केंद्र सरकार ने थर्मल पावर प्लांटों में कोयले के स्टॉक को सुरक्षित करने के लिए कोयला रेक लोडिंग में 20% की भारी वृद्धि की है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के आंकड़ों के अनुसार, कई पावर प्लांट गंभीर स्तर पर कोयले की कमी का सामना कर रहे थे।

  • कोयला रेक लोडिंग में सितंबर के पहले सप्ताह में 20% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • 53 थर्मल पावर प्लांटों में कोयले का स्टॉक उनके सामान्य आवश्यकता स्तर के 25% से कम था।
  • कोल इंडिया ने उत्पादन बढ़ाकर प्रतिदिन 1.7 मिलियन टन कर दिया है।

भारत सरकार ने देश के ऊर्जा क्षेत्र को स्थिरता प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने सोमवार को सूचित किया कि बिजली क्षेत्र को आपूर्ति के लिए कोयला रेक लोडिंग में 3 सितंबर से 6 सितंबर के बीच लगभग 20% की वृद्धि हुई है। यह कदम उन थर्मल पावर प्लांटों की स्थिति सुधारने के लिए उठाया गया है जहां कोयले का भंडार चिंताजनक स्तर तक गिर गया था।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, 5 सितंबर तक देश के 53 घरेलू कोयला आधारित पावर प्लांट अपने महत्वपूर्ण मानक स्तर (Critical Normative Level) से नीचे काम कर रहे थे। इन संयंत्रों में कोयले का स्टॉक उनकी सामान्य आवश्यकता के 25% से भी कम था, जो बिजली उत्पादन में बाधा उत्पन्न कर सकता था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मानसून के दौरान कोयला खनन और परिवहन में होने वाली बाधाएं भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती रही हैं। यदि कोयले की आपूर्ति में देरी होती है, तो इसका सीधा असर ग्रिड स्थिरता और बिजली की दरों पर पड़ सकता है। सरकार द्वारा रेक लोडिंग में की गई यह वृद्धि मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को पाटने का एक रणनीतिक प्रयास है।

कोयला आपूर्ति में तेजी लाना केवल उत्पादन बढ़ाने के बारे में नहीं है, बल्कि लॉजिस्टिक्स और रेल नेटवर्क के कुशल प्रबंधन के बारे में भी है।

मंत्रालय ने बताया कि रेक लोडिंग की संख्या में तेजी से सुधार हुआ है। 3 सितंबर को प्रति दिन 370 रेक लोड किए जा रहे थे, जो बढ़कर 6 सितंबर को 444 रेक तक पहुंच गए। इसके अतिरिक्त, कोल इंडिया (Coal India) द्वारा संचालित खदानों ने भी उत्पादन में वृद्धि की है। बारिश के कारण प्रभावित शुरुआती दिनों में उत्पादन 1.36 मिलियन टन प्रतिदिन था, जिसे अब बढ़ाकर 1.7 मिलियन टन प्रतिदिन कर दिया गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत अपनी बिजली जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा कोयले से पूरी करता है। मानसून के महीनों के दौरान, भारी बारिश अक्सर खदानों में जलभराव का कारण बनती है, जिससे उत्पादन और परिवहन दोनों प्रभावित होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने इस मौसम में आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक बफर स्टॉक बनाने और रेल बुनियादी ढांचे में सुधार करने पर ध्यान केंद्रित किया है।

Did You Know?: भारत दुनिया के सबसे बड़े कोयला उत्पादकों में से एक है, लेकिन बिजली उत्पादन के लिए इसकी निर्भरता अभी भी काफी अधिक है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: वर्तमान में कितने पावर प्लांट कोयले की कमी का सामना कर रहे हैं?
उत्तर: CEA के आंकड़ों के अनुसार, 53 पावर प्लांट अपने मानक स्तर के 25% से कम स्टॉक के साथ काम कर रहे थे।

प्रश्न 2: सरकार ने आपूर्ति बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर: सरकार ने कोयला रेक लोडिंग में 20% की वृद्धि की है और कोल इंडिया के माध्यम से उत्पादन बढ़ाया है।