वरिष्ठ अर्थशास्त्री एम.ए. ओम्मन और परिवहन मंत्री सी.पी. जॉन ने केरल की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कर आधार के विस्तार और जीएसटी संग्रह में सुधार की पुरजोर वकालत की है।

  • केरल को अपनी आर्थिक क्षमता का लाभ उठाने के लिए मूल्य वर्धित कराधान (VAT) के माध्यम से कर आधार बढ़ाने की जरूरत है।
  • राज्य में प्रति माह 14 लाख से अधिक ट्रक माल लाते हैं, जो राजस्व वृद्धि का एक बड़ा अवसर है।
  • परिवहन मंत्री सी.पी. जॉन ने टैक्स चोरी रोकने के लिए निगरानी प्रणालियों को मजबूत करने पर जोर दिया।
  • जीएसटी प्रणाली की जटिलताओं और आईजीएसटी (IGST) हस्तांतरण में देरी ने राज्य के वित्त को प्रभावित किया है।

तिरुवनंतपुरम में गुलाटी इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंस एंड टैक्सेशन (GIFT) द्वारा आयोजित 'भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) में दूसरी पीढ़ी के सुधार' पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान, वरिष्ठ अर्थशास्त्री एम.ए. ओम्मन ने केरल की वित्तीय स्थिति पर गहरा विश्लेषण प्रस्तुत किया। प्रोफेसर ओम्मन ने तर्क दिया कि राज्य की वास्तविक आर्थिक क्षमता और वर्तमान कर संग्रह के बीच एक बड़ा अंतर है, जिसे पाटने के लिए कर आधार का विस्तार अनिवार्य है।

उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि केरल एक उपभोग-प्रधान अर्थव्यवस्था है, जहाँ हर महीने 14 लाख से अधिक ट्रक माल की आपूर्ति करते हैं। इसके अलावा, उन्होंने प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन (Remittances) की विशालता की ओर इशारा किया। केरल माइग्रेशन सर्वे के अनुसार, 2023 में राज्य में ₹2.17 ट्रिलियन का प्रेषण आया, जो 2023-24 में राज्य सरकार के कुल व्यय ₹1.59 ट्रिलियन से कहीं अधिक है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that Kerala's reliance on remittances creates a unique fiscal paradox; while consumption is high, the formal tax capture remains suboptimal. By expanding the tax base, the state can reduce its dependence on central transfers and fund its extensive social welfare schemes independently.

"केरल की आर्थिक क्षमता को उसके कर ढांचे के साथ मेल खाना चाहिए ताकि राज्य अपनी विकास प्राथमिकताओं को स्वयं वित्तपोषित कर सके।"

सम्मेलन में केरल राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष के.एम. चंद्रशेखर ने जीएसटी के कार्यान्वयन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हालांकि जीएसटी एक गंतव्य-आधारित कर है जिससे केरल को लाभ होना चाहिए था, लेकिन तकनीकी बुनियादी ढांचे की कमी और केंद्र-राज्य विवादों के समाधान के लिए संतोषजनक तंत्र के अभाव ने इस प्रक्रिया को जटिल बना दिया है।

परिवहन मंत्री सी.पी. जॉन ने टैक्स चोरी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चेक-पोस्ट हटने से माल की आवाजाही तो आसान हुई है, लेकिन इससे निगरानी में चुनौतियां पैदा हो गई हैं। उन्होंने वाहन-बेड़े और माल-निगरानी प्रणालियों के बेहतर उपयोग का आह्वान किया ताकि राजस्व रिसाव को रोका जा सके।

कारक (Factor) वर्तमान स्थिति (Current Status) प्रस्तावित सुधार (Proposed Reform)
कर आधार (Tax Base) सीमित/पारंपरिक मूल्य वर्धित कराधान का विस्तार
निगरानी (Monitoring) चेक-पोस्ट का अभाव डिजिटल वाहन-बेड़ा ट्रैकिंग
राजस्व स्रोत केंद्रीय हस्तांतरण पर निर्भर उपभोग-आधारित कर वृद्धि
क्या आप जानते हैं?: केरल में प्रवासियों द्वारा भेजा गया धन (Remittance) राज्य के वार्षिक सरकारी बजट से भी अधिक होता है, जो इसे भारत के सबसे अनोखे वित्तीय मॉडल में से एक बनाता है।

Frequently Asked Questions

1. एम.ए. ओम्मन ने केरल के लिए क्या सुझाव दिया?
उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य को मूल्य वर्धित कराधान के माध्यम से अपना कर आधार बढ़ाना चाहिए और अगले पांच वर्षों के लिए एक विस्तृत दृष्टिकोण पत्र (Approach Paper) तैयार करना चाहिए।

2. जीएसटी संग्रह में मुख्य चुनौतियां क्या हैं?
तकनीकी बुनियादी ढांचे की कमी, आईजीएसटी के हस्तांतरण में देरी और विवाद समाधान तंत्र का अभाव मुख्य चुनौतियां हैं।