केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने पुष्टि की है कि भारत के पास वर्तमान बिजली मांग को 51 दिनों तक पूरा करने के लिए पर्याप्त कोयला भंडार है, जिससे मानसून के कारण उत्पादन में आई अस्थायी कमी की चिंताओं को दूर किया गया है।

  • भारत के पास वर्तमान में 123.7 मिलियन टन कोयला भंडार उपलब्ध है।
  • मौजूदा खपत दर (2.4 MT प्रतिदिन) के आधार पर यह स्टॉक 51 दिनों तक चलेगा।
  • मानसून के कारण उत्पादन में अस्थायी गिरावट के बावजूद स्थिति नियंत्रण में है।

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने हाल ही में मीडिया से बातचीत करते हुए देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के पास घरेलू बिजली की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त कोयला भंडार है, जो लगभग 51 दिनों तक चल सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मानसून की बारिश के कारण कोयला क्षेत्रों में उत्पादन में अस्थायी रूप से गिरावट देखी गई थी।

मंत्री ने विस्तृत आंकड़े साझा करते हुए बताया कि देश में वर्तमान में कुल 123.7 मिलियन टन (MT) कोयला उपलब्ध है, जिसमें थर्मल पावर प्लांटों के पास मौजूद 23.7 मिलियन टन का भंडार भी शामिल है। बिजली क्षेत्र में कोयले की वर्तमान खपत दर लगभग 2.4 मिलियन टन प्रतिदिन बनी हुई है। इस आधार पर, सरकार ने आश्वस्त किया है कि ऊर्जा आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आएगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बिजली उत्पादन के लिए कोयले की उपलब्धता सीधे तौर पर औद्योगिक स्थिरता और घरेलू उपभोक्ताओं की राहत से जुड़ी है। हाल ही में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने रिपोर्ट दी थी कि देश के 53 थर्मल पावर प्लांटों के पास उनकी कुल आवश्यकता का केवल 25% या उससे कम कोयला उपलब्ध था। ऐसे में मंत्री का यह आश्वासन बाजार और निवेशकों के बीच विश्वास बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

मानसून के कारण उत्पादन में आई मामूली कमी को नियमित निगरानी और अंतर-मंत्रालयी समन्वय के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा रहा है।

जी. किशन रेड्डी ने आगे कहा कि कोयला उत्पादक क्षेत्रों में मानसून के कारण उत्पादन लगभग दस दिनों तक बाधित रहा था, लेकिन पिछले कुछ दिनों में बारिश कम होने से उत्पादन में फिर से तेजी आई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोयला मंत्रालय, बिजली मंत्रालय और रेल मंत्रालय लगातार समन्वय कर रहे हैं ताकि कोयले की ढुलाई और स्टॉक की पर्याप्तता सुनिश्चित की जा सके।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी कोयले पर निर्भर है। पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने कोयला उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया है। हालांकि, मानसून का मौसम हर साल एक चुनौती पेश करता है क्योंकि खुले खदानों में जलभराव के कारण उत्पादन की गति धीमी हो जाती है।

Did You Know?: भारत दुनिया के सबसे बड़े कोयला उत्पादकों में से एक है और देश की कुल बिजली का अधिकांश हिस्सा कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांटों से आता है।

Frequently Asked Questions

1. वर्तमान में भारत के पास कितना कोयला भंडार है?
भारत के पास कुल 123.7 मिलियन टन कोयला भंडार है, जिसमें थर्मल पावर प्लांटों का हिस्सा 23.7 मिलियन टन है।

2. मानसून का कोयला उत्पादन पर क्या प्रभाव पड़ा है?
मानसून के कारण कोयला क्षेत्रों में उत्पादन लगभग दस दिनों के लिए प्रभावित हुआ था, लेकिन अब स्थिति सामान्य हो रही है।