OPEC ने वैश्विक तेल मांग के अनुमानों में कटौती की है, लेकिन भारत के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं, जहाँ आर्थिक मजबूती के कारण तेल की खपत बढ़ने की उम्मीद है।

  • 2026 में भारत की तेल मांग 0.06 mb/d और 2027 में 0.4 mb/d बढ़ने का अनुमान है।
  • गैसोलीन और डीजल की बढ़ती खपत इस वृद्धि का मुख्य कारण है।
  • OPEC ने 2026 के लिए वैश्विक मांग घटाकर 0.4 mb/d की है, लेकिन 2027 में सुधार की उम्मीद है।

पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) ने अपने नवीनतम मासिक अपडेट में भविष्यवाणी की है कि भारत में तेल की मांग 2026 में पिछले वर्ष की तुलना में 0.06 मिलियन बैरल प्रति दिन (mb/d) बढ़ेगी। इसके बाद, 2027 में इसमें 0.4 mb/d की और बड़ी वृद्धि होने की संभावना है, जिसका मुख्य कारण देश की मजबूत आर्थिक गति और हाइड्रोकार्बन ईंधन की निरंतर मांग है।

दिलचस्प बात यह है कि जहाँ एक ओर OPEC ने 2026 के लिए वैश्विक तेल मांग वृद्धि के अपने पूर्वानुमान में कटौती की है, वहीं भारत के प्रति उसका नजरिया सकारात्मक बना हुआ है। वैश्विक मांग के 2026 में लगभग 0.4 mb/d बढ़ने और 2027 में फिर से उछाल मारकर 2.4 mb/d तक पहुँचने का अनुमान है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की ऊर्जा निर्भरता एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक कारक बन गई है। जैसे-जैसे देश ऊर्जा संक्रमण (energy transition) की ओर बढ़ रहा है, कृषि और शहरी गतिशीलता के लिए डीजल और गैसोलीन की तत्काल आवश्यकता यह सुनिश्चित करती है कि भारत OPEC देशों के लिए एक प्राथमिकता बना रहे। 2027 तक मांग का 6.1 mb/d तक पहुँचना भारत के औद्योगिक विस्तार के पैमाने को दर्शाता है।

OPEC ने उल्लेख किया कि वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद, भारत की घरेलू विकास गति "मजबूत घरेलू मांग और सशक्त सेवा क्षेत्र" के कारण लचीली बनी हुई है।

"हरित ऊर्जा की ओर वैश्विक बदलाव के बावजूद भारत की उच्च तेल मांग उसके औद्योगीकरण और बुनियादी ढांचे के विस्तार के विशिष्ट चरण को दर्शाती है।"

ईंधन श्रेणियों के विश्लेषण में, गैसोलीन और डीजल की खपत सबसे अधिक रहने की उम्मीद है। डीजल की मांग को विशेष रूप से विनिर्माण (manufacturing) और कृषि गतिविधियों से अतिरिक्त समर्थन मिलने की संभावना है। वहीं, जेट ईंधन और केरोसिन की मांग में मामूली वृद्धि होगी, जबकि LPG और नेफ्था की मांग में कुछ कमी आ सकती है।

अगले वर्ष (2027) के लिए पूर्वानुमान और भी बेहतर हैं। OPEC का मानना है कि मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियादी ढांचे, परिवारों के लिए सरकारी सहायता और नई पेट्रोकेमिकल क्षमताओं के जुड़ने से तेल की मांग 6.1 mb/d तक पहुँच जाएगी।

क्या आप जानते हैं?: भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है, जो अपनी कुल तेल आवश्यकताओं के 80% से अधिक के लिए आयात पर निर्भर है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: EV के बढ़ते चलन के बावजूद भारत में तेल की मांग क्यों बढ़ रही है?
उत्तर: हालांकि इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बढ़ रहा है, लेकिन औद्योगिक विनिर्माण, कृषि मशीनरी और वाहनों की कुल बिक्री की भारी मात्रा अल्पकालिक रूप से इस बदलाव से अधिक प्रभावी है।

प्रश्न 2: 2027 तक भारत के लिए कुल मांग का अनुमान क्या है?
उत्तर: OPEC का अनुमान है कि 2027 तक भारत की तेल मांग औसत 6.1 मिलियन बैरल प्रति दिन (mb/d) तक पहुँच जाएगी।