अडानी एंटरप्राइजेज केंद्र सरकार की 37,500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण प्रोत्साहन योजना के पहले दौर में सबसे प्रमुख आवेदक बनकर उभरा है। कंपनी ने यूरिया उत्पादन के लिए तीन बड़े प्रोजेक्ट्स का प्रस्ताव दिया है।

  • अडानी एंटरप्राइजेज ने पहले दौर में 7 में से 3 प्रोजेक्ट्स के लिए आवेदन किया है।
  • योजना का कुल बजट 37,500 करोड़ रुपये है, जिसका लक्ष्य 25 प्रोजेक्ट्स को प्रोत्साहित करना है।
  • मुख्य उद्देश्य एलएनजी, यूरिया और मेथनॉल के आयात पर निर्भरता कम करना है।

भारत सरकार के कोयला मंत्रालय ने अपनी महत्वाकांक्षी 37,500 करोड़ रुपये की सतह कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण योजना के पहले दौर के आवेदन प्राप्त कर लिए हैं। इस प्रक्रिया में अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड सबसे प्रमुख खिलाड़ी के रूप में सामने आया है, जिसने कुल सात आवेदनों में से तीन प्रोजेक्ट्स पेश किए हैं।

मंत्रालय के अनुसार, अडानी समूह के तीनों प्रस्ताव 'कोयला-से-यूरिया' (Coal-to-Urea) गैसीकरण संयंत्र स्थापित करने के लिए हैं। इनके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी NTPC लिमिटेड और तालचेर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (GAIL, CIL, RCF और FCIL का संयुक्त उद्यम) ने भी एक-एक प्रोजेक्ट के लिए आवेदन किया है। निजी क्षेत्र से गैलेंट इस्पात लिमिटेड और श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड ने भी अपनी रुचि दिखाई है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वैश्विक स्तर पर, विशेष रूप से पश्चिम एशिया के संकट के कारण, ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाएं अस्थिर रही हैं। भारत के पास दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कोयला भंडार (लगभग 389 बिलियन टन) है, लेकिन प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल के लिए वह आयात पर निर्भर है। कोयला गैसीकरण के माध्यम से, भारत अपने घरेलू कोयले को सिंथेटिक नेचुरल गैस (SNG) और उर्वरकों में बदलकर विदेशी मुद्रा की बचत कर सकता है।

"कोयला गैसीकरण न केवल आयात निर्भरता को कम करेगा, बल्कि भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक आत्मनिर्भर शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।"

सरकार ने इस योजना के तहत वित्तीय प्रोत्साहन की एक सख्त संरचना तैयार की है। किसी भी एकल प्रोजेक्ट के लिए अधिकतम 5,000 करोड़ रुपये और किसी एक समूह (Entity Group) के लिए कुल 12,000 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी। यह प्रोत्साहन संयंत्र और मशीनरी की लागत के अधिकतम 20% तक होगा, जिसे चार समान किस्तों में वितरित किया जाएगा।

ऐतिहासिक रूप से, भारत ने 2024 में 8,500 करोड़ रुपये की एक व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding) योजना शुरू की थी, जिसके तहत पहले ही आठ प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। नई योजना उसी विजन का विस्तार है, जिसका लक्ष्य लगभग 75 मिलियन टन कोयले का गैसीकरण करना है।

आवेदक कंपनी प्रस्तावित उत्पाद प्रोजेक्ट संख्या
अडानी एंटरप्राइजेज कोयला-से-यूरिया 3
NTPC / श्याम सेल SNG / Syngas 1-1
तालचेर फर्टिलाइजर्स कोयला-से-यूरिया 1
गैलेंट इस्पात DRI और Syngas 1
क्या आप जानते हैं?: कोयला गैसीकरण एक थर्मोकेमिकल प्रक्रिया है जो कोयले को 'सिनगैस' (Syngas) में बदल देती है, जिसका उपयोग बिजली, मेथनॉल और उर्वरक बनाने में किया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. कोयला गैसीकरण का मुख्य लाभ क्या है?
इसका मुख्य लाभ प्राकृतिक गैस और उर्वरकों के आयात में कमी लाना और घरेलू कोयला संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना है।

2. इस योजना में वित्तीय सहायता कैसे दी जाएगी?
सरकार संयंत्र की लागत का अधिकतम 20% प्रोत्साहन के रूप में देगी, जिसकी अधिकतम सीमा एक समूह के लिए 12,000 करोड़ रुपये है।