आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में झींगा किसानों ने प्रोसेसिंग प्लांटों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है। किसानों ने कीमतों में भारी गिरावट और इनपुट लागत बढ़ने का आरोप लगाया है।
- गुदुर और कोटा क्षेत्र के किसानों ने GMT, GVR और पेनवर प्रोडक्ट्स प्लांटों पर विरोध प्रदर्शन किया।
- 30-काउंट टाइगर श्रिम्प की कीमत एक महीने में ₹580 से गिरकर ₹430 रह गई।
- किसानों ने निर्यातकों और प्रोसेसिंग प्लांटों द्वारा 'सिंडिकेट' बनाकर कीमतें घटाने का आरोप लगाया।
- झींगा फीड की कीमतों में ₹26 प्रति किलो की अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
आंध्र प्रदेश के SPSR नेल्लोर जिले में जलीय कृषि (aquaculture) क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। गुरुवार को गुदुर और कोटा क्षेत्र के किसानों ने एक साथ कई प्रोसेसिंग प्लांटों के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। आंध्र प्रदेश झींगा किसान महासंघ के संयोजक दुग्गिनेनी गोपीनाथ के नेतृत्व में यह प्रदर्शन मुख्य रूप से GMT, GVR और पेनवर प्रोडक्ट्स लिमिटेड जैसे संयंत्रों पर केंद्रित रहा।
महासंघ के संयोजक दुग्गिनेनी गोपीनाथ ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रोसेसिंग प्लांटों और झींगा निर्यातकों ने मिलकर एक 'सिंडिकेट' बना लिया है, ताकि वे किसानों से बेहद कम दरों पर टाइगर श्रिम्प खरीद सकें। आंकड़ों के अनुसार, एक महीने पहले 30-काउंट टाइगर श्रिम्प की कीमत ₹580 थी, जो अब घटकर ₹430 रह गई है। इसी तरह, 20-काउंट श्रिम्प की कीमत ₹730 से गिरकर ₹570 पर आ गई है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक स्थानीय विवाद नहीं है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अस्थिरता का परिणाम है। जब प्रोसेसिंग प्लांट और निर्यातक मिलकर कीमतें घटाते हैं और साथ ही फीड जैसी आवश्यक चीजों की कीमतें बढ़ती हैं, तो सारा जोखिम किसान पर आ जाता है। फीड की कीमतों में ₹26 प्रति किलो की वृद्धि ने किसानों की कमर तोड़ दी है, जिससे उनके लिए खेती जारी रखना मुश्किल हो गया है।
झींगा कीमतों में वर्तमान अस्थिरता जलीय कृषि क्षेत्र में मूल्य-स्थिरीकरण तंत्र की कमी को दर्शाती है, जिससे किसान कॉर्पोरेट सिंडिकेट के सामने लाचार हो जाते हैं।
इस विरोध प्रदर्शन में नेल्लोर जिला झींगा किसान महासंघ के नेता दानेकुला जगनमोहन राव, अवुल मनोहर रेड्डी और नादेंडला रवींद्र बाबू ने भी भाग लिया। किसानों ने अपनी अनिश्चितता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें यह तक नहीं पता कि व्यापारी उनका माल कब खरीदेंगे या खरीदारी पूरी तरह बंद कर देंगे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
आंध्र प्रदेश लंबे समय से झींगा निर्यात का एक वैश्विक केंद्र रहा है। हालांकि, यह उद्योग समय-समय पर बीमारियों और अंतरराष्ट्रीय मांग में उतार-चढ़ाव से जूझता रहा है। वर्तमान संकट कॉर्पोरेट-आधारित प्रोसेसिंग के बढ़ते प्रभाव के कारण और गहरा गया है, जिससे बाजार की शक्ति किसानों के बजाय निर्यातकों के हाथों में चली गई है।
| झींगा ग्रेड | एक महीने पहले कीमत | वर्तमान कीमत | प्रति यूनिट हानि |
|---|---|---|---|
| 30-काउंट टाइगर | ₹580 | ₹430 | ₹150 |
| 20-काउंट टाइगर | ₹730 | ₹570 | ₹160 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: किसान प्लांटों पर 'सिंडिकेट' बनाने का आरोप क्यों लगा रहे हैं?
किसानों का मानना है कि प्रोसेसिंग प्लांट और निर्यातक आपस में मिलीभगत कर रहे हैं ताकि वे प्रतिस्पर्धी बोली लगाने के बजाय एक तय कम कीमत पर माल खरीद सकें।
प्रश्न 2: बातचीत की वर्तमान स्थिति क्या है?
प्रोसेसिंग प्लांट के प्रबंधन ने किसानों को आश्वासन दिया है कि उचित और लाभकारी कीमतों पर चर्चा करने के लिए 2-3 दिनों में एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी।