सीबीआई ने व्यवसायी सुभाष चंद्र और अन्य के खिलाफ LIC हाउसिंग फाइनेंस को ₹1,322 करोड़ का नुकसान पहुंचाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि ऋण प्राप्त करने के लिए गलत नेट वर्थ प्रमाणपत्र पेश किए गए थे।

  • सीबीआई ने व्यवसायी सुभाष चंद्र और कई कंपनियों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
  • आरोप है कि गलत नेट वर्थ प्रमाणपत्र दिखाकर LIC हाउसिंग फाइनेंस को ₹1,322 करोड़ का नुकसान पहुंचाया गया।
  • सुभाष चंद्र ने दिवालियापन कार्यवाही के दौरान अपनी संपत्ति और नेट वर्थ के दावों में विरोधाभास दिखाया।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिग्गज व्यवसायी सुभाष चंद्र और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने तथ्यों को गलत तरीके से पेश करके और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए नेट वर्थ प्रमाणपत्रों का उपयोग करके LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) को ₹1,322 करोड़ से अधिक का वित्तीय नुकसान पहुंचाया है।

LICHFL द्वारा 31 अगस्त, 2026 को दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। प्राथमिकी के अनुसार, 2018 में सुभाष चंद्र की व्यक्तिगत गारंटी पर दो प्रमुख ऋण सुविधाएं प्रदान की गई थीं। इनमें से एक ऋण ₹500 करोड़ का था जो Vasant Sagar Properties Private Limited और Pan India Infraprojects Private Limited को दिया गया था, जबकि दूसरा ₹480 करोड़ का ऋण Digital Subscriber Management and Consultancy Services Private Limited को दिया गया था।

धोखाधड़ी का तरीका: बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई संपत्ति

जांच में यह बात सामने आई है कि ऋण प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत किए गए नेट वर्थ प्रमाणपत्र पूरी तरह से भ्रामक थे। प्राथमिकी के अनुसार, सुभाष चंद्र ने मार्च 2017 तक अपनी नेट वर्थ ₹59,113.21 करोड़ बताई थी, जिसे बाद में जुलाई 2018 में ₹40,562 करोड़ दिखाया गया। हालांकि, जब मामला दिवालियापन और दिवालियापन संहिता (IBC) के तहत व्यक्तिगत दिवालियापन समाधान के लिए पहुंचा, तो उन्होंने इन आंकड़ों को पूरी तरह से नकार दिया।

सुभाष चंद्र ने दिवालियापन कार्यवाही के दौरान स्वीकार किया कि 2024 में उनकी नेट वर्थ केवल ₹31.79 करोड़ थी, जो उनके द्वारा पहले दिए गए दावों से जमीन-आसमान का अंतर दर्शाती है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला भारत के कॉर्पोरेट गवर्नेंस और बैंकिंग सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि व्यक्तिगत गारंटियों के आधार पर दिए गए ऋणों के लिए नेट वर्थ का सत्यापन पारदर्शी नहीं होता है, तो यह वित्तीय संस्थानों के लिए प्रणालीगत जोखिम पैदा कर सकता है। यह मामला दर्शाता है कि कैसे दिवालियापन प्रक्रियाओं के दौरान विरोधाभासी दावे कानून की जटिलताओं का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।

वर्तमान में, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने सुभाष चंद्र द्वारा अपनी संपत्तियों को बेचने या स्थानांतरित करने पर रोक लगा दी है। यह कानूनी लड़ाई अब और भी जटिल हो गई है क्योंकि लेनदारों का दावा ₹22,006.57 करोड़ से अधिक है, जबकि समाधान की योजना बहुत कम राशि की बात करती है।

Did You Know?: व्यक्तिगत गारंटी का अर्थ है कि यदि कंपनी ऋण चुकाने में विफल रहती है, तो ऋणदाता सीधे व्यक्ति की व्यक्तिगत संपत्ति से वसूली कर सकता है।

Frequently Asked Questions

1. सुभाष चंद्र पर मुख्य आरोप क्या है?
उन पर गलत नेट वर्थ प्रमाणपत्र प्रस्तुत करके LIC हाउसिंग फाइनेंस को ₹1,322 करोड़ का आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप है।

2. NCLT ने हाल ही में क्या आदेश दिया है?
NCLT ने सुभाष चंद्र को अपनी संपत्तियों को बेचने या हस्तांतरित करने से रोक दिया है।