भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक जलमार्गों के माध्यम से माल ढुलाई के हिस्से को 2% से बढ़ाकर 5% करना है। पीएम गति शक्ति और जलवाहक जैसी योजनाएं इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

  • 2030 तक जलमार्गों के माध्यम से माल ढुलाई का लक्ष्य 5% तक पहुंचाना।
  • पीएम गति शक्ति और जलवाहक योजनाएं इस बदलाव की रीढ़ हैं।
  • बल्क कार्गो के बाद अब उपभोक्ता लॉजिस्टिक्स पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। वर्तमान में, भारत का माल ढुलाई नेटवर्क मुख्य रूप से सड़क और रेल पर निर्भर है, लेकिन केंद्र सरकार अब जलमार्गों (Waterways) की क्षमता का उपयोग करने के लिए तैयार है। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य 2030 तक जलमार्गों के माध्यम से होने वाली कुल माल ढुलाई के हिस्से को वर्तमान के लगभग 2% से बढ़ाकर 5% तक ले जाना है।

इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, सरकार दो प्रमुख स्तंभों पर ध्यान केंद्रित कर रही है: पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) और जलवाहक (Jalvahak) योजनाएं। पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान है जो विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बीच समन्वय को बढ़ावा देता है, जबकि जलवाहक योजना जलमार्गों के विकास और उनके सुव्यवस्थित उपयोग पर केंद्रित है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान में भारत में लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का एक बड़ा हिस्सा है। यदि जलमार्गों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाता है, तो यह न केवल परिवहन लागत को कम करेगा बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कटौती करेगा, जो भारत के जलवायु लक्ष्यों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

जलमार्गों का विकास केवल माल ढुलाई के बारे में नहीं है, बल्कि यह भारत की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को अधिक लचीला और टिकाऊ बनाने के बारे में है।

वर्तमान में, जलमार्गों का उपयोग मुख्य रूप से बल्क कार्गो (जैसे कोयला, अनाज और लौह अयस्क) के लिए किया जाता है। हालांकि, भविष्य की रणनीति का अगला बड़ा चरण उपभोक्ता लॉजिस्टिक्स (Consumer Logistics) है। इसका मतलब है कि ई-कॉमर्स और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं को भी नदियों और नहरों के माध्यम से कुशलतापूर्वक स्थानांतरित करने की योजना है, जो 'लास्ट-माइल डिलीवरी' की चुनौतियों को हल कर सकता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ऐतिहासिक रूप से, भारत में नदियों का उपयोग व्यापार के लिए किया जाता रहा है, लेकिन औद्योगिकीकरण के दौरान सड़क और रेल नेटवर्क के उदय के साथ जलमार्गों की उपेक्षा की गई। आधुनिक युग में, राष्ट्रीय जलमार्गों (NW) का विकास भारत की समुद्री और नदी कनेक्टिविटी को पुनर्जीवित करने का एक प्रयास है।

Did You Know?: भारत में गंगा नदी दुनिया के सबसे व्यस्त जलमार्गों में से एक बनने की क्षमता रखती है यदि इसके सभी राष्ट्रीय जलमार्गों को पूरी तरह से विकसित कर दिया जाए।

Frequently Asked Questions

1. सरकार का 2030 तक का क्या लक्ष्य है?
सरकार का लक्ष्य जलमार्गों के माध्यम से माल ढुलाई के हिस्से को 2% से बढ़ाकर 5% करना है।

2. पीएम गति शक्ति क्या है?
यह एक मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी योजना है जो बुनियादी ढांचे के विकास के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करती है।