यूक्रेन द्वारा रूस की तेल रिफाइनरियों पर लगातार हमलों के कारण रूस अब पेट्रोलियम उत्पादों के लिए भारत पर निर्भर हो गया है। यह घटनाक्रम वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की बढ़ती शक्ति को दर्शाता है।

  • यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस की रिफाइनिंग क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
  • रूस अब पेट्रोलियम उत्पादों के आयात के लिए भारत, तुर्की और मोरक्को जैसे देशों की ओर देख रहा है।
  • भारत ने पिछले दो महीनों में रूस को लगभग दस लाख बैरल रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद भेजे हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरू होने के बाद से पहली बार, रूस अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत से बड़ी मात्रा में रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का आयात कर रहा है। यूक्रेन द्वारा रूसी तेल बुनियादी ढांचे पर किए जा रहे निरंतर हमलों ने रूस की रिफाइनिंग क्षमता को बाधित कर दिया है, जिससे देश के भीतर ईंधन की कमी का खतरा पैदा हो गया है।

मीडिया रिपोर्टों और प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों ने पिछले दो महीनों में लगभग दस लाख बैरल पेट्रोलियम उत्पाद रूस भेजे हैं। इससे पहले, भारत का रूस को होने वाला पेट्रोलियम निर्यात नगण्य था, जो भारत के कुल निर्यात का एक प्रतिशत से भी कम था। पारंपरिक रूप से, भारत के रिफाइंड उत्पाद नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया और यूएई जैसे देशों को भेजे जाते थे।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बदलाव केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक भी है। जहाँ एक ओर भारत रूस से कच्चा तेल (crude oil) खरीदने के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों और टैरिफ के दबाव का सामना कर रहा है, वहीं दूसरी ओर, रूस की रिफाइनरी क्षमता में कमी ने भारत को एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरने का अवसर दिया है।

रूस की घरेलू रिफाइनिंग क्षमता में गिरावट ने भारत को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में एक रणनीतिक लाभ प्रदान किया है।

अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक सुरक्षा नेटवर्क के आंकड़ों के अनुसार, रूस की कम से कम 16 अलग-अलग रिफाइनरियों पर 17 हमले हुए हैं। इन हमलों के कारण रूस की रिफाइनरी क्रूड थ्रूपुट, जो 2026 की पहली तिमाही में 5.18 मिलियन बैरल प्रतिदिन थी, घटकर तीसरी तिमाही में 3.88 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गई है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से, भारत और रूस के बीच तेल व्यापार के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। जनवरी 2022 से भारत के कुल पेट्रोलियम आयात का लगभग एक-चौथाई हिस्सा रूस से आता है। जून 2026 तक, रूस भारत के कच्चे तेल के आयात का लगभग 31.6% हिस्सा था।

Did You Know?: भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी तेल रिफाइनिंग क्षमता वाला देश है, जो इस संकट के समय वैश्विक बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. रूस भारत से क्या आयात कर रहा है?
रूस अब भारत से रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद (जैसे डीजल और पेट्रोल) का आयात कर रहा है ताकि अपनी घरेलू कमी को पूरा किया जा सके।

2. यूक्रेन के हमलों का क्या प्रभाव पड़ा है?
यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस की रिफाइनरियों और तेल डिपो को निशाना बनाया है, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता काफी कम हो गई है।