भारतीय विंड टर्बाइन निर्माता संघ और पीडीए वेंचर्स चेन्नई में 'विंडर्जी इंडिया 2026' की मेजबानी करेंगे, जिसका उद्देश्य 2030 तक 100 GW पवन ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करना है।

  • विंडर्जी इंडिया 2026 का आयोजन 7-9 अक्टूबर को चेन्नई ट्रेड सेंटर में किया जाएगा।
  • भारत का लक्ष्य 2030 तक अपनी पवन ऊर्जा क्षमता को 54 GW से बढ़ाकर 100 GW करना है।
  • पवन ऊर्जा विनिर्माण में घरेलू मूल्यवर्धन (Domestic Value Addition) 70-80% तक पहुंच गया है।

चेन्नई शहर अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण आयोजनों में से एक, विंडर्जी इंडिया 2026 की मेजबानी के लिए तैयार है। 7 से 9 अक्टूबर, 2026 तक चेन्नई ट्रेड सेंटर में आयोजित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले और सम्मेलन का आयोजन इंडियन विंड टर्बाइन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IWTMA) और पीडीए वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। इसे विद्युत मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) का पूर्ण समर्थन प्राप्त है।

इस कार्यक्रम का पैमाना अत्यंत विशाल है, जिसमें 30 से अधिक देशों के 20,000 से अधिक लोगों, 400 प्रतिनिधियों और 350 प्रदर्शकों के शामिल होने की उम्मीद है। यह आयोजन वैश्विक विशेषज्ञता और स्थानीय नवाचार के बीच एक सेतु का काम करेगा, ताकि भारत के हरित ऊर्जा ग्रिड की ओर संक्रमण को तेज किया जा सके।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि हालांकि भारत ने पिछले पांच वर्षों में अपनी क्षमता को लगभग 54 GW तक दोगुना कर लिया है, लेकिन 100 GW तक पहुंचने के लिए केवल इंस्टॉलेशन काफी नहीं है; इसके लिए आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में संरचनात्मक बदलाव की आवश्यकता है। अब ध्यान केवल क्षमता बढ़ाने पर नहीं, बल्कि विनिर्माण गहराई (Manufacturing Depth) पर है। तमिलनाडु—जो ऐतिहासिक रूप से भारत के पवन ऊर्जा अभियान का नेतृत्व कर रहा है—वहां इस आयोजन के माध्यम से उद्योग पूर्ण आत्मनिर्भरता का संकेत दे रहा है।

"2030 तक 100 GW के लक्ष्य की गति को बनाए रखने के लिए, हमें विनिर्माण गहराई और आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन पर समान रूप से ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।" - सरवनन मणिक्कम, IWTMA।

स्वदेशीकरण में सफलता के बावजूद, जहां घरेलू मूल्यवर्धन अब 70% से 80% के बीच है, अभी भी कुछ महत्वपूर्ण कमियां हैं। उद्योग जगत के नेताओं का मानना है कि विकास का अगला चरण उच्च-मूल्य वाले घटकों (High-value components) में महारत हासिल करने पर निर्भर करता है। विशेष रूप से, गियरबॉक्स, विशेष बेयरिंग और स्थायी चुंबक सामग्री का उत्पादन एक ऐसी चुनौती है जिसके लिए लक्षित निवेश और तकनीकी प्रगति की आवश्यकता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत की पवन ऊर्जा यात्रा दशकों पहले शुरू हुई थी, जिसमें तमिलनाडु ने अपने अनुकूल पवन गलियारों के कारण अग्रणी भूमिका निभाई। पिछले पांच वर्षों में, वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में आक्रामक प्रयास किए गए हैं। बड़े और अधिक कुशल टर्बाइनों का उपयोग और हाइब्रिड विंड-सोलर प्रोजेक्ट्स का एकीकरण 54 GW के वर्तमान मील के पत्थर तक पहुंचने के मुख्य कारक रहे हैं।

क्या आप जानते हैं?: तमिलनाडु तटीय भूगोल के कारण स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता के मामले में लगातार भारत के शीर्ष राज्यों में से एक रहा है।
पैमानावर्तमान स्थिति (लगभग)2030 लक्ष्य
स्थापित क्षमता54 GW100 GW
घरेलू मूल्यवर्धन70-80%~100% (लक्ष्य)
वैश्विक भागीदारीउच्चविस्तारित

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: विंडर्जी इंडिया 2026 कहाँ और कब आयोजित किया जाएगा?
यह आयोजन 7 से 9 अक्टूबर, 2026 तक चेन्नई के चेन्नई ट्रेड सेंटर में होगा।

प्रश्न 2: 2030 तक भारतीय पवन ऊर्जा क्षेत्र का प्राथमिक लक्ष्य क्या है?
प्राथमिक लक्ष्य स्थापित क्षमता को 100 GW तक पहुंचाना और उच्च-मूल्य वाले घटकों के लिए घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है।