तेल से लेकर टेलीकॉम तक फैले साम्राज्य वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ₹125 बिलियन ($1.32 बिलियन) जुटाने के लिए भारतीय रुपया बॉन्ड बाजार में लौट रही है। यह कदम स्थानीय यील्ड में गिरावट का लाभ उठाने के लिए उठाया गया है।
- रिलायंस इंडस्ट्रीज पांच साल के नोट्स के माध्यम से ₹125 बिलियन ($1.32 बिलियन) जुटाने की योजना बना रही है।
- इन बॉन्ड्स पर 7.47% का वार्षिक कूपन रेट होगा।
- नवंबर 2023 के बाद किसी रेटेड फर्म द्वारा यह सबसे बड़ा सिंगल-ट्रेंच फंड जुटाने का प्रयास है।
- डॉलर ऋण की तुलना में स्थानीय यील्ड में गिरावट ने घरेलू फंडिंग को सस्ता बना दिया है।
अरबपति मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) लगभग तीन साल बाद भारत के रुपया बॉन्ड बाजार में वापसी करने के लिए तैयार है। पांच मर्चेंट बैंकर्स द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, कंपनी पांच साल के नोट्स के जरिए 125 बिलियन रुपये जुटाने की योजना बना रही है।
कंपनी 18 सितंबर को समाप्त होने वाले सप्ताह में निवेशकों से बोलियां आमंत्रित कर सकती है। 7.47% के वार्षिक कूपन रेट के साथ, यह कदम रिलायंस के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह नवंबर 2023 के बाद कंपनी का पहला रुपया बॉन्ड ऑफर होगा, जब उसने ₹200 बिलियन जुटाए थे, जो उस समय किसी गैर-वित्तीय भारतीय कंपनी द्वारा सबसे बड़ी स्थानीय मुद्रा ऋण बिक्री थी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच पूंजी लागत को कम करने की एक सोची-समझी रणनीति है। स्थानीय स्तर पर पांच साल के बॉन्ड्स की यील्ड में भारी गिरावट आई है, जिससे डॉलर ऋण की तुलना में घरेलू फंडिंग काफी सस्ती हो गई है। जून की शुरुआत से पांच साल के सरकारी बॉन्ड यील्ड में 33 आधार अंकों की गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण केंद्रीय बैंक की योजनाओं के तहत डॉलर का भारी प्रवाह है।
डॉलर ऋण से हटकर रुपया बॉन्ड्स की ओर बढ़ना मुद्रा की अस्थिरता के खिलाफ एक रणनीतिक बचाव है और भारतीय यील्ड कर्व का चतुराई से उपयोग है।
इस सौदे के लिए बड़े निजी बैंक अरेंजर्स के रूप में काम कर रहे हैं और उनके इन बॉन्ड्स को आंशिक रूप से सब्सक्राइब करने की भी उम्मीद है। यह रिलायंस के व्यावसायिक मॉडल और उसकी क्रेडिट रेटिंग पर संस्थागत निवेशकों के गहरे भरोसे को दर्शाता है।
इतना ही नहीं, कंपनी 10 साल के बॉन्ड इश्यू पर भी विचार कर रही है और इसके लिए बैंकर्स और निवेशकों के साथ चर्चा जारी है। यह संकेत देता है कि रिलायंस अपनी दीर्घकालिक विस्तार योजनाओं के लिए पूंजी सुरक्षित करना चाहती है।
| विशेषता | वर्तमान योजना (2026) | पिछली बिक्री (2023) |
|---|---|---|
| राशि | ₹125 बिलियन | ₹200 बिलियन |
| अवधि | 5 वर्ष | विविध |
| मुख्य कारण | कम स्थानीय यील्ड | पूंजी विस्तार |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रिलायंस डॉलर बॉन्ड्स के बजाय रुपया बॉन्ड्स क्यों चुन रहा है?
स्थानीय यील्ड में गिरावट के कारण, अमेरिकी ट्रेजरी दरों की तुलना में अब भारत में रुपये में उधार लेना अधिक किफायती हो गया है।
इस बॉन्ड इश्यू का प्रबंधन कौन कर रहा है?
बड़े निजी बैंक इस सौदे के अरेंजर्स के रूप में कार्य कर रहे हैं और वे खुद भी इसमें निवेश कर सकते हैं।