वित्त मंत्रालय के निर्णय के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के स्केल IV से VIII अधिकारियों के लिए परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) पर रोक लगा दी गई है। बैंक संगठनों ने इसे सामूहिक एकता की जीत बताया है।

  • वित्त मंत्रालय (DFS) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कार्यकारी PLI भुगतान को स्थगित कर दिया है।
  • यह निर्णय बैंक कर्मचारियों के व्यापक विरोध और प्रतिनिधित्व के बाद लिया गया है।
  • PLI मामले को अब 13वें द्विपक्षीय समझौते (Bi-partite Settlement) के दौरान सुलझाया जाएगा।
  • AIBOC ने इसे बैंकिंग समुदाय की सामूहिक शक्ति की जीत बताया है।

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) के स्केल IV से VIII ग्रेड के अधिकारियों के लिए परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के भुगतान को फिलहाल स्थगित कर दिया है। यह निर्णय वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए लागू होगा और बैंक कर्मचारियों द्वारा किए गए निरंतर विरोध प्रदर्शनों के बाद आया है।

सोमवार को जारी एक आधिकारिक संचार में, DFS ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अध्यक्ष और सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों के प्रबंध निदेशकों (MDs) एवं सीईओ को सूचित किया कि इस मुद्दे को अब चल रही 13वीं द्विपक्षीय समझौता (13th Bi-partite Settlement) और 10वें संयुक्त नोट चर्चाओं के दौरान उठाया जाएगा। गौरतलब है कि वरिष्ठ अधिकारियों के लिए इस PLI योजना को मूल रूप से 19 नवंबर, 2024 को अधिसूचित किया गया था।

क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्णय?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय बैंकिंग क्षेत्र में श्रम शक्ति और सरकार के बीच चल रहे शक्ति संतुलन को दर्शाता है। सरकारी बैंकों में अधिकारियों के वेतन ढांचे और प्रोत्साहन योजनाओं पर होने वाले निर्णय सीधे तौर पर बैंकिंग परिचालन की स्थिरता और कर्मचारी मनोबल को प्रभावित करते हैं।

यह निर्णय बैंकिंग समुदाय की एकजुटता का प्रमाण है, जिसने सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया।

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (AIBOC) के महासचिव रूपम रॉय ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार बैंकिंग समुदाय के निरंतर प्रतिरोध के सामने झुक गई है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) द्वारा किए गए सामूहिक विरोध और हड़ताल की चेतावनी को दिया।

ऐतिहासिक संदर्भ और आगामी चुनौतियां

बैंकिंग क्षेत्र में वेतन संशोधन और प्रोत्साहन योजनाएं हमेशा से विवाद का विषय रही हैं। हालांकि PLI पर रोक लग गई है, लेकिन बैंक यूनियनों की एक अन्य प्रमुख मांग—पांच दिवसीय कार्य सप्ताह (Five-Day Work Week)—अभी भी अधर में लटकी हुई है। यूनियनों का तर्क है कि इस पर समझौता काफी पहले हो चुका था, लेकिन कार्यान्वयन में देरी की जा रही है।

आगामी दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी क्योंकि मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के समक्ष एक सुलह बैठक निर्धारित की गई है, जहाँ UFBU अपनी भविष्य की रणनीति तय करेगा।

क्या आप जानते हैं?: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में द्विपक्षीय समझौते (Bi-partite Settlements) वेतन, भत्ते और कार्य स्थितियों को निर्धारित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण तंत्र होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या PLI योजना पूरी तरह से रद्द कर दी गई है?
नहीं, इसे केवल स्थगित (in abeyance) किया गया है और इसे आगामी द्विपक्षीय समझौता चर्चाओं में शामिल किया जाएगा।

2. यह निर्णय किन अधिकारियों को प्रभावित करता है?
यह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के स्केल IV से VIII ग्रेड के कार्यकारी अधिकारियों को प्रभावित करता है।