राजस्थान सरकार राज्य में मूंग, सरसों और अनार जैसी 10 प्रमुख फसलों के लिए विशेष कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टर विकसित कर रही है। इस पहल का उद्देश्य निर्यात क्षमता को बढ़ाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।

  • राजस्थान में मूंग, सरसों, सोयाबीन, किन्नू, अनार, अमरूद, संतरा, ईसबगोल, जीरा और लहसुन के लिए 10 क्लस्टर विकसित होंगे।
  • मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने फसल-वार और क्षेत्र-वार विस्तृत मैपिंग के निर्देश दिए हैं।
  • 39 प्रस्तावित फूड पार्कों के लिए 35 स्थानों पर भूमि आवंटित की जा चुकी है।
  • NABARD को किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) की आर्थिक क्षमता का आकलन करने का जिम्मा सौंपा गया है।

राजस्थान सरकार राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा देने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जयपुर में आयोजित एक हितधारक बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि राज्य में 10 विशिष्ट कृषि-प्रसंस्करण (Agro-processing) क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इन क्लस्टरों का मुख्य उद्देश्य फसलों की विस्तृत मैपिंग करना है ताकि उनके आर्थिक, निवेश और निर्यात क्षमता को पहचाना और बढ़ाया जा सके।

इन क्लस्टरों में मुख्य रूप से मूंग, सरसों, सोयाबीन, किन्नू, अनार, अमरूद, संतरा, ईसबगोल, जीरा और लहसुन जैसी फसलों को शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि जब उत्पादन क्षेत्रों का सीधा जुड़ाव प्रसंस्करण इकाइयों और बाजारों से होगा, तो बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this strategic shift from raw crop production to value-added processing is critical for Rajasthan. By integrating sorting, grading, and cold storage facilities, the state is not just increasing its GDP but is actively reducing post-harvest losses which have historically plagued Indian agriculture. This move positions Rajasthan as a potential global hub for organic and processed agro-products.

"कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टरों का विकास न केवल निर्यात को बढ़ावा देगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्यमों और स्टार्टअप्स के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।"

इस योजना के क्रियान्वयन के लिए नाबार्ड (NABARD) को किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) की मैपिंग करने का निर्देश दिया गया है। इससे यह पता चलेगा कि किस क्षेत्र में कितनी क्षमता है और वहां किस प्रकार के निवेश की आवश्यकता है। इसके साथ ही, स्टार्टअप्स और सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाइयों को प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके।

कृषि सचिव मंजू राजपाल ने बताया कि राजस्थान फूड पार्क डेवलपमेंट पॉलिसी-2026 के तहत 39 फूड पार्क प्रस्तावित हैं, जिनमें से 35 स्थानों पर भूमि आवंटन पूरा हो चुका है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के तहत 1,500 कृषि-प्रसंस्करण इकाइयों और 1,850 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को समर्थन दिया जा रहा है।

श्रेणी विवरण/संख्या
प्रस्तावित क्लस्टर 10 (प्रमुख फसलें)
प्रस्तावित फूड पार्क 39 (35 आवंटित)
समर्थित सूक्ष्म इकाइयां 1,850 (PMFME योजना)
मुख्य फसलें जीरा, अनार, सरसों, लहसुन आदि
क्या आप जानते हैं? राजस्थान भारत में जीरा और ईसबगोल के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है, जिससे इसे वैश्विक मसाला बाजार में एक रणनीतिक बढ़त मिलती है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: इन कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टरों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इनका मुख्य उद्देश्य फसल की कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना, मूल्य संवर्धन (Value Addition) करना और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात क्षमता को बढ़ाना है।

प्रश्न 2: इन क्लस्टरों में किन फसलों को प्राथमिकता दी गई है?
उत्तर: इसमें मूंग, सरसों, सोयाबीन, किन्नू, अनार, अमरूद, संतरा, ईसबगोल, जीरा और लहसुन जैसी 10 प्रमुख फसलों को शामिल किया गया है।