को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगा।
मध्यस्थता को वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली के रूप में नहीं, बल्कि एक प्राथमिक विवाद समाधान प्रणाली के रूप में देखा जाना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री संघवी ने जोर देकर कहा कि यदि गुजरात मध्यस्थता के क्षेत्र में आक्रामक प्रयास करता है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ GIFT City को मिलेगा। उन्होंने कहा कि विदेशी कंपनियां उन स्थानों पर निवेश करना पसंद करती हैं जहां विवादों का समाधान त्वरित और कुशल तरीके से हो सके। उन्होंने इस दिशा में राज्य सरकार के पूर्ण सहयोग का आश्वासन भी दिया।
न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन ने भी इस विचार का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी मध्यस्थता संस्थान की गुणवत्ता उसके प्रशासन की गुणवत्ता, प्रक्रिया की स्वतंत्रता और निर्णय लेने वालों की दक्षता पर निर्भर करती है। वहीं, न्यायमूर्ति अंजारिया ने लागत प्रभावी, पक्ष-केंद्रित और आम आदमी के लिए सुलभ प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में विवाद समाधान के लिए पारंपरिक रूप से अदालतों पर अत्यधिक निर्भरता रही है, जिससे मामलों के निपटारे में देरी होती है। हाल के वर्षों में, विशेष रूप से आर्थिक क्षेत्रों में, 'मध्यस्थता' (Arbitration) को एक आधुनिक और तीव्र समाधान के रूप में अपनाया जा रहा है ताकि व्यापारिक सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा मिल सके।
Frequently Asked Questions
1. GHAC का पूर्ण रूप क्या है?
GHAC का अर्थ 'गुजरात हाई कोर्ट आर्बिट्रेशन सेंटर' (Gujarat High Court Arbitration Centre) है।
2. मध्यस्थता से GIFT City को क्या लाभ होगा?
मजबूत मध्यस्थता ढांचे से विदेशी फर्मों का भरोसा बढ़ेगा, जिससे निवेश में वृद्धि होगी।