बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने म्यूचुअल फंड योजनाओं के लिए कैश मार्केट में फंड के नेट सेटलमेंट की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम का उद्देश्य तरलता (liquidity) की समस्याओं को कम करना और परिचालन दक्षता में सुधार करना है।

  • सेबी कैश मार्केट लेनदेन के लिए फंड के नेट सेटलमेंट का प्रस्ताव कर रहा है।
  • इसका उद्देश्य म्यूचुअल फंड योजनाओं के लिए अस्थायी तरलता आवश्यकताओं को कम करना है।
  • प्रतिभूतियों (securities) का निपटान अभी भी सकल (gross) आधार पर ही रहेगा।
  • यह प्रस्ताव केवल व्यक्तिगत म्यूचुअल फंड योजनाओं के स्तर पर लागू होगा।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण परामर्श पत्र जारी किया, जिसमें म्यूचुअल फंड योजनाओं द्वारा कैश मार्केट में किए जाने वाले लेनदेन के लिए फंड के नेट सेटलमेंट की अनुमति देने का प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि, प्रतिभूतियों का निपटान अभी भी सकल (gross) आधार पर ही किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य म्यूचुअल फंड योजनाओं के लिए अस्थायी तरलता की जरूरतों को कम करना और व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देना है।

तरलता की समस्या और सेबी का समाधान

बाजार प्रतिभागियों ने सेबी को बताया था कि वर्तमान में कैश मार्केट में फंड दायित्वों को स्कीम स्तर पर सकल आधार पर पूरा किया जाता है, जिससे म्यूचुअल फंड योजनाओं को परिचालन संबंधी अक्षमताओं और अस्थायी तरलता की कमी का सामना करना पड़ता है। यह समस्या विशेष रूप से इंडेक्स रीबैलेंसिंग के दौरान अधिक गंभीर हो जाती है, जब पैसिव फंडों को अपने पोर्टफोलियो में बड़े बदलाव करने पड़ते हैं या बड़े निवेशकों द्वारा भारी निकासी/सब्सक्रिप्शन किया जाता है।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए पहले से ही लागू नेट सेटलमेंट ढांचे के समान है। सेबी का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि इस बदलाव से मौजूदा सुरक्षा उपाय, जैसे स्कीम-वार लेखांकन, मूल्यांकन और निवेशक सुरक्षा, प्रभावित न हों।

सेबी का यह प्रस्ताव म्यूचुअल फंड परिचालन में दक्षता लाने और बाजार की अस्थिरता के दौरान तरलता प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

महत्वपूर्ण नियम और शर्तें

प्रस्ताव के अनुसार, नेट सेटलमेंट केवल एक व्यक्तिगत म्यूचुअल फंड योजना के स्तर पर ही किया जा सकेगा। एक ही एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) की विभिन्न योजनाओं के बीच नेटिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, एसेट मैनेजमेंट कंपनी और कस्टोडियन को यह सुनिश्चित करना होगा कि इससे दैनिक एनएवी (NAV) गणना या यूनिट-धारकों के हितों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

म्यूचुअल फंड उद्योग में तरलता प्रबंधन हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है। पहले, हर खरीद और बिक्री के लिए अलग से फंड की व्यवस्था करनी पड़ती थी, जिससे बड़े लेनदेन के दौरान नकदी के प्रवाह पर दबाव पड़ता था। सेबी का यह कदम बाजार के आधुनिकिकरण की दिशा में एक निरंतर प्रयास है।

क्या आप जानते हैं?: नेट सेटलमेंट का अर्थ है कि यदि एक योजना ने 100 रुपये के शेयर खरीदे और 80 रुपये के बेचे, तो उसे केवल 20 रुपये का ही भुगतान करना होगा, बजाय इसके कि वह दोनों लेनदेन के लिए अलग-अलग राशि का प्रबंधन करे।

Frequently Asked Questions

1. क्या इससे निवेशकों के पैसे पर कोई असर पड़ेगा?
नहीं, सेबी ने स्पष्ट किया है कि स्कीम-वार लेखांकन और निवेशक सुरक्षा के मौजूदा सुरक्षा उपाय बरकरार रहेंगे।

2. यह प्रस्ताव कब तक प्रभावी हो सकता है?
सेबी ने जनता से 24 सितंबर तक इस पर सुझाव मांगे हैं। समीक्षा के बाद ही इसे लागू किया जाएगा।

विशेषतावर्तमान प्रणाली (Gross)प्रस्तावित प्रणाली (Net)
फंड निपटानप्रत्येक लेनदेन के लिए अलगकुल खरीद-बिक्री का अंतर
प्रतिभूति निपटानसकल (Gross) आधार परसकल (Gross) आधार पर
तरलता आवश्यकताअधिककम