वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आरबीआई से डिजिटल रुपये (CBDC) की क्षमताओं को तेज करने का आग्रह किया है, ताकि टोकनाइजेशन और एआई जैसे उभरते तकनीकी दौर में भारत वैश्विक स्तर पर अग्रणी रहे।

  • वित्त मंत्री ने आरबीआई को होलसेल और रिटेल CBDC पायलट प्रोजेक्ट्स को और अधिक उन्नत बनाने का निर्देश दिया।
  • भारत के पहले टोकनाइज्ड कॉर्पोरेट बॉन्ड की सफलता ने परिसंपत्ति और धन के एक साथ हस्तांतरण की क्षमता को साबित किया।
  • एजेंटिक एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग के दौर में साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की गई।
  • भारतीय टेक इकोसिस्टम के लिए एक 'फेडेरेटेड इंडस्ट्री प्लेटफॉर्म' बनाने का प्रस्ताव।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) की पहल को आगे बढ़ाने और डिजिटल रुपये की क्षमताओं को और अधिक सटीक बनाने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जैसे-जैसे दुनिया टोकनाइजेशन, एजेंटिक एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग की ओर बढ़ रही है, भारत को अपनी मौद्रिक बुनियादी संरचना को और मजबूत करना होगा।

वित्त मंत्री ने विशेष रूप से REC द्वारा किए गए भारत के पहले टोकनाइज्ड कॉर्पोरेट बॉन्ड पायलट का उल्लेख किया, जो SEBI के रेगुलेटरी सैंडबॉक्स के तहत पूरा हुआ। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में बॉन्ड और डिजिटल रुपया बिल्कुल एक ही समय में स्थानांतरित हुए, जिससे लेनदेन उसी दिन बंद हो गया। यह सफलता आरबीआई और सेबी (SEBI) के बीच बेहतरीन समन्वय को दर्शाती है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, टोकनाइजेशन केवल एक तकनीकी प्रयोग नहीं है, बल्कि यह वित्तीय परिसंपत्तियों के स्वामित्व और हस्तांतरण के तरीके को पूरी तरह बदल देगा। जब वित्त मंत्री पूछती हैं कि "पैसे का हिस्सा (money leg) किस चीज से बना है?", तो वे इस बात की ओर इशारा कर रही हैं कि बिना एक मजबूत डिजिटल मुद्रा (CBDC) के, टोकनाइजेशन की पूरी प्रक्रिया अधूरी और जोखिम भरी है। यह भारत को वैश्विक वित्तीय मानकों को निर्धारित करने की स्थिति में ला सकता है।

"टोकनाइजेशन बिचौलियों को खत्म कर सकता है, लेकिन लेनदेन की अत्यधिक गति त्रुटियों और धोखाधड़ी को भी उतनी ही तेजी से फैला सकती है।"

सिस्टम की दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ, सीतारमण ने साइबर सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा संचालित स्वायत्त प्रणालियां (Autonomous Systems) उन नियंत्रण तंत्रों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से विकसित हो रही हैं जो उन्हें रोकने के लिए बनाए गए हैं। उन्होंने AI को एक 'दोधारी तलवार' बताया, जो एक तरफ धोखाधड़ी पकड़ने में मदद करता है, तो दूसरी तरफ हमलावरों को अधिक परिष्कृत हमले करने की शक्ति देता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कंपनियों की आवाज बुलंद करने के लिए, वित्त मंत्री ने एक फेडेरेटेड इंडस्ट्री प्लेटफॉर्म का प्रस्ताव रखा। यह प्लेटफॉर्म विदेशी सरकारों और नियामकों के साथ बातचीत करेगा, इंटरऑपरेबल मानकों की पहचान करेगा और डेटा सुरक्षा पर सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करेगा, जिससे भारतीय टेक कंपनियों के लिए सीमा पार नियामक बाधाएं कम होंगी।

क्या आप जानते हैं?: टोकनाइजेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें भौतिक या डिजिटल परिसंपत्तियों (जैसे बॉन्ड या रियल एस्टेट) को एक डिजिटल टोकन में बदल दिया जाता है, जिससे उन्हें छोटे हिस्सों में विभाजित करना और तेजी से ट्रेड करना संभव हो जाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: CBDC और डिजिटल रुपये में क्या अंतर है?
CBDC (सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी) एक व्यापक अवधारणा है, जबकि डिजिटल रुपया भारत का अपना विशिष्ट CBDC कार्यान्वयन है जिसे आरबीआई द्वारा जारी किया जाता है।

p>प्रश्न 2: टोकनाइज्ड कॉर्पोरेट बॉन्ड का क्या लाभ है?
इसका मुख्य लाभ यह है कि परिसंपत्ति (बॉन्ड) और उसका भुगतान (डिजिटल रुपया) एक ही समय में होता है, जिससे सेटलमेंट का समय कम हो जाता है और जोखिम घटता है।