भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के सार्वजनिक ऋण में पिछले एक दशक में 309% की वृद्धि हुई है, जिससे राज्य पर पुनर्भुगतान का भारी दबाव बढ़ गया है।
- पिछले दशक (2015-16 से 2024-25) में कुल सार्वजनिक ऋण ₹1,94,096 करोड़ से बढ़कर ₹7,94,107 करोड़ हो गया।
- उधार लिए गए धन का एक बड़ा हिस्सा (34%) राजस्व व्यय और (28%) पुराने कर्ज के भुगतान में खर्च किया गया।
- आगामी 7 वर्षों में कुल ऋण का लगभग 43% चुकाना होगा, जिससे नए कर्ज लेने की मजबूरी बढ़ सकती है।
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की हालिया ऑडिट रिपोर्ट ने तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2015-16 से 2024-25 के बीच राज्य के कुल बकाया सार्वजनिक ऋण में 309% की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा ₹1.94 लाख करोड़ से बढ़कर ₹7.94 लाख करोड़ तक पहुँच गया है, जो राज्य की वित्तीय सेहत के लिए एक चेतावनी है।
रिपोर्ट में इस बात पर विशेष चिंता जताई गई है कि वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य द्वारा भुगतान किया गया ब्याज (₹48,852 करोड़), मूलधन के पुनर्भुगतान (₹38,470 करोड़) से अधिक था। यह स्थिति दर्शाती है कि राज्य अब एक ऐसे चक्र में फंस गया है जहाँ वह केवल ब्याज चुकाने के लिए संघर्ष कर रहा है, जिससे विकास कार्यों के लिए बजट कम हो रहा है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि जब कोई राज्य अपने उधार लिए गए धन का उपयोग बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के बजाय राजस्व व्यय और पुराने ऋणों के भुगतान (Debt Rollovers) के लिए करता है, तो वह 'ऋण जाल' (Debt Trap) की ओर बढ़ता है। तमिलनाडु के मामले में, उधार लिए गए फंड का 62% हिस्सा केवल चालू खर्चों और पुराने कर्ज को चुकाने में जा रहा है, जिसका अर्थ है कि राज्य की उत्पादक क्षमता में कोई वास्तविक वृद्धि नहीं हो रही है।
"कर्ज लेना गलत नहीं है, लेकिन जब कर्ज का उपयोग परिसंपत्ति निर्माण के बजाय केवल पुराने कर्ज को चुकाने के लिए किया जाता है, तो यह भविष्य की पीढ़ियों पर वित्तीय बोझ डालता है।"
ऐतिहासिक रूप से, तमिलनाडु ने औद्योगिक विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है, लेकिन हाल के वर्षों में लोकलुभावन योजनाओं और बढ़ते प्रशासनिक खर्चों ने राजकोषीय घाटे को बढ़ाया है। CAG ने चेतावनी दी है कि ऋण का 43% हिस्सा अगले 7 वर्षों में देय है, जो राज्य सरकार के लिए गंभीर नकदी संकट (Liquidity Pressure) पैदा कर सकता है।
| विवरण | 2015-16 | 2024-25 | वृद्धि (%) |
|---|---|---|---|
| कुल सार्वजनिक ऋण | ₹1,94,096 करोड़ | ₹7,94,107 करोड़ | 309% |
| ब्याज भुगतान (2024-25) | - | ₹48,852 करोड़ | - |
| मूलधन भुगतान (2024-25) | - | ₹38,470 करोड़ | - |
वित्तीय स्थिरता की राह पर चलने के लिए CAG ने सुझाव दिया है कि राज्य को अपने कर आधार (Tax Base) का विस्तार करना चाहिए, सरकारी संपत्तियों का मुद्रीकरण करना चाहिए और सब्सिडी के लक्ष्यीकरण में सुधार करना चाहिए। साथ ही, वेतन और पेंशन वृद्धि पर नियंत्रण रखना भी अनिवार्य है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: तमिलनाडु के कर्ज में इतनी वृद्धि क्यों हुई?
मुख्य कारणों में पिछले ऋणों पर मोरेटोरियम, बढ़ता राजस्व व्यय और उत्पादक पूंजीगत व्यय के बजाय ऋण पुनर्भुगतान पर अधिक निर्भरता शामिल है।
प्रश्न 2: CAG ने वित्तीय सुधार के लिए क्या सुझाव दिए हैं?
CAG ने कर अनुपालन को मजबूत करने, बेकार सरकारी संपत्तियों के मुद्रीकरण और सब्सिडी के बेहतर लक्ष्यीकरण की सिफारिश की है।