तमिलनाडु के दिग्गज कंज्यूमर ड्यूरेबल्स रिटेलर 'विवेक्स' ने अपने सभी रिटेल और ई-कॉमर्स ऑपरेशंस को बंद करने का फैसला किया है। पारिवारिक विवादों को इस अचानक लिए गए फैसले की मुख्य वजह माना जा रहा है।

  • विवेक्स ने 1965 से चले आ रहे अपने सभी रिटेल और ई-कॉमर्स ऑपरेशंस को रोकने का निर्णय लिया है।
  • सूत्रों के अनुसार, प्रमोटर परिवार के भीतर आंतरिक मतभेद इस बंदी का मुख्य कारण हैं।
  • वसंत एंड कंपनी ने नंगानल्लूर, सेलईयुर और वडपलाणी जैसे प्रमुख स्थानों पर विवेक्स के स्टोर्स का अधिग्रहण कर लिया है।

तमिलनाडु के रिटेल परिदृश्य में एक युग का अंत हो गया है। विवेक्स (Viveks), जो दशकों से कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के क्षेत्र में एक भरोसेमंद नाम रहा है, ने अपने सभी आउटलेट्स को बंद करने की घोषणा की है। परिवार द्वारा जारी एक आधिकारिक ईमेल नोट में कहा गया है कि मई 1965 से चेन्नई की रिटेल कहानी का हिस्सा रहने के बाद, परिवार ने सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद अपने सभी ऑपरेशंस को 'पॉज' (रोकने) का निर्णय लिया है।

कंपनी की शुरुआत बी.ए. लक्ष्मी नारायण सेट्टी ने की थी, और उनके निधन के बाद उनके भाई बी.ए. कोडन्डरमन सेट्टी ने कमान संभाली थी। हालांकि परिवार इसे केवल एक 'विराम' बता रहा है, लेकिन रिटेल उद्योग के तीन अलग-अलग सूत्रों ने संकेत दिया है कि प्रमोटर परिवार के सदस्यों के बीच गहरे मतभेद इस फैसले के पीछे की असली वजह हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, विवेक्स का बंद होना केवल एक दुकान का बंद होना नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक पारिवारिक व्यवसायों के सामने आने वाली आधुनिक चुनौतियों और आंतरिक संघर्षों को दर्शाता है। जब एक ब्रांड पीढ़ियों के लिए 'इमोशन' बन जाता है, तो उसका अचानक गायब होना बाजार में एक बड़ा शून्य पैदा करता है।

"पारिवारिक विवाद अक्सर सबसे मजबूत ब्रांडों को भी अस्थिर कर देते हैं, लेकिन विवेक्स जैसी ब्रांड इक्विटी का वापस आना संभव है यदि आंतरिक मुद्दे सुलझ जाएं।"

ऐतिहासिक रूप से, विवेक्स ने मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए खरीदारी के अनुभव को बदल दिया था। 1965 में शुरू की गई उनकी 'हायर परचेज स्कीम' ने उन लोगों को भी इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने की सुविधा दी जो एक बार में भुगतान नहीं कर सकते थे। इसी सफलता के बाद 1991 में विवेक हायर परचेज एंड लीजिंग कंपनी लिमिटेड (VHPL) की स्थापना हुई, जिसे बाद में अमेरिकी दिग्गज AIG ग्रुप ने अधिग्रहित कर लिया था।

चेन्नई के टी. नगर आउटलेट की लोकप्रियता ऐसी थी कि त्योहारी सीजन में लोग ऑफर्स पाने के लिए रात भर दुकान के बाहर इंतजार करते थे। यह स्टोर न केवल अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों का केंद्र था, बल्कि कई परिवारों के लिए शादी की खरीदारी का मुख्य गंतव्य भी था।

क्या आप जानते हैं?: विवेक्स ने 1965 में ही किस्तों पर सामान खरीदने की सुविधा शुरू कर दी थी, जिससे गरीब परिवार भी मात्र ₹1 का शुरुआती भुगतान करके बिजली के उपकरण खरीद सकते थे।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या विवेक्स स्थायी रूप से बंद हो गया है?
उत्तर: परिवार ने इसे एक 'पॉज' (विराम) कहा है, जबकि उद्योग के सूत्रों का मानना है कि यह पारिवारिक विवादों का परिणाम है।

प्रश्न 2: विवेक्स के स्टोर्स का अब क्या होगा?
उत्तर: रिपोर्ट के अनुसार, वसंत एंड कंपनी ने नंगानल्लूर, सेलईयुर और वडपलाणी के आउटलेट्स और विरुगाम्बक्कम स्थित एक बड़े गोदाम का अधिग्रहण कर लिया है।