अवतार-सेरामउंट की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत की शीर्ष कंपनियों में महिला अधिकारियों की हिस्सेदारी 20% से गिरकर 16.7% रह गई है। विशेषज्ञों ने इस गिरावट के लिए अमेरिकी DEI नीतियों में बदलाव और AI के प्रभाव को जिम्मेदार ठहराया है।

  • कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव भूमिकाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 20% से घटकर 16.7% हो गई।
  • कुल कार्यबल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 35.7% से गिरकर 34.6% रह गया।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 2025 के कार्यकारी आदेश ने वैश्विक DEI पहलों को प्रभावित किया है।
  • स्वास्थ्य और कल्याण अब चाइल्डकेयर से बड़ा कारण बनकर उभरा है, जिससे महिलाएं नौकरी छोड़ रही हैं।

भारत के कॉर्पोरेट जगत में पिछले कुछ वर्षों से लैंगिक समानता की दिशा में जो प्रगति देखी जा रही थी, उसमें अब एक चिंताजनक गिरावट दर्ज की गई है। अवतार-सेरामउंट द्वारा जारी 'बेस्ट कंपनीज फॉर विमेन इन इंडिया' के 11वें संस्करण के अनुसार, शीर्ष प्रबंधन भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी कम हुई है। विशेष रूप से, कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव स्तर पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व 2025 के 20% से गिरकर 2026 में 16.7% पर आ गया है।

यह गिरावट केवल नेतृत्व स्तर तक सीमित नहीं है। अध्ययन में शामिल कंपनियों में महिलाओं का समग्र प्रतिनिधित्व 35.7% से घटकर 34.6% हो गया है, जबकि नई नियुक्तियों (hiring) में महिलाओं की हिस्सेदारी भी 38% से गिरकर 36% रह गई है। यह डेटा उन 387 कंपनियों के विश्लेषण पर आधारित है, जिनमें से 125 को महिलाओं के लिए सर्वश्रेष्ठ कंपनियों के रूप में मान्यता दी गई है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण यह दर्शाता है कि भारतीय कॉर्पोरेट संस्कृति काफी हद तक बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के वैश्विक रुझानों से प्रेरित होती है। जब अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में विविधता, समानता और समावेशन (DEI) नीतियों में ढील दी जाती है, तो उसका सीधा असर भारत में काम कर रहे अमेरिकी फर्मों और उनके स्थानीय प्रतिस्पर्धियों पर पड़ता है। यह रुझान न केवल सामाजिक समानता के खिलाफ है, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए भी जोखिम भरा है।

अवतार की प्रबंध निदेशक सौंदर्या राजेश ने इस गिरावट का मुख्य कारण जनवरी 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी कार्यकारी आदेश को बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी नीति परिवर्तन का भारतीय संचालन पर "बहुत गहरा प्रभाव" पड़ा है। इसके अलावा, उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण होने वाले "रोजगार विहीन विकास" (jobless growth) की ओर भी इशारा किया, जिससे महिलाएं अधिक प्रभावित हो रही हैं।

"अमेरिकी नीति बदलावों ने न केवल वहां बल्कि भारत में भी DEI प्रयासों को कमजोर किया है, क्योंकि वैश्विक कंपनियां अब इन पहलों से पीछे हट रही हैं।"

रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि मातृत्व अवकाश (maternity leave) के बाद महिलाओं को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालांकि 94% महिलाएं तुरंत काम पर लौटती हैं, लेकिन एक साल बाद केवल 79% ही कंपनी में बनी रहती हैं। साथ ही, अब 30% महिलाएं स्वास्थ्य और कल्याण के कारणों से नौकरी छोड़ रही हैं, जो कि चाइल्डकेयर (28%) से अधिक है।

मुख्यालय का स्थान कुल महिला कार्यबल (%) महिला एग्जीक्यूटिव (%)
भारत-स्थित कंपनियां 31.4% 14.2%
अमेरिका-स्थित कंपनियां 41.1% 18%
अन्य देश 39.2% 20%
क्या आप जानते हैं?: समावेशी प्रथाओं को अपनाने वाली 79.2% कंपनियों ने अपने ऑपरेटिंग प्रॉफिट में वृद्धि दर्ज की है, जो साबित करता है कि विविधता केवल सामाजिक नहीं बल्कि वित्तीय लाभ भी लाती है।

Frequently Asked Questions

1. DEI का क्या अर्थ है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
DEI का अर्थ है Diversity (विविधता), Equity (समानता) और Inclusion (समावेशन)। यह कार्यस्थल पर सभी पृष्ठभूमि के लोगों को समान अवसर प्रदान करने की प्रक्रिया है।

2. क्या AI वास्तव में महिलाओं की नौकरियों को प्रभावित कर रहा है?
हाँ, रिपोर्ट के अनुसार AI-जनित 'जॉबलेस ग्रोथ' का प्रभाव महिलाओं पर अधिक पड़ रहा है, जिससे उनकी नई नियुक्तियों और पदोन्नति के अवसर कम हो रहे हैं।