यूके सरकार अब ऐसे नए कानून लाने की योजना बना रही है जिससे टेक कंपनियों पर भारी जुर्माना लगेगा और उनके अधिकारियों को आपराधिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकेगा।
- यूके सरकार टेक अधिकारियों पर जुर्माना और आपराधिक जवाबदेही तय करने वाला कानून लाएगी।
- एप्पल और गूगल बच्चों की अश्लीलता रोकने वाले फीचर्स लागू करने की समय सीमा में विफल रहे।
- इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे ऐप्स पर भी इसी तरह के सख्त नियम लागू हो सकते हैं।
- गोपनीयता कार्यकर्ताओं ने इसे 'अदृश्य निगरानी बुनियादी ढांचे' की चेतावनी दी है।
बच्चों के यौन शोषण सामग्री (CSAM) के प्रसार को रोकने के लिए एक निर्णायक कदम उठाते हुए, यूनाइटेड किंगडम की सरकार ने अपने कानूनी ढांचे में बदलाव करने की घोषणा की है। यह कदम एप्पल (Apple) और गूगल (Google) द्वारा एक महत्वपूर्ण समय सीमा को पूरा करने में विफल रहने के बाद उठाया गया है। जून में, तत्कालीन प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि टेक फर्मों के पास तीन महीने का समय है ताकि वे अपने उपकरणों पर बाल अश्लीलता की तस्वीरों को लेना, देखना या साझा करना असंभव बना सकें। मंगलवार को यह समय सीमा समाप्त हो गई, लेकिन सरकार के अनुसार, कंपनियां इसमें विफल रहीं।
डिजिटल, संस्कृति, मीडिया और खेल राज्य मंत्री लिसा नंदी ने सांसदों को बताया कि हालांकि दोनों कंपनियों के इंजीनियर सरकार के साथ काम कर रहे थे, लेकिन उनके प्रयास "इस संकट के पैमाने के अनुरूप नहीं हैं।" इसके परिणामस्वरूप, यूके सरकार एक ऐसा कानून लाने जा रही है जो दुनिया में अपनी तरह का पहला कानून होगा। इस योजना के तहत, जो कंपनियां यूके में बिकने वाले स्मार्टफ़ोन और टैबलेट में बाल सुरक्षा समाधान एकीकृत करने में विफल रहेंगी, उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और उनके मालिकों/अधिकारियों पर आपराधिक मामला चलाया जा सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह संप्रभु देशों और बिग टेक के बीच संबंधों में एक मौलिक बदलाव है। वर्षों से, टेक कंपनियां 'सेफ हार्बर' सिद्धांतों या स्वैच्छिक दिशा-निर्देशों के तहत काम करती रही हैं। अधिकारियों के लिए अपराधिक जवाबदेही पेश करके, यूके इस विफलता को केवल एक तकनीकी कमी नहीं, बल्कि नाबालिगों की सुरक्षा में एक कानूनी विफलता मान रहा है। यदि अन्य देश भी इस रास्ते पर चलते हैं, तो यह वैश्विक स्तर पर ऑपरेटिंग सिस्टम के डिजाइन को बदलने के लिए मजबूर कर सकता है।
"बहुत लंबे समय से, प्रौद्योगिकी कंपनियां बच्चों को सबसे गंभीर नुकसान से बचाने में विफल रही हैं, और मैं उन्हें इस बात का लाभ देने के लिए तैयार नहीं हूं कि प्रगति उस गति से जारी रहेगी जिसकी हमें आवश्यकता है।" - लिसा नंदी
सरकार की महत्वाकांक्षाएं केवल हार्डवेयर तक सीमित नहीं हैं। नंदी ने संकेत दिया है कि इसी तरह की कानूनी आवश्यकताएं इंस्टाग्राम (Instagram) और स्नैपचैट (Snapchat) जैसे ऐप्स पर भी लागू की जा सकती हैं। हालांकि मेटा और स्नैप ने अभी तक इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन दबाव बढ़ता जा रहा है।
हालांकि, इस प्रस्ताव ने डिजिटल गोपनीयता पर एक तीव्र बहस छेड़ दी है। मैसेजिंग ऐप सिग्नल (Signal) ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे "अदृश्य निगरानी बुनियादी ढांचे" को कानून में बदलने की कोशिश बताया है। गोपनीयता समर्थकों का तर्क है कि बच्चों की सुरक्षा के नाम पर सामग्री की स्कैनिंग और आयु सत्यापन करना, भविष्य में सभी नागरिकों की व्यापक सरकारी निगरानी का रास्ता खोल सकता है।
दूसरी ओर, एप्पल ने अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए 2021 में लॉन्च किए गए अपने 'कम्युनिकेशन सेफ्टी' फीचर का हवाला दिया है, जो बच्चों के डिवाइस पर अश्लीलता का पता चलने पर तस्वीरों को धुंधला (blur) कर देता है। गूगल ने भी गोपनीयता और सूचना तक पहुंच की रक्षा करते हुए बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए विशेषज्ञों और कानून निर्माताओं के साथ काम करने की बात कही है।
उद्योग प्रतिक्रियाओं की तुलना
| संस्था | रुख/प्रतिक्रिया | मुख्य चिंता |
|---|---|---|
| यूके सरकार | अनिवार्य कानून | बाल सुरक्षा और तत्परता |
| एप्पल/गूगल | सहयोगात्मक/स्वैच्छिक | गोपनीयता और तकनीकी व्यवहार्यता |
| सिग्नल | कड़ा विरोध | सामूहिक निगरानी और प्राइवेसी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या इससे यूके में वयस्क उपयोगकर्ताओं पर असर पड़ेगा?
सरकार के अनुसार, ये उपाय उन वयस्कों को प्रभावित नहीं करेंगे जिन्होंने अपनी आयु का सफलतापूर्वक सत्यापन कर लिया है।
प्रश्न 2: टेक कंपनियों के लिए संभावित दंड क्या हैं?
कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और उनके शीर्ष अधिकारियों को आपराधिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।