पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार के.वी. सुब्रमण्यन ने भारत की जीडीपी गणना पद्धति का बचाव करते हुए हालिया आलोचनाओं को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि डेटा में संशोधन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं।
- के.वी. सुब्रमण्यन ने जीडीपी आंकड़ों पर संदेह करने वाले दावों को 'पूरी तरह से फर्जी' बताया।
- उन्होंने स्पष्ट किया कि जीडीपी संशोधन अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसे 'डबल डिफ्लेशन' का पालन करते हैं।
- बैंक ऋण और पूंजीगत व्यय जैसे संकेतक मजबूत आर्थिक विस्तार की पुष्टि करते हैं।
भारत की आर्थिक विकास दर और जीडीपी गणना पद्धति को लेकर चल रही बहस के बीच, पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) के.वी. सुब्रमण्यन ने आधिकारिक आंकड़ों का पुरजोर बचाव किया है। इंडिया टुडे को दिए एक साक्षात्कार में, उन्होंने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जो भारत के हालिया विकास आंकड़ों पर सवाल उठा रहे थे।
सुब्रमण्यन ने विशेष रूप से उन आलोचनाओं का जवाब दिया जिनमें जीडीपी श्रृंखला में किए गए संशोधनों पर संदेह जताया गया था। उन्होंने कहा, "वह 2.6% का दावा पूरी तरह से फर्जी है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्थिक डेटा में होने वाले संशोधन कोई मनमानी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह डबल डिफ्लेशन (Double Deflation) जैसे स्थापित अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करते हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत जैसे उभरते बाजार के लिए डेटा की विश्वसनीयता वैश्विक निवेशकों के विश्वास के लिए महत्वपूर्ण है। जब पूर्व अर्थशास्त्री और नीति निर्माता डेटा की सटीकता पर सवाल उठाते हैं, तो यह बाजार में अनिश्चितता पैदा कर सकता है। सुब्रमण्यन का तर्क है कि आर्थिक संकेतकों को राजनीति के चश्मे से नहीं, बल्कि शुद्ध आर्थिक सिद्धांतों के आधार पर देखा जाना चाहिए।
जीडीपी डेटा का विश्लेषण राजनीति के बजाय अर्थशास्त्र पर आधारित होना चाहिए।
सुब्रमण्यन ने पूर्व सीईए अरविंद सुब्रमण्यन और अन्य विशेषज्ञों द्वारा उठाए गए 'डेटा ट्रस्ट डेफिसिट' (डेटा पर विश्वास की कमी) के मुद्दों को भी संबोधित किया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि डेटा गलत होता, तो जमीनी स्तर के आर्थिक संकेतक इसके विपरीत संकेत देते।
उन्होंने उदाहरण दिया कि यात्री वाहनों की दो अंकों में वृद्धि, बैंक ऋण में तेजी और पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में बढ़ोतरी इस बात के ठोस प्रमाण हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था वास्तव में मजबूत विस्तार के दौर से गुजर रही है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत ने पिछले दशक में अपनी जीडीपी गणना पद्धति में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिसमें आधार वर्ष को बदलना और नए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का उपयोग करना शामिल है। ये बदलाव वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ तालमेल बिठाने के लिए किए गए थे ताकि डेटा की तुलना अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं से की जा सके।
Frequently Asked Questions
1. के.वी. सुब्रमण्यन ने किस दावे को फर्जी बताया?
उन्होंने जीडीपी विकास दर के संबंध में किए गए 2.6% के दावे को पूरी तरह से आधारहीन और फर्जी बताया।
2. क्या जीडीपी डेटा में संशोधन सामान्य है?
हाँ, सुब्रमण्यन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर डेटा में संशोधन एक वैश्विक और सामान्य प्रक्रिया है।