विशाखापट्टनम में बढ़ते डेटा सेंटरों और औद्योगिक विस्तार के कारण पानी की मांग 60 TMC तक पहुंचने की आशंका है। इस कमी को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को ₹23,000 करोड़ के निवेश के साथ नए जलाशयों के निर्माण का प्रस्ताव दिया गया है।
- विशाखापट्टनम की जल भंडारण क्षमता को 32 TMC से बढ़ाकर 60 TMC से अधिक करने की योजना।
- यलेरू जलाशय के विस्तार और 5 नए बैलेंसिंग जलाशयों के निर्माण के लिए ₹15,000 से ₹23,000 करोड़ का बजट।
- डेटा सेंटरों और भारी उद्योगों के कारण दैनिक पानी की मांग 150 करोड़ लीटर तक पहुंचने का अनुमान।
आंध्र प्रदेश का औद्योगिक केंद्र विशाखापट्टनम एक गंभीर जल संकट की ओर बढ़ रहा है, जिसका मुख्य कारण शहर में तेजी से होते डेटा सेंटरों और भारी विनिर्माण इकाइयों का विस्तार है। विशाखापट्टनम विकास परिषद ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा है, जिसमें बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए ₹15,000 करोड़ से ₹23,000 करोड़ की मांग की गई है।
वर्तमान में, शहर की कुल जल भंडारण क्षमता लगभग 32.4 TMC (Thousand Million Cubic feet) है, जो यलेरू, रायवाड़ा और तातिपुडी जलाशयों में विभाजित है। हालांकि, भविष्य के अनुमान बताते हैं कि 9 GW तक के डेटा सेंटर और ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्रों के आने से यह मांग बढ़कर 60 TMC से अधिक हो जाएगी। यदि समय रहते भंडारण क्षमता नहीं बढ़ाई गई, तो औद्योगिक विकास और नागरिक आपूर्ति दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है (Why This Matters)
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, विशाखापट्टनम का 'डिजिटल हब' बनने का सपना सीधे तौर पर उसके जल प्रबंधन पर निर्भर है। डेटा सेंटर्स को कूलिंग के लिए भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। यदि राज्य सरकार इस बुनियादी ढांचे को विकसित नहीं करती है, तो वैश्विक टेक कंपनियां निवेश से पीछे हट सकती हैं, जिससे आंध्र प्रदेश के आर्थिक विकास की गति धीमी हो सकती है।
प्रस्तावित योजना के तीन मुख्य चरण हैं: पहला, गाद निकालने (desilting) और तटबंधों को मजबूत करने के माध्यम से मौजूदा स्रोतों की क्षमता को बहाल करना; दूसरा, यलेरू जलाशय की क्षमता को 40 TMC तक बढ़ाना; और तीसरा, पोलावरम लेफ्ट मेन कैनाल से जुड़े पांच नए बैलेंसिंग जलाशय बनाना।
"विशाखापट्टनम में वर्तमान आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त भंडारण सुविधा नहीं है; हमें कम से कम 5 TMC की अतिरिक्त क्षमता पर तुरंत ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।"
यह परियोजना लगभग 12,500 एकड़ भूमि पर फैली होगी, जिसमें जलाशयों की गहराई 20 से 25 मीटर तक होगी। यह बुनियादी ढांचा मानसून के दौरान आने वाले अतिरिक्त बाढ़ के पानी को रोकने में मदद करेगा, जो वर्तमान में भंडारण की कमी के कारण समुद्र में बह जाता है।
| विवरण | वर्तमान स्थिति | प्रस्तावित लक्ष्य |
|---|---|---|
| कुल भंडारण क्षमता | ~32.4 TMC | 60+ TMC |
| दैनिक पानी की मांग | 33-40 करोड़ लीटर | 150+ करोड़ लीटर |
| मुख्य स्रोत | यलेरू, रायवाड़ा, तातिपुडी | यलेरू (विस्तारित) + 5 नए जलाशय |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. इस परियोजना के लिए कितनी राशि की आवश्यकता है?
इस बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए ₹15,000 करोड़ से ₹23,000 करोड़ के बीच निवेश का प्रस्ताव है।
2. पानी की मांग इतनी क्यों बढ़ रही है?
हाइपरस्केल डेटा सेंटर्स, ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट और भारी विनिर्माण इकाइयों के आने से औद्योगिक जल खपत में भारी वृद्धि होने वाली है।