नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि चीन की अर्थव्यवस्था अब अपने साथी सदस्य देशों की तुलना में कहीं अधिक विशाल हो चुकी है।
- चीन की जीडीपी अब अन्य चार मूल BRICS सदस्यों की संयुक्त जीडीपी से दोगुनी से अधिक है।
- 2006 में चीन सबसे समृद्ध नहीं था, लेकिन अब यह औसत नागरिक की समृद्धि में भी आगे निकल चुका है।
- BRICS का मूल उद्देश्य G7 के प्रभुत्व को चुनौती देना था, लेकिन अब चीन स्वयं एक वैश्विक महाशक्ति बन गया है।
नई दिल्ली इस सप्ताहांत (12 और 13 सितंबर) 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। BRICS, जिसमें अब ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात जैसे 11 उभरते बाजार शामिल हैं, वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण धुरी बन गया है। हालांकि, इस समूह की शुरुआत 2006 में केवल चार देशों (BRIC) के साथ हुई थी, जिसका उद्देश्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं (G7) के वर्चस्व को कम करना था।
लेकिन 20 वर्षों के सफर के बाद, इस समूह के भीतर एक 'ड्रैगन' यानी चीन का उदय हुआ है। आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण यह स्पष्ट करता है कि चीन ने न केवल अपने सहयोगियों को, बल्कि दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को भी पीछे छोड़ दिया है। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के मामले में चीन की वृद्धि दर इतनी तीव्र रही है कि इसने समूह के संतुलन को पूरी तरह बदल दिया है।
आर्थिक आकार का तुलनात्मक विश्लेषण
2006 में, चीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तो था, लेकिन उसकी जीडीपी अन्य चार सदस्यों की कुल जीडीपी से कम थी। हालांकि, 2009 के पहले शिखर सम्मेलन तक चीन ने 'BRIS' (चीन को छोड़कर बाकी) को पीछे छोड़ दिया। 2026 तक के अनुमानों के अनुसार, चीन की अर्थव्यवस्था अब बाकी चार मूल सदस्यों की संयुक्त अर्थव्यवस्था से दोगुनी से भी अधिक है।
| अवधि/पैमाना | चीन की स्थिति | अन्य BRICS सदस्य |
|---|---|---|
| 2006 GDP | सबसे बड़ा, लेकिन संयुक्त से कम | सामूहिक रूप से अधिक शक्तिशाली |
| 2026 GDP | दोगुने से अधिक विशाल | चीन की तुलना में काफी छोटे |
| नागरिक समृद्धि | तेजी से वृद्धि (5 गुना भारत से अधिक) | धीमी या स्थिर वृद्धि |
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि BRICS का मूल दर्शन 'सामूहिक आवाज' उठाना था, लेकिन जब एक सदस्य इतना शक्तिशाली हो जाता है कि वह बाकी सबको बौना कर दे, तो निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। चीन अब केवल एक सदस्य नहीं, बल्कि वह शक्ति है जिसके खिलाफ दुनिया के अन्य देश संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
"जब किसी समूह के भीतर आर्थिक शक्ति का वितरण इतना असमान हो जाता है, तो वह समूह समानता के बजाय एक एकल शक्ति के प्रभाव का साधन बन जाता है।"
ऐतिहासिक रूप से, 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट ने विकसित देशों को पीछे धकेल दिया था, जिसका फायदा चीन ने उठाया। भारत ने भी 2006 से 2015 के बीच शानदार प्रदर्शन किया और दूसरा सबसे बड़ा सदस्य बना, लेकिन चीन की छलांग अतुलनीय रही।
औसत नागरिक की समृद्धि (GDP per capita) के मामले में भी चीन ने लंबी दूरी तय की है। 2006 में एक औसत रूसी या ब्राजीलियाई नागरिक चीनी नागरिक से 3 गुना अधिक अमीर था। आज, एक औसत चीनी नागरिक, औसत भारतीय की तुलना में पांच गुना अधिक अमीर है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: BRICS समूह का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच प्रदान करना और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में विकसित देशों (G7) के प्रभुत्व को चुनौती देना है।
प्रश्न 2: क्या चीन का आर्थिक प्रभुत्व BRICS के लिए खतरा है?
उत्तर: यह एक गंभीर चिंता है क्योंकि अत्यधिक आर्थिक शक्ति समूह के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है।