आरबीआई की FCNR-B योजना के तहत भारी निवेश आने से भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 67 पैसे चढ़कर 5 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। एफसीएनआर(बी) में 127 अरब डॉलर का रिकॉर्ड इनफ्लो इस मजबूती का मुख्य कारण है।

  • रुपया डॉलर के मुकाबले 67 पैसे की बढ़त के साथ 5 महीने के उच्च स्तर पर।
  • FCNR(B) योजना में 127 अरब डॉलर का रिकॉर्ड इनफ्लो दर्ज।
  • आरबीआई की मजबूत विदेशी मुद्रा स्थिति से रुपए को मिलेगी स्थिरता।

भारतीय मुद्रा के लिए गुरुवार का दिन ऐतिहासिक रहा। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 67 पैसे की महत्वपूर्ण बढ़त दर्ज करते हुए पिछले 5 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। जून के बाद घरेलू मुद्रा में यह सबसे बड़ी रिकवरी है, जिसने वैश्विक बाजारों में भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति विश्वास को दर्शाया है।

विदेशी मुद्रा प्रवाह में रिकॉर्ड उछाल

इस जबरदस्त मजबूती के पीछे का मुख्य कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुरू की गई FCNR(B) (विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक जमा) योजना के प्रति निवेशकों का उत्साह है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक इस योजना में कुल 127.226 अरब डॉलर का इनफ्लो आया है, जो कि बाजार विशेषज्ञों के 100 अरब डॉलर के अनुमान से कहीं अधिक है।

डेटा विस्तार से बताता है कि केवल FCNR(B) ही नहीं, बल्कि अन्य माध्यमों से भी विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ा है। बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ECB) में 3.891 अरब डॉलर और विदेशों से विदेशी मुद्रा में उधार (OFCB) में 5.260 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया है।

आरबीआई की रणनीतिक एफसीएनआर(बी) योजना ने न केवल डॉलर की मांग को संतुलित किया है, बल्कि रुपए की अस्थिरता को कम करने में भी निर्णायक भूमिका निभाई है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आरबीआई की यह सक्रियता विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और रुपए की गिरावट को रोकने के लिए एक मास्टरस्ट्रोक है। जब विदेशी निवेश इस स्तर पर बढ़ता है, तो यह देश के चालू खाता घाटे (CAD) को प्रबंधित करने में मदद करता है और वैश्विक निवेशकों को भारतीय बाजार में सुरक्षा का संकेत देता है।

निवेशकों के लिए समय सीमा

आरबीआई ने रुपए की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए 8 जून को विशेष अमेरिकी-डॉलर स्वैप सुविधा के तहत इन योजनाओं को पेश किया था। जबकि FCNR(B) जमा 31 अगस्त तक ही उपलब्ध थी, निवेशकों के पास अभी भी ECB और OFCB योजनाओं के माध्यम से 31 दिसंबर, 2026 तक निवेश करने का अवसर है।

योजना का नामइनफ्लो (अरब डॉलर में)निवेश की अंतिम तिथि
FCNR(B)127.22631 अगस्त 2026
ECB3.89131 दिसंबर 2026
OFCB5.26031 दिसंबर 2026
Did You Know?: FCNR(B) जमा अनिवासी भारतीयों (NRIs) को विदेशी मुद्रा में पैसा जमा करने की अनुमति देती है, जिससे देश में विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ता है।

Frequently Asked Questions

1. रुपया डॉलर के मुकाबले क्यों मजबूत हुआ?
आरबीआई की FCNR(B) योजना में उम्मीद से अधिक 127 अरब डॉलर के निवेश के कारण रुपया मजबूत हुआ है।

2. क्या अभी भी विदेशी निवेश का मौका है?
हाँ, निवेशक ECB और OFCB योजनाओं के तहत 31 दिसंबर, 2026 तक निवेश कर सकते हैं।