पशुपालन क्षेत्र में बढ़ते चारे की लागत और कच्चे माल की कीमतों में उछाल के कारण अंडे, चिकन और दूध के दाम जल्द कम होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। मक्का और सोयाबीन की बढ़ती कीमतों ने किसानों के मुनाफे को कम कर दिया है।
- पशु आहार (Feed) की लागत में भारी वृद्धि हुई है, जो उत्पादन लागत का 65-70% हिस्सा है।
- मक्का और सोयाबीन मील जैसी प्रमुख सामग्रियों की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है।
- एल् नीनो के कारण मौसम में बदलाव और पक्षियों की मृत्यु दर ने आपूर्ति को प्रभावित किया है।
भारत में पशुपालन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। 2013-14 में जहां पशुपालन का मूल्य फसलों के मूल्य का 34% था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 57% तक पहुंच गया है। हालांकि, इस प्रगति के बीच एक बड़ी चुनौती सामने आई है: पशु आहार (Livestock Feed) की आसमान छूती कीमतें।
चारे की बढ़ती लागत का गणित
मुर्गियों और पशुओं को ऊर्जा के लिए कार्बोहाइड्रेट की आवश्यकता होती है, जिसका मुख्य स्रोत मक्का (Maize) है। ब्रॉयलर चिकन आहार में 55-65% मक्का होता है। इसके अलावा, प्रोटीन के लिए सोयाबीन मील और अन्य तेलहन की आवश्यकता होती है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, मक्का और सोयाबीन मील की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जब तक कच्चे माल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक अंतिम उपभोक्ता के लिए खाद्य कीमतों में कमी आना मुश्किल है। चारे की लागत में वृद्धि सीधे तौर पर डेयरी और पोल्ट्री किसानों के मुनाफे को कम कर रही है, जिससे वे कीमतें बढ़ाने पर मजबूर हैं।
सोयाबीन मील की कीमतें कम हो रही हैं, लेकिन मक्का की कीमतें बढ़ रही हैं; यह स्थिति एक 'पिंग-पोंग गेम' की तरह है जो अनिश्चितता पैदा करती है।
अंडों की बात करें तो, दिल्ली में खुदरा कीमतें प्रति अंडा 7-9 रुपये तक पहुंच गई हैं। NECC के अनुसार, इस साल अंडों की औसत कीमतें पिछले साल की तुलना में लगभग 38.7% अधिक रही हैं। इसका एक मुख्य कारण गर्मी के बढ़ते प्रकोप और मक्का-सोयाबीन की बढ़ती लागत है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में पशुपालन का महत्व दशकों से बढ़ रहा है। पारंपरिक रूप से कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में फसलों का दबदबा था, लेकिन पिछले एक दशक में दूध और मांस उत्पादन ने सकल मूल्य वर्धित (GVA) में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिससे यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गया है।
| सामग्री (Ingredient) | अगस्त 2025 औसत मूल्य | अगस्त 2026 औसत मूल्य |
|---|---|---|
| मक्का (प्रति क्विंटल) | ₹2,537 | ₹2,759 |
| सोयाबीन मील (प्रति टन) | ₹38,186 | ₹58,156 |
Frequently Asked Questions
1. अंडे की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
मुख्य कारण मक्का और सोयाबीन जैसे चारे की बढ़ती कीमतें और मौसम के कारण पक्षियों की मृत्यु दर में वृद्धि है।
2. क्या भविष्य में कीमतें कम होंगी?
जब तक सोयाबीन और मक्का की आपूर्ति और कीमतें स्थिर नहीं होतीं, कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है।