एक हालिया सर्वे के अनुसार, लगभग 39% ऑनलाइन खरीदार FMCG ब्रांडों की वेबसाइटों पर उत्पादों की 'बेस्ट-बिफोर' तारीख नहीं देख पा रहे हैं। यह खुलासा उपभोक्ताओं की सुरक्षा और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करता है।

  • 39% ऑनलाइन खरीदारों को अधिकांश FMCG वेबसाइटों पर एक्सपायरी डेट नहीं मिली।
  • 33% उपभोक्ताओं ने कहा कि उन्हें किसी भी ऐप या वेबसाइट पर यह जानकारी नहीं मिली।
  • अमूल, पतंजलि और नेस्ले जैसे बड़े ब्रांडों की अपनी वेबसाइटों पर भी यह कमी पाई गई।
  • FSSAI अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर एक्सपायरी डेट दिखाना अनिवार्य करने की तैयारी में है।

कल्पना कीजिए कि आप ऑनलाइन बिस्कुट या राशन का पैकेट ऑर्डर कर रहे हैं। आप कीमत और सामग्री तो देख लेते हैं, लेकिन एक महत्वपूर्ण जानकारी गायब है: वह उत्पाद कितने समय तक सुरक्षित है? एक हालिया LocalCircles सर्वेक्षण ने इस गंभीर समस्या को उजागर किया है, जिसमें पाया गया कि अधिकांश FMCG ब्रांडों की वेबसाइटों और ऐप्स पर 'बेस्ट-बिफोर' (उपयोग की सर्वोत्तम तिथि) का विवरण नहीं दिया गया है।

सर्वेक्षण में लगभग 20,000 उपभोक्ताओं से बात की गई। चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि 39% उत्तरदाताओं को अधिकांश वेबसाइटों पर एक्सपायरी डेट नहीं मिली। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि 33% लोगों ने कहा कि उन्हें किसी भी प्लेटफॉर्म पर यह जानकारी नहीं मिली। केवल 27% ग्राहकों को ही सभी प्लेटफॉर्म्स पर यह जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध थी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक तकनीकी कमी नहीं है, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। जब ग्राहक को निर्माण तिथि (Manufacturing Date) ही नहीं पता होती, तो वह यह गणना नहीं कर सकता कि उत्पाद की कितनी शेल्फ लाइफ बची है। यह खाद्य सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा जोखिम है।

डिजिटल युग में पारदर्शिता का अर्थ केवल उत्पाद दिखाना नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और वैधता की पूरी जानकारी देना है।

यह समस्या केवल क्विक-कॉमर्स ऐप्स तक सीमित नहीं है। सर्वेक्षण में Amul, Patanjali, Unilever, ITC और Nestle जैसे दिग्गज ब्रांडों को भी चिन्हित किया गया है। इन कंपनियों की अपनी 'डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर' (D2C) वेबसाइटों पर भी उत्पादों के विवरण में यह जानकारी गायब पाई गई। उदाहरण के लिए, पतंजलि की वेबसाइट पर कुछ उत्पादों के लिए लिखा था कि उन्हें निर्माण के 4 महीने के भीतर उपयोग करें, लेकिन निर्माण की तारीख ही नहीं दी गई थी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत में 'लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम, 2011' के तहत ई-कॉमर्स संस्थाओं के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य घोषणाएं दिखाना जरूरी है। इसमें एक्सपायरी डेट भी शामिल है। हालांकि, डिजिटल कॉमर्स के विस्तार के साथ इन नियमों को लागू करने में अंतराल देखा गया है।

श्रेणीउपयोगकर्ता अनुभव (सर्वेक्षण के अनुसार)
सभी साइटों पर डेट मिली27%
अधिकांश साइटों पर डेट मिली14%
किसी भी साइट पर डेट नहीं मिली33%
अधिकांश साइटों पर डेट नहीं मिली39%
Did You Know?: FSSAI के नियमों के अनुसार, ऑनलाइन बेचे जाने वाले खाद्य उत्पादों में कम से कम 30% या 45 दिनों की शेल्फ लाइफ बची होनी चाहिए।

Frequently Asked Questions

1. क्या ब्रांडों के लिए एक्सपायरी डेट दिखाना कानूनी रूप से अनिवार्य है?
हाँ, लीगल मेट्रोलॉजी नियमों के तहत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के लिए यह जानकारी देना अनिवार्य है।

2. FSSAI इस मामले में क्या कदम उठा रहा है?
FSSAI ने घोषणा की है कि वह अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 'बेस्ट-बिफोर' तारीखों के प्रदर्शन को सख्ती से लागू करेगा।