कर्नाटक सरकार ने एयरोस्पेस, रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए एक महत्वाकांक्षी नीति को मंजूरी दी है। इस कदम से अगले पांच वर्षों में राज्य में भारी निवेश और तकनीकी विकास की उम्मीद है।
- एयरोस्पेस नीति 2026-2031 के तहत ₹60,000 करोड़ के निवेश का लक्ष्य।
- पूंजीगत सब्सिडी को बढ़ाकर जोन 1 में 30% और जोन 3 में 25% किया गया।
- चिक्कबल्लापुर में भारत की पहली ड्रोन-आधारित परीक्षण सुविधा स्थापित होगी।
- टेक्सटाइल नीति में पहली बार रेशम उद्योगों को शामिल किया गया है।
बेंगलुरु स्थित कर्नाटक कैबिनेट ने राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए कर्नाटक एयरोस्पेस नीति 2026-2031 को मंजूरी दे दी है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य एयरोस्पेस, रक्षा, विमानन और अंतरिक्ष अनुसंधान एवं विकास (R&D) के क्षेत्र में कर्नाटक को एक वैश्विक केंद्र बनाना है। सरकार का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में इस क्षेत्र में लगभग ₹60,000 करोड़ का निवेश आएगा।
निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए, सरकार ने निवेश क्षेत्रों को विभिन्न 'ज़ोन' में विभाजित किया है। एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि गैर-फोकस क्षेत्रों में पूंजीगत सब्सिडी, जो पहले केवल 1.75% से 2.25% थी, उसे बढ़ाकर अब 25% कर दिया गया है। जोन 1 के लिए यह सब्सिडी 30% निर्धारित की गई है, जो निवेशकों के लिए एक अत्यंत आकर्षक प्रस्ताव है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह नीति केवल वित्तीय प्रोत्साहन के बारे में नहीं है, बल्कि यह भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश है। एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में इतना बड़ा निवेश बेंगलुरु को न केवल भारत की सिलिकॉन वैली, बल्कि 'स्पेस वैली' के रूप में भी स्थापित करेगा, जिससे उच्च-कुशल रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे।
"सब्सिडी ढांचे में यह भारी वृद्धि कर्नाटक को वैश्विक एयरोस्पेस दिग्गजों के लिए दक्षिण एशिया का सबसे आकर्षक गंतव्य बना देगी।"
एयरोस्पेस के अलावा, कैबिनेट ने टेक्सटाइल और परिधान नीति 2026-2031 को भी मंजूरी दी है। पहली बार रेशम उद्योगों को इसमें शामिल किया गया है, जिससे ₹20,000 करोड़ के निवेश की उम्मीद है। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने बताया कि सरकार वित्तीय सहायता और सब्सिडी पर लगभग ₹4,000 करोड़ खर्च करेगी, जिसमें 33 विशिष्ट तालुकों की पहचान की गई है।
तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए, स्टार्ट-अप नीति 2026-2030 को मंजूरी दी गई है, जो "गवर्नमेंट-फर्स्ट इनिशिएटिव" पर केंद्रित है। इसके तहत सरकार नवाचार-आधारित सार्वजनिक खरीद को बढ़ावा देगी और नई तकनीकों को तेजी से अपनाएगी।
बुनियादी ढांचे के विकास के तहत, चिक्कबल्लापुर में ₹42.83 करोड़ की लागत से भारत की पहली ड्रोन-आधारित परीक्षण सुविधा बनाई जाएगी। इसके साथ ही, ₹35 करोड़ के AI हब की घोषणा की गई है, जो भविष्य के AI विश्वविद्यालय का आधार बनेगा और IIIT-बेंगलुरु में शुरू होगा। इसके अतिरिक्त, ₹16 करोड़ की लागत से बेंगलुरु में एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (International Arbitration Centre) भी स्थापित किया जाएगा।
| क्षेत्र/नीति | अपेक्षित निवेश | प्रमुख आकर्षण |
|---|---|---|
| एयरोस्पेस | ₹60,000 करोड़ | 30% तक पूंजीगत सब्सिडी |
| टेक्सटाइल | ₹20,000 करोड़ | रेशम उद्योग का समावेश |
| AI हब | ₹35 करोड़ | AI विश्वविद्यालय का आधार |
Frequently Asked Questions
1. नई एयरोस्पेस नीति के तहत सब्सिडी में क्या बदलाव हुए हैं?
गैर-फोकस क्षेत्रों में सब्सिडी 1.75%-2.25% से बढ़ाकर 25% कर दी गई है, जबकि जोन 1 में यह 30% है।
2. AI हब का उद्देश्य क्या है?
यह हब सीड सपोर्ट, इनक्यूबेशन और मेंटरशिप प्रदान करेगा और भविष्य के AI विश्वविद्यालय के लिए अग्रदूत के रूप में कार्य करेगा।