एरनाकुलम पुलिस ने Go First के सभी 13 बोर्ड सदस्यों, DGCA और दो ऑनलाइन बुकिंग पोर्टलों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि कंपनी ने दिवालियापन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी दो हफ्ते तक टिकट बेचते रहे, जिससे लाखों यात्रियों को संभावित रूप से करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- Go First के 13 निदेशक, DGCA और दो बुकिंग पोर्टलों के खिलाफ FIR दर्ज
- दिवालियापन के बाद दो हफ्ते तक टिकट बिक्री जारी रखने का आरोप
- संभावित नुकसान ₹2,000 करोड़ तक, वास्तविक आँकड़े संभवतः अधिक
एरनाकुलम पुलिस ने 9 जुलाई को भारतीय दंड संहिता के धारा 406, 415 और 420 के तहत Go First के पूरे बोर्ड, सिविल एविएशन डिरेक्टरेट (DGCA) और दो प्रमुख ऑनलाइन यात्रा बुकिंग पोर्टलों – Ease My Trip और ClearTrip – के खिलाफ फर्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) दर्ज की। यह कार्रवाई यशवंत शेनॉय, एक प्रवासी यात्री, वकील और एयरोस्पेस सुरक्षा कार्यकर्ता द्वारा दायर शिकायत के बाद हुई।
पृष्ठभूमि और कानूनी प्रक्रम
Go First ने 28 अप्रैल 2023 को दिवालियापन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया, जिसे 30 अप्रैल को शेयरधारकों की विशेष आम बैठक में स्वीकृति मिली और 2 मई को आधिकारिक रूप से दायर किया गया। इस दौरान कंपनी ने टिकट बुकिंग को रोकने के कई अनुरोधों को अनदेखा किया, जबकि नियामक DGCA ने केवल 10 मई को ही बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया। शेनॉय ने कहा कि यह देरी नियामक की लापरवाही और बोर्ड की जानबूझकर धोखाधड़ी का परिणाम थी।
DGCA और बुकिंग पोर्टलों की भूमिका
शेनॉय के अनुसार, DGCA ने Go First को टिकट बिक्री जारी रखने की अनुमति दी, जबकि वही संस्था 2014 में SpiceJet को वित्तीय संकट के दौरान बुकिंग रोकने का आदेश दे चुकी थी। यह असंगतता नियामक के पूर्वज्येसेस को तोड़ती है और उद्योग में विश्वास को क्षति पहुंचाती है। साथ ही, Ease My Trip और ClearTrip जैसे बुकिंग प्लेटफ़ॉर्म को भी इस प्रक्रिया में भागीदार माना गया, क्योंकि उन्होंने निरंतर टिकट बुकिंग को सुगम बनाया।
यात्रियों पर आर्थिक प्रभाव
Go First के सीईओ ने कहा कि अप्रैल में 4,118 उड़ानें रद्द हुईं, जिससे 77,500 यात्रियों को असुविधा हुई और कुल देनदारी लगभग ₹900 करोड़ बताई गई। शेनॉय का दावा है कि वास्तविक नुकसान कहीं अधिक हो सकता है, क्योंकि टिकट बिक्री 10 मई तक जारी रही, जिससे संभावित संग्रह ₹2,000 करोड़ तक पहुँच सकता है। यह अंतर नियामक जांच और न्यायिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है।
भविष्य की संभावनाएँ और उद्योग पर असर
2025 में NCLAT ने NCLT के Go First को लिक्विडेट करने के आदेश को बरकरार रखा, जिससे कंपनी की पुनरुद्धार की संभावनाएँ सीमित हो गईं। इस FIR के बाद, भारतीय विमानन क्षेत्र में नियामक अनुपालन, उपभोक्ता संरक्षण और बोर्ड जिम्मेदारी पर पुनः चर्चा शुरू होने की संभावना है। यदि अदालतें बोर्ड सदस्यों को आपराधिक जिम्मेदारी ठहराती हैं, तो यह अन्य एयरलाइनों के लिए एक कड़ी चेतावनी बन सकती है।