भारतीय फाउंड्री क्षेत्र ने पिछले दो दशकों में अभूतपूर्व वृद्धि की है। वैश्विक अस्थिरता के बावजूद, बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब आपूर्ति के लिए भारत की ओर देख रही हैं।
- भारतीय फाउंड्री क्षेत्र ने पिछले 20 वर्षों में कई गुना वृद्धि दर्ज की है।
- स्टेलेंटिस और ZF विंड पावर जैसे वैश्विक दिग्गजों ने भारत की आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन की सराहना की है।
- फाउंड्रीज डेवलपमेंट फाउंडेशन और जर्मनी के VDMA के बीच रणनीतिक समझौता हुआ है।
तमिलनाडु के कोइम्बतूर में आयोजित 'इंटर फाउंड्री और इंटर डाईकास्ट' प्रदर्शनी के दौरान उद्योग विशेषज्ञों ने भारत के विनिर्माण क्षेत्र की क्षमता पर गहरा भरोसा जताया है। स्टेलेंटिस के ग्लोबल परचेजिंग और सप्लाई चेन (भारत और एशिया पैसिफिक) के उपाध्यक्ष पराग शर्मा ने स्पष्ट किया कि भारतीय निर्माताओं के पास वैश्विक बाजार में अपनी पैठ जमाने का एक सुनहरा अवसर है।
पराग शर्मा के अनुसार, पिछले दो दशकों में भारतीय फाउंड्री क्षेत्र का विकास आश्चर्यजनक रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि भारतीय फाउंड्रीज आधुनिक तकनीकों और डिजिटल परिवर्तन में निवेश करती हैं, तो यह क्षेत्र न केवल अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करेगा, बल्कि कुशल कार्यबल को भी अपनी ओर खींचेगा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that India is strategically positioning itself as a 'China Plus One' alternative. The ability of Indian foundries to maintain supply chains during geopolitical crises, such as the West Asia conflict, proves that India is no longer just a regional player but a global manufacturing hub.
ZF विंड पावर कोइम्बतूर के कार्यकारी निदेशक श्रीनिवास नायडू ने भारत के लचीलेपन (Resilience) का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक झटकों के बावजूद भारत की आपूर्ति श्रृंखला अटूट रही है। उन्होंने भारतीय निर्माताओं को गुणवत्ता मानकों और डिलीवरी शेड्यूल के सख्त पालन की सलाह दी ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त बनी रहे।
"भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की असली ताकत उसकी निरंतरता और वैश्विक चुनौतियों के बीच आपूर्ति बनाए रखने की क्षमता में निहित है।"
इस प्रदर्शनी के आयोजन समिति के अध्यक्ष जयकुमार रामदास ने एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सहयोग की घोषणा की। फाउंड्रीज डेवलपमेंट फाउंडेशन और जर्मनी स्थित VDMA के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य न केवल इस प्रदर्शनी का विस्तार करना है, बल्कि जर्मनी में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित 'GIFA' ट्रेड फेयर में भारतीय फाउंड्रीज के लिए विशेष स्थान सुनिश्चित करना है।
प्रदर्शनी के विवरण पर बात करते हुए VA एक्जीबिशन के सीईओ अश्वनी पांडे ने बताया कि इस वर्ष के आयोजन में 322 प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने 18,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसमें चीन, इटली और जर्मनी के विशेष मंडप (Pavilions) शामिल थे, जो भारत के प्रति वैश्विक रुचि को दर्शाते हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: भारतीय फाउंड्री क्षेत्र के लिए जर्मनी के साथ समझौता क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह समझौता भारतीय कंपनियों को GIFA जैसे वैश्विक मंचों तक पहुंच प्रदान करेगा, जिससे उन्हें उन्नत तकनीक और अंतरराष्ट्रीय ग्राहक मिलेंगे।
प्रश्न 2: वैश्विक कंपनियां भारत की ओर क्यों आकर्षित हो रही हैं?
उत्तर: भारत की आपूर्ति श्रृंखला का लचीलापन और पिछले दो दशकों में बुनियादी ढांचे में हुआ सुधार मुख्य कारण हैं।