हास्सन शहर में कई शिवमोग्गा और भदरवथी तालुका के किसान हौलहॉन्नुर के प्रस्तावित रिंग रोड के खिलाफ विरोध मार्च कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना अनावश्यक है और खेती योग्य जमीनों को छीन लेगी। किसानों ने मौजूदा सड़कों के सुधार की मांग की।
- कई शिवमोग्गा और भदरवथी तालुका के किसानों ने विरोध मार्च किया।
- प्रस्तावित रिंग रोड को ‘अवैज्ञानिक’ और जमीन छीने वाला कहा गया।
- किसान मौजूदा सड़कों के सुधार की मांग कर रहे हैं।
हास्सन शहर में शुक्रवार को कई गांवों के किसान कर्नाटक राज्य किसान संघ (KRRS) के बैनर तले एक बड़े विरोध मार्च में शामिल हुए। वे हौलहॉन्नुर के लिए प्रस्तावित रिंग रोड परियोजना के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं, जिसे उन्होंने ‘अवैज्ञानिक’ और ‘जमीनी नुकसान’ वाला बताया।
प्रदर्शनकारियों ने निजी बस स्टैंड से टाउन एंड कंट्री प्लानिंग निदेशालय के सहायक निदेशक के कार्यालय तक मार्च किया और अधिकारियों को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने बताया कि इस रोड नेटवर्क ग्रिड प्लान का हिस्सा बनने वाली नई सड़क स्थानीय लोगों की सहमति के बिना तैयार की गई है।
KRRS के अध्यक्ष एच.आर. बसवरजप्पा ने कहा कि यह परियोजना छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका को सीधे प्रभावित करेगी। उन्होंने कहा, “हौलहॉन्नुर के लिए अतिरिक्त सड़क की कोई जरूरत नहीं है; मौजूदा सड़कों को सुधारना ही पर्याप्त होगा।”
रिंग रोड का प्रस्ताव राज्य सरकार की व्यापक सड़कीय नेटवर्क योजना के तहत किया गया है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाना है। लेकिन स्थानीय किसान इस बात से असहमत हैं कि नई सड़क के लिए बड़ी मात्रा में कृषि योग्य भूमि को अधिग्रहित किया जाएगा।
कर्नाटक में पिछले दशकों में किसान आंदोलन का लंबा इतिहास रहा है। 1990 के दशक में बागड़ो की भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन और 2020 में कर्नाटक के विभिन्न जिलों में जल संसाधन से जुड़ी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन इस क्षेत्र में किसान शक्ति की निरंतरता को दर्शाते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार इस विरोध को नजरअंदाज करती है तो भविष्य में बड़ी सामाजिक अशांति उत्पन्न हो सकती है। दूसरी ओर, यदि स्थानीय लोगों की राय को योजना में शामिल किया जाए तो परियोजना की सामाजिक स्वीकृति में सुधार हो सकता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the Holehonnur ring‑road dispute highlights a broader tension between rapid infrastructure development and agrarian livelihoods in South India. The outcome could set a precedent for how future road projects are negotiated with farming communities.
“सड़कों का विकास आवश्यक है, परन्तु इसे किसानों की सहमति और उचित मुआवजा के बिना आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए,” कहा कृषि अर्थशास्त्री डॉ. सुभाष गुप्ता।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: प्रस्तावित रिंग रोड का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: यह परियोजना कर्नाटक राज्य के रोड नेटवर्क ग्रिड प्लान के तहत क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार की गई है।
प्रश्न 2: किसान इस परियोजना को रोकने के लिए कौन‑से कदम उठा सकते हैं?
उत्तर: किसान स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंप सकते हैं, सार्वजनिक सुनवाई में भाग ले सकते हैं और मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचा सकते हैं।