कर्नाटक अपनी अक्षय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने के लिए पावागडा सोलर पार्क में 10,000 एकड़ अतिरिक्त भूमि जोड़ने जा रहा है। यह कदम राज्य को भारत के हरित ऊर्जा संक्रमण में अग्रणी बनाए रखेगा।

  • कर्नाटक पावागडा सोलर पार्क के लिए 10,000 अतिरिक्त एकड़ भूमि प्राप्त करने के अंतिम चरण में है।
  • राज्य की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता लगभग 27.3 GW है, जिसमें 11.5 GW सौर और 8.5 GW पवन ऊर्जा शामिल है।
  • भूमि की कमी को दूर करने के लिए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) का उपयोग किया जाएगा।
  • सूखे की स्थिति में बिजली की कमी को रोकने के लिए अंतर-राज्यीय बिजली विनिमय समझौतों का सहारा लिया गया है।

भारत के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ऊर्जा और पर्यटन मंत्री के.जे. जॉर्ज ने घोषणा की कि कर्नाटक सरकार 10,000 एकड़ अतिरिक्त भूमि प्राप्त करने के अंतिम चरण में है। यह विस्तार तुमकुरु जिले में स्थित पावागडा सोलर पार्क के लिए किया जा रहा है, जो दुनिया के सबसे बड़े सौर संयंत्रों में से एक है।

बेंगलुरु में आयोजित 'भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो (BRESE) 2026' रोड शो को संबोधित करते हुए, मंत्री जॉर्ज ने कहा कि कर्नाटक पहले से ही अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक पावरहाउस बन चुका है। राज्य की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता लगभग 27.3 GW है, जिसमें 11.5 GW सौर ऊर्जा और 8.5 GW पवन ऊर्जा शामिल है, जो टिकाऊ बिजली उत्पादन के प्रति राज्य के विविध दृष्टिकोण को दर्शाता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कर्नाटक की रणनीति केवल क्षमता बढ़ाने के बजाय तकनीकी अनुकूलन (Optimization) की ओर बढ़ रही है। राजस्थान या मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विपरीत, कर्नाटक जैसे कृषि प्रधान राज्य में बंजर भूमि की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को अपनाकर, राज्य भूमि की खपत को कम करते हुए अधिक ऊर्जा उत्पादन करने का प्रयास कर रहा है।

अक्षय ऊर्जा की ओर संक्रमण अब केवल एक पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं है, बल्कि औद्योगिक नवाचार और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा का आधार बन गया है।

बुनियादी ढांचे के अलावा, मंत्री ने बिजली की स्थिरता के मुद्दे पर भी बात की। सूखे की स्थिति के कारण जलविद्युत संसाधनों पर पड़ने वाले दबाव के बावजूद, सरकार ने एक रणनीतिक बिजली विनिमय तंत्र लागू किया है। कर्नाटक ने उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के साथ बिजली विनिमय व्यवस्था की है।

यह घोषणा नवंबर 2 से 5, 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले BRESE 2026 शिखर सम्मेलन के संदर्भ में की गई है। यह वैश्विक मंच 75 से अधिक देशों के प्रतिभागियों को आकर्षित करेगा, जो ऊर्जा संक्रमण के वैश्विक पैमाने को रेखांकित करता है जिसमें कर्नाटक एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

क्या आप जानते हैं?: पावागडा सोलर पार्क को एक अद्वितीय 'प्लग-एंड-प्ले' मॉडल का उपयोग करके विकसित किया गया था, जहाँ सरकार ने भूमि और बुनियादी ढांचा प्रदान किया और निजी डेवलपर्स ने पैनल लगाए।
ऊर्जा स्रोतवर्तमान क्षमता (लगभग)रणनीतिक फोकस
सौर ऊर्जा11.5 GWभूमि विस्तार और BESS
पवन ऊर्जा8.5 GWक्षमता रखरखाव
कुल अक्षय ऊर्जा27.3 GWअंतर-राज्यीय ग्रिड स्थिरता

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: कर्नाटक BESS तकनीक पर क्यों ध्यान केंद्रित कर रहा है?
उत्तर 1: कृषि प्रधान राज्य होने के कारण बंजर भूमि की कमी है, इसलिए BESS तकनीक कम भूमि में अधिक ऊर्जा भंडारण और वितरण की अनुमति देती है।

प्रश्न 2: सूखा पड़ने पर राज्य बिजली की कमी को कैसे प्रबंधित कर रहा है?
उत्तर 2: राज्य पंजाब और हरियाणा जैसे उत्तरी राज्यों के साथ बिजली विनिमय समझौतों का उपयोग करता है ताकि कमी के समय बिजली आयात की जा सके।