VST टिलर्स ट्रैक्टर और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने किसानों को किफायती दरों पर ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने के लिए बेंगलुरु में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का उद्देश्य कृषि मशीनीकरण को सुलभ बनाना और किसानों पर वित्तीय बोझ कम करना है।

  • VST टिलर्स और यूनियन बैंक के बीच कृषि ऋण के लिए साझेदारी।
  • 1,000 से अधिक डीलरों के नेटवर्क के माध्यम से ऋण सुविधा उपलब्ध होगी।
  • ट्रैक्टर, पावर टिलर, पावर रीपर और पावर वीडर की खरीद पर वित्तीय सहायता।
  • कर्नाटक और पूरे भारत के किसानों को लक्षित किया गया है।

बेंगलुरु: कृषि क्षेत्र में आधुनिकता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, VST टिलर्स ट्रैक्टर लिमिटेड (VTTL) ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य किसानों को ट्रैक्टर और विभिन्न कृषि मशीनीकरण उपकरणों की खरीद के लिए सुलभ और किफायती रिटेल फाइनेंस प्रदान करना है।

इस समझौते के तहत, यूनियन बैंक कर्नाटक सहित पूरे देश में किसानों को VST के उत्पादों जैसे कि ट्रैक्टर, पावर टिलर, पावर रीपर और पावर वीडर खरीदने के लिए ऋण सुविधा प्रदान करेगा। विशेष बात यह है कि यह वित्तीय सुविधा VST के 1,000 से अधिक डीलरों के विशाल नेटवर्क के माध्यम से उपलब्ध होगी, जिससे किसानों को उनके खेतों के पास ही ऋण प्राप्त करने में आसानी होगी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में कृषि मशीनीकरण की दर अभी भी बहुत कम है, विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के बीच। किफायती ऋण की कमी अक्सर किसानों को पुरानी तकनीकों पर निर्भर रहने के लिए मजबूर करती है। यह साझेदारी वित्तीय बाधाओं को दूर करके उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेगी।

किफायती वित्त पोषण कृषि मशीनीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवर्तक है। - एंटनी चेरुकारा, सीईओ, VST टिलर्स ट्रैक्टर लिमिटेड।

यूनियन बैंक के महाप्रबंधक डॉ. एच.टी. वासापा ने इस अवसर पर कहा कि यह साझेदारी किसानों की ऋण तक पहुंच को मजबूत करेगी और उन्हें आधुनिक उपकरण अपनाने में सक्षम बनाएगी। वर्तमान में, कर्नाटक में ट्रैक्टर बाजार में रिटेल फाइनेंस की पैठ केवल 10% है, जो इस सहयोग के बाद बढ़ने की उम्मीद है।

ऐतिहासिक संदर्भ: कृषि मशीनीकरण का विकास

ऐतिहासिक रूप से, भारतीय कृषि पारंपरिक तरीकों से धीरे-धीरे मशीनीकरण की ओर बढ़ रही है। हालांकि, उच्च अग्रिम लागत और ऋण की जटिल प्रक्रियाओं के कारण, छोटे किसान अक्सर आधुनिक मशीनों से वंचित रह जाते हैं। सरकार की सब्सिडी योजनाओं के अलावा, निजी बैंक और निर्माता कंपनियों के बीच इस तरह के सहयोग से एक मजबूत वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो रहा है।

Did You Know?: कर्नाटक में ट्रैक्टर बाजार सालाना लगभग 56,000 से 60,000 यूनिट्स का है, जबकि टिलर बाजार लगभग 5,000 यूनिट्स प्रति वर्ष है।

Frequently Asked Questions

1. यह ऋण सुविधा कहाँ उपलब्ध होगी?
यह सुविधा VST के 1,000 से अधिक डीलरों के माध्यम से पूरे भारत में उपलब्ध होगी।

2. किन उपकरणों पर ऋण मिल सकता है?
किसान ट्रैक्टर, पावर टिलर, पावर रीपर और पावर वीडर जैसे उपकरणों के लिए ऋण ले सकते हैं।