भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में तमिलनाडु के GSDP में 15.98% की शानदार वृद्धि हुई है। हालांकि, आर्थिक विकास के बावजूद राज्य का कुल कर्ज ₹8.53 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
- 2024-25 में तमिलनाडु के GSDP में 15.98% की वृद्धि हुई, जो पिछले वर्ष 13.34% थी।
- राज्य का कुल कर्ज बढ़कर ₹8.53 लाख करोड़ हो गया है, जबकि ऋण-GSDP अनुपात 27.38% है।
- राजस्व घाटा बढ़कर ₹45,840 करोड़ हो गया, जिससे 15वें वित्त आयोग के लक्ष्य को पूरा करने में विफलता मिली।
- वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे प्रतिबद्ध व्यय राजस्व व्यय का 53.75% हिस्सा हैं।
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा जारी “राज्य वित्त 2024-25” शीर्षक वाली रिपोर्ट मंगलवार को राज्य विधानसभा में पेश की गई। यह रिपोर्ट तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था की एक विरोधाभासी तस्वीर पेश करती है: जहाँ एक ओर आर्थिक विकास की गति तेज है, वहीं दूसरी ओर बढ़ता कर्ज और राजस्व घाटा चिंता का विषय बना हुआ है।
आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में 15.98% की महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई, जो पिछले वर्ष के 13.34% से अधिक है। इसके अलावा, तमिलनाडु राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अपना दबदबा बनाए हुए है, जिसका राष्ट्रीय GDP में योगदान 9.43% रहा और प्रति व्यक्ति आय के मामले में यह राष्ट्रीय औसत से काफी आगे है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि GSDP में उच्च वृद्धि औद्योगिक और वाणिज्यिक जीवंतता का संकेत है, लेकिन राजस्व घाटे में वृद्धि एक संरचनात्मक असंतुलन को दर्शाती है। राज्य का विकास तो हो रहा है, लेकिन खर्चों की गति कमाई से अधिक है, खासकर लोकलुभावन सब्सिडी और निश्चित देनदारियों के कारण।
राज्य की ऋण स्थिति एक गंभीर मुद्दा है। कुल कर्ज बढ़कर ₹8.53 लाख करोड़ हो गया है। हालांकि, 27.38% का ऋण-GSDP अनुपात 15वें वित्त आयोग और तमिलनाडु राजकोषीय जिम्मेदारी अधिनियम द्वारा निर्धारित 28.90% की सीमा के भीतर है, लेकिन यह निरंतर बढ़ रहा है। राजस्व प्राप्तियों का लगभग 21% हिस्सा केवल ब्याज भुगतान में जा रहा है, जिससे विकास कार्यों के लिए बजट कम हो रहा है।
GSDP वृद्धि और राजस्व अधिशेष के बीच बढ़ता अंतर यह दर्शाता है कि आर्थिक विस्तार का लाभ राजकोषीय स्थिरता में नहीं बदल रहा है।
रिपोर्ट में राज्य के व्यय पैटर्न पर भी प्रकाश डाला गया है। वेतन, मजदूरी, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे प्रतिबद्ध व्यय ₹1,76,676 करोड़ तक पहुंच गए हैं, जो कुल राजस्व प्राप्तियों का 62.47% है। यह स्थिति बुनियादी ढांचे या नए सामाजिक कार्यक्रमों पर खर्च करने की राज्य की क्षमता को सीमित करती है।
राजस्व व्यय में वृद्धि का एक मुख्य कारण सब्सिडी में हुई भारी बढ़ोतरी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 39.35% (₹14,854 करोड़) बढ़ गई है। CAG ने इस वृद्धि का मुख्य कारण 'मगलिर उरीमई थोगाई योजना' और किसानों के लिए TNEB के माध्यम से दी गई बिजली सब्सिडी को बताया है।
| मानदंड | 2023-24 | 2024-25 |
|---|---|---|
| GSDP वृद्धि दर | 13.34% | 15.98% |
| राजस्व घाटा | ₹45,121 करोड़ | ₹45,840 करोड़ |
| ऋण-GSDP अनुपात | - | 27.38% |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या तमिलनाडु का कर्ज कानूनी सीमा के भीतर है?
हाँ, 27.38% का ऋण-GSDP अनुपात वर्तमान में 15वें वित्त आयोग और राज्य के राजकोषीय जिम्मेदारी अधिनियम द्वारा निर्धारित 28.90% की सीमा से कम है।
प्रश्न 2: राज्य की सब्सिडी में वृद्धि का मुख्य कारण क्या था?
इस वृद्धि का मुख्य कारण मगलिर उरीमई थोगाई योजना और TNEB के माध्यम से कृषि पंप सेटों पर दी गई सब्सिडी थी।