आंध्र प्रदेश के झींगा किसानों ने फीड की कीमतों में भारी वृद्धि के विरोध में अप्रैल से फसल अवकाश (crop holiday) घोषित करने की चेतावनी दी है। लगभग 2,000 किसानों ने अमलापुरम में एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान यह निर्णय लिया।
- झींगा फीड की कीमतों में मात्र दो महीनों में ₹17 प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई है।
- किसानों ने 30 सितंबर तक सरकार से बातचीत करने की मांग की है।
- यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो अप्रैल से 'क्रॉप हॉलिडे' (फसल अवकाश) घोषित किया जाएगा।
- किसानों ने फीड कंपनियों के प्रोबायोटिक्स के बहिष्कार का भी निर्णय लिया है।
आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में झींगा पालन उद्योग एक बड़े संकट की ओर बढ़ रहा है। आंध्र प्रदेश स्टेट एक्वा फार्मर्स एसोसिएशन (APSAFA) ने सोमवार को अमलापुरम में आयोजित एक राज्य स्तरीय बैठक में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार ने 30 सितंबर तक फीड की कीमतों में हुई अत्यधिक वृद्धि और अन्य प्रमुख चिंताओं पर चर्चा नहीं की, तो वे अगले साल अप्रैल से झींगा उत्पादन पर पूर्ण विराम यानी 'क्रॉप हॉलिडे' घोषित कर देंगे।
अमलापुरम के डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनसीमा जिले में आयोजित इस बैठक में तटीय आंध्र प्रदेश के लगभग 2,000 झींगा किसानों ने हिस्सा लिया। APSAFA के अध्यक्ष जी. गांधी भगवान राजू ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि कंपनियों ने पिछले दो महीनों के भीतर ही झींगा फीड की अधिकतम कीमत में ₹17 प्रति किलोग्राम की भारी वृद्धि कर दी है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा गठित मूल्य निगरानी समिति की विफलता पर भी कड़ा रोष व्यक्त किया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि झींगा पालन केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि तटीय आंध्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। लगभग 3.5 लाख एकड़ भूमि पर फैले इस उद्योग से 10 लाख से अधिक लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। यदि किसान 'क्रॉप हॉलिडे' का निर्णय लेते हैं, तो इसका असर न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक झींगा आपूर्ति श्रृंखला (Global Shrimp Supply Chain) पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
फीड की कीमतों में अनियंत्रित वृद्धि और समर्थन मूल्य का अभाव किसानों को कर्ज के जाल में धकेल रहा है।
विरोध स्वरूप, किसानों ने एक और कड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि वे फीड कंपनियों द्वारा निर्मित प्रोबायोटिक्स का बहिष्कार करेंगे और अन्य कंपनियों के उत्पादों का उपयोग करेंगे। यह कदम फीड कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
आंध्र प्रदेश लंबे समय से भारत के झींगा निर्यात का मुख्य केंद्र रहा है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में कच्चे माल की लागत और वैश्विक बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव ने किसानों की लाभप्रदता को काफी प्रभावित किया है। समर्थन मूल्य (Support Price) की मांग अब एक बार फिर से प्रमुखता से उठ रही है ताकि किसानों को बाजार की अस्थिरता से बचाया जा सके।
Frequently Asked Questions
1. किसान 'क्रॉप हॉलिडे' क्यों चाहते हैं?
फीड की बढ़ती कीमतों और बाजार में अनिश्चितता के कारण खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है।
2. सरकार से किसानों की मुख्य मांग क्या है?
किसान फीड की कीमतों पर नियंत्रण और झींगा के लिए एक सुनिश्चित समर्थन मूल्य (Support Price) की मांग कर रहे हैं।