आंध्र प्रदेश राज्य फिल्म, टेलीविजन और थिएटर विकास निगम (APSFTVTDC) के अध्यक्ष पी. भरत भूषण ने स्पष्ट किया है कि सरकार फिल्म निर्माताओं और प्रदर्शकों के बीच राजस्व-साझाकरण मॉडल लागू करने में असमर्थ है। वित्तीय बाधाओं के कारण सहायता प्रदान करना भी फिलहाल संभव नहीं है।

  • सरकार फिल्म निर्माताओं और थिएटर मालिकों के बीच राजस्व साझा करने का मॉडल लागू नहीं कर पाएगी।
  • राजकोषीय संकट के कारण फिल्म उद्योग को कोई वित्तीय सहायता देना भी वर्तमान में कठिन है।
  • फिल्म प्रदर्शकों ने लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाने और बिजली दरों में राहत की मांग की है।

विजयावाड़ा में आयोजित आंध्र प्रदेश प्रदर्शक समिति (AP Exhibitors’ Committee) की बैठक के दौरान, APSFTVTDC अध्यक्ष पी. भरत भूषण ने फिल्म उद्योग के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार वर्तमान में फिल्म निर्माताओं और प्रदर्शकों के बीच प्रतिशत-आधारित राजस्व-साझाकरण प्रणाली (revenue-sharing system) को लागू करने की स्थिति में नहीं है।

भरत भूषण ने यह भी स्वीकार किया कि सरकार वर्तमान में गंभीर वित्तीय बाधाओं का सामना कर रही है। इस आर्थिक तंगी के कारण, सरकार न तो फिल्म निर्माताओं को और न ही थिएटर मालिकों (exhibitors) को किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करने में सक्षम है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब फिल्म उद्योग लगातार बदलती आर्थिक स्थितियों और परिचालन लागतों से जूझ रहा है।

उद्योग की प्रमुख मांगें

बैठक के दौरान, फिल्म उद्योग के विभिन्न प्रतिनिधियों, जिनमें निर्माता, थिएटर मालिक और प्रदर्शक शामिल थे, ने सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। उद्योग जगत का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक जटिलताओं को कम करना और परिचालन लागत को नियंत्रित करना है।

  • B-फॉर्म लाइसेंस: उद्योग ने सिनेमैटोग्राफ अधिनियम के अनुसार पांच साल की अवधि के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम के माध्यम से B-फॉर्म लाइसेंस जारी करने का आग्रह किया।
  • अग्नि सुरक्षा लाइसेंस: फायर लाइसेंस के नवीनीकरण की अवधि को भी पांच वर्षों तक बढ़ाने की मांग की गई।
  • बिजली शुल्क में राहत: प्रदर्शकों ने सिनेमा प्रदर्शन को एक 'उद्योग' के रूप में वर्गीकृत करने की मांग की, ताकि उन्हें होटल, सेवा और पर्यटन क्षेत्रों के समान रियायती बिजली दरें मिल सकें।
  • टिकट दरें और रखरखाव: नई फिल्मों के लिए अचानक कीमतों में वृद्धि (surge pricing) को रोकने और रखरखाव शुल्क (maintenance charges) बढ़ाने की भी मांग की गई।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि फिल्म उद्योग की ये मांगें सीधे तौर पर सिनेमाघरों की लाभप्रदता और दर्शकों की पहुंच से जुड़ी हैं। यदि बिजली दरों और लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं में सुधार नहीं किया जाता है, तो एकल स्क्रीन सिनेमाघरों के अस्तित्व पर संकट गहरा सकता है।

राजस्व साझाकरण मॉडल की विफलता फिल्म उद्योग के भीतर निर्माता और प्रदर्शक के बीच संतुलन को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना सकती है।
Did You Know?: भारत में सिनेमा उद्योग का एक बड़ा हिस्सा अभी भी एकल स्क्रीन थिएटरों पर निर्भर है, जो अब बड़े मल्टीप्लेक्स के सामने संघर्ष कर रहे हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: सरकार राजस्व-साझाकरण प्रणाली क्यों लागू नहीं कर सकती?
उत्तर: अध्यक्ष पी. भरत भूषण के अनुसार, सरकार वर्तमान में वित्तीय बाधाओं और बजटीय सीमाओं का सामना कर रही है।

प्रश्न 2: प्रदर्शकों की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: प्रदर्शक मुख्य रूप से सिंगल-विंडो लाइसेंसिंग, पांच साल के लिए अग्नि लाइसेंस नवीनीकरण और कम बिजली दरों की मांग कर रहे हैं।