भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026 में 'डीमैट 2.0' पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार का आधुनिकीकरण करना है।
- SEBI और RBI ने कॉर्पोरेट बॉन्ड टोकनाइजेशन के लिए 'डीमैट 2.0' लॉन्च किया।
- L&T भारत की पहली निजी क्षेत्र की कंपनी बनी जिसने टोकनाइज्ड बॉन्ड जारी किए।
- NPCI ने 'Tap & Pay' और MyUPI जैसी नई डिजिटल भुगतान सुविधाएं पेश कीं।
- इस पहल का उद्देश्य CBDC और ब्लॉकचेन के माध्यम से वित्तीय लेनदेन को सरल बनाना है।
भारतीय वित्तीय बाजार में एक क्रांतिकारी बदलाव लाते हुए, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026 के दौरान 'डीमैट 2.0' का अनावरण किया। यह पायलट प्रोजेक्ट मुख्य रूप से कॉर्पोरेट बॉन्ड के टोकनाइजेशन पर केंद्रित है, जो पारंपरिक डीमैट खातों की कार्यप्रणाली को ब्लॉकचेन तकनीक के साथ एकीकृत करेगा।
इस पहल के तहत, Larsen & Toubro (L&T) इतिहास रचने वाली पहली निजी क्षेत्र की कॉर्पोरेट कंपनी बन गई है जिसने टोकनाइज्ड बॉन्ड जारी किए हैं। टोकनाइजेशन की प्रक्रिया में वास्तविक वित्तीय परिसंपत्तियों को डिजिटल टोकन में बदल दिया जाता है, जिससे उनकी तरलता (liquidity) बढ़ती है और निपटान (settlement) का समय काफी कम हो जाता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि डीमैट 2.0 केवल एक तकनीकी अपडेट नहीं है, बल्कि यह भारत के वित्तीय ढांचे को 'प्रोग्रामेबल मनी' की ओर ले जाने वाला कदम है। CBDC (सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी) और ब्लॉकचेन का एकीकरण बिचौलियों की भूमिका को कम करेगा और छोटे निवेशकों के लिए कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार तक पहुंच को आसान बनाएगा।
"टोकनाइजेशन भारतीय ऋण बाजार के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक निर्णायक मोड़ है, जो पारदर्शिता और दक्षता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।"
इस कार्यक्रम के दौरान NPCI ने भी अपनी डिजिटल भुगतान क्षमताओं का विस्तार किया। 'Tap & Pay' और 'MyUPI' जैसे फीचर्स के लॉन्च ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत न केवल निवेश बल्कि दैनिक भुगतान प्रणालियों में भी वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर है।
टुहिन कांत पांडे के अनुसार, डीमैट 2.0 का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है, और अब अगला ध्यान सेकेंडरी ट्रेडिंग (द्वितीयक व्यापार) को सुचारू बनाने पर है। इससे बॉन्ड बाजार में वॉल्यूम बढ़ने की उम्मीद है।
| विशेषता | पारंपरिक डीमैट | डीमैट 2.0 (टोकनाइज्ड) |
|---|---|---|
| सेटलमेंट समय | T+1 या T+2 दिन | लगभग तत्काल (Real-time) |
| तकनीक | सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस | ब्लॉकचेन/DLT |
| पहुंच | सीमित संस्थागत निवेशक | व्यापक और खंडित निवेश संभव |
Frequently Asked Questions
1. डीमैट 2.0 क्या है?
यह SEBI और RBI द्वारा शुरू किया गया एक पायलट प्रोजेक्ट है जो ब्लॉकचेन का उपयोग करके कॉर्पोरेट बॉन्ड्स को डिजिटल टोकन में बदलता है।
2. टोकनाइज्ड बॉन्ड से निवेशकों को क्या लाभ होगा?
इससे लेनदेन की गति बढ़ेगी, लागत कम होगी और बॉन्ड बाजार में तरलता में सुधार होगा।