आंध्र प्रदेश बुद्धिजीवी मंच ने विशाखापत्तनम स्टील प्लांट (VSP) के अस्तित्व को बचाने के लिए केंद्र सरकार से कैप्टिव खदानें आवंटित करने और इसे SAIL के साथ विलय करने की मांग की है।

  • VSP के लिए कैप्टिव खदानों की कमी से उत्पादन लागत में ₹6,400 प्रति टन की वृद्धि हो रही है।
  • विशाखापत्तनम स्टील प्लांट को SAIL (Steel Authority of India Ltd) के साथ विलय करने की मांग उठी है।
  • श्रमिकों के बकाया वेतन और मशीनों के आधुनिकीकरण के लिए धन की कमी का आरोप लगाया गया है।

विशाखापत्तनम में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, आंध्र प्रदेश बुद्धिजीवी मंच के अध्यक्ष चलासानी श्रीनिवास ने विशाखापत्तनम स्टील प्लांट (VSP) के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि प्लांट की आर्थिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए इसे 'कैप्टिव माइन' (स्वयं की खदानें) आवंटित की जाएं और इसे Steel Authority of India Ltd (SAIL) के साथ विलय कर दिया जाए।

श्रीनिवास ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और YSR कांग्रेस अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी से अपील की है कि वे इस महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाएं। उन्होंने तर्क दिया कि बिना अपनी खदानों के, प्लांट को कच्चे माल के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है, जो इसके अस्तित्व के लिए खतरा है।

लागत और श्रमिकों की समस्या

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह खुलासा किया गया कि कैप्टिव खदानों के अभाव में स्टील उत्पादन की लागत में प्रति टन ₹6,400 की भारी वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त, समिति के प्रतिनिधियों ने गंभीर आरोप लगाए कि कई अनुबंध श्रमिकों को हटा दिया गया है और उनके आधार कार्ड तक ब्लॉक कर दिए गए हैं।

कैप्टिव खदानों के बिना स्टील संयंत्र का संचालन करना आर्थिक रूप से आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।

विशाखाUkku परिरक्षण पोराटा समिति के सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र द्वारा आवंटित ₹11,400 करोड़ का उपयोग केवल बैंकों का ऋण चुकाने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि प्लांट के आधुनिकीकरण, मशीनरी की मरम्मत या श्रमिकों के कल्याण के लिए कोई राशि खर्च नहीं की गई है। वर्तमान में, श्रमिकों के लगभग ₹900 करोड़ के बकाया का भुगतान भी लंबित है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि विशाखापत्तनम स्टील प्लांट न केवल आंध्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए एक स्तंभ है, बल्कि यह हजारों परिवारों की आजीविका का आधार भी है। यदि इसे आवश्यक संसाधन और स्वायत्तता नहीं मिली, तो यह औद्योगिक संकट क्षेत्र में एक बड़ा झटका हो सकता है।

Did You Know?: स्टील उद्योग में 'कैप्टिव माइन' का अर्थ है ऐसी खदान जिसका स्वामित्व और उपयोग सीधे उस उद्योग द्वारा किया जाता है जो स्टील बनाता है, जिससे लागत कम होती है।

Frequently Asked Questions

1. VSP के लिए विलय की मांग क्यों की जा रही है?
विलय से प्लांट को SAIL के संसाधनों और वित्तीय स्थिरता का लाभ मिल सकता है, जिससे इसकी परिचालन क्षमता बढ़ेगी।

2. खदानों की कमी से क्या प्रभाव पड़ता है?
खदानों के अभाव में कच्चे माल की खरीद महंगी हो जाती है, जिससे उत्पादन लागत प्रति टन ₹6,400 तक बढ़ जाती है।