प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026 में यूपीआई की वैश्विक सफलता की सराहना की और भारतीय फिनटेक कंपनियों को वित्तीय सेवाओं के लोकतंत्रीकरण के लिए वैश्विक विस्तार करने का आह्वान किया।
- यूपीआई को भारत की फिनटेक क्रांति का मुख्य आधार बताया गया।
- भारतीय फिनटेक फर्मों को वैश्विक स्तर पर विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
- नवाचार और जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखने पर आरबीआई का जोर।
- पीएम मोदी ने बैंकिंग के भविष्य के लिए एआई-पावर्ड समाधानों का अवलोकन किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026 के दौरान भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की अभूतपूर्व वृद्धि पर चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) भारत की फिनटेक सफलता की कहानी का 'निर्विवाद चैंपियन' है। पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि यूपीआई ने न केवल लेनदेन के तरीके को बदला है, बल्कि वित्तीय समावेशन के नए द्वार भी खोले हैं।
कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने Perfios द्वारा प्रदर्शित बैंकिंग के एआई-पावर्ड भविष्य का अवलोकन किया। उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बैंकिंग सेवाओं को अधिक व्यक्तिगत, सुरक्षित और कुशल बना रहा है। पीएम मोदी ने भारतीय फिनटेक कंपनियों को केवल घरेलू बाजार तक सीमित न रहकर वैश्विक स्तर पर अपनी पैठ बनाने का सुझाव दिया, ताकि वित्तीय सेवाओं का लोकतंत्रीकरण हो सके।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक वैश्विक प्रदाता बन गया है। यूपीआई का वैश्विक विस्तार भारत की 'सॉफ्ट पावर' को बढ़ाता है और अन्य विकासशील देशों के लिए एक ब्लूप्रिंट पेश करता है। जब भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर विस्तार करती हैं, तो यह न केवल विदेशी मुद्रा लाता है, बल्कि भारतीय मानक (Standards) भी तय करता है।
"डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) भारत की वह ताकत है जिसने वित्तीय सेवाओं को अभिजात वर्ग से निकालकर आम आदमी की हथेली तक पहुँचा दिया है।"
इस अवसर पर आरबीआई के डिप्टी गवर्नर जैन ने भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने चेतावनी दी कि जबकि नवाचार आवश्यक है, लेकिन नियामक नीतियों को नवाचार, जवाबदेही और लचीलेपन (Resilience) के बीच एक सूक्ष्म संतुलन बनाना होगा। उन्होंने कहा कि सिस्टम की स्थिरता से समझौता किए बिना तकनीक को अपनाना अनिवार्य है।
ऐतिहासिक रूप से, भारत ने 2016 के बाद से डिजिटल भुगतान में एक छलांग लगाई है। जानधन खातों, आधार और मोबाइल (JAM ट्रिनिटी) के एकीकरण ने यूपीआई के लिए वह आधार तैयार किया, जिस पर आज दुनिया के सबसे बड़े रीयल-टाइम भुगतान सिस्टम का निर्माण हुआ है।
Frequently Asked Questions
1. पीएम मोदी ने यूपीआई को 'चैंपियन' क्यों कहा?
क्योंकि यूपीआई ने डिजिटल लेनदेन को सरल बनाकर भारत में वित्तीय समावेशन को गति दी है और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
2. आरबीआई के डिप्टी गवर्नर का नवाचार पर क्या विचार था?
उनका मानना है कि तकनीक और नवाचार के साथ-साथ जवाबदेही और सिस्टम की मजबूती (Resilience) भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।