भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) बाजार बुनियादी ढांचा संस्थानों (MIIs) की सहायक कंपनियों पर भी आईटी और साइबर सुरक्षा नियमों को लागू करने की योजना बना रहा है ताकि नियामक खामियों को दूर किया जा सके।
- सेबी ने एमआईआई (MII) के आईटी/साइबर सुरक्षा ढांचे को उनकी सहायक कंपनियों तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।
- लागू होने की शर्तें इस बात पर निर्भर करेंगी कि क्या सहायक कंपनियां एमआईआई डेटा संभालती हैं या बुनियादी ढांचा साझा करती हैं।
- एमआईआई छूट के लिए आवेदन कर सकते हैं यदि वे पर्याप्त सुरक्षा नियंत्रण प्रदान करते हैं।
- इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक टिप्पणियां 2 अक्टूबर तक मांगी गई हैं।
बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने बाजार बुनियादी ढांचा संस्थानों (MIIs) — जिनमें स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी और क्लियरिंग कॉरपोरेशन शामिल हैं — के आईटी और साइबर सुरक्षा ढांचे को उनकी सहायक कंपनियों तक विस्तारित करने का प्रस्ताव दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य नियामक निगरानी को मजबूत करना और डिजिटल जोखिमों को कम करना है।
वर्तमान में, एमआईआई सीधे सेबी के नियमों के अधीन हैं, लेकिन उनकी सहायक कंपनियों पर इन सुरक्षा ढांचों की प्रयोज्यता स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं थी। सेबी ने पाया है कि कई एमआईआई अपनी कुछ गतिविधियों को चलाने के लिए अपनी सहायक कंपनियों की सेवाओं का उपयोग करते हैं। ये कंपनियां अक्सर मूल संस्थान के साथ साझा तकनीक, बाजार डेटा और अन्य महत्वपूर्ण आईटी संसाधनों का उपयोग करती हैं, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ जाता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह कदम प्रणालीगत जोखिम (Systemic Risk) के खिलाफ एक सुरक्षा कवच है। आज के दौर में, जब ट्रेडिंग पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है, एक छोटी सी सहायक कंपनी में सुरक्षा चूक पूरे वित्तीय बाजार को अस्थिर कर सकती है। सेबी यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सुरक्षा की कड़ी में कोई भी हिस्सा कमजोर न रहे।
प्रस्ताव के तहत, यदि कोई सहायक कंपनी तीन मानदंडों में से किसी एक को पूरा करती है—जैसे एमआईआई के कार्यों को करना, एमआईआई का डेटा संभालना, या साझा बुनियादी ढांचे का उपयोग करना—तो उस पर मूल एमआईआई के सभी साइबर सुरक्षा नियम लागू होंगे। इसमें सिस्टम ऑडिट, घटना रिपोर्टिंग और प्रौद्योगिकी शासन के सख्त पालन की आवश्यकता होगी।
"वित्तीय बाजारों की परस्पर निर्भरता को देखते हुए, सहायक कंपनियों तक साइबर सुरक्षा नियमों का विस्तार अब विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता है।"
यदि कोई एमआईआई यह मानता है कि उसकी सहायक कंपनी को इन नियमों से छूट मिलनी चाहिए, तो उसे सेबी के पास आवेदन करना होगा। इस आवेदन में 'क्षतिपूरक नियंत्रण' (Compensatory Controls) का विवरण देना होगा, जिससे यह साबित हो सके कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। इस प्रस्ताव को तकनीकी स्थायी समिति (SCOT) और एमआईआई के बोर्ड की मंजूरी आवश्यक होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: एमआईआई (MII) में कौन सी संस्थाएं आती हैं?
एमआईआई में मुख्य रूप से स्टॉक एक्सचेंज (जैसे BSE, NSE), डिपॉजिटरी (जैसे NSDL, CDSL) और क्लियरिंग कॉरपोरेशन शामिल हैं।
प्रश्न 2: यदि सहायक कंपनी तीन मानदंडों को पूरा नहीं करती है तो क्या होगा?
यदि सहायक कंपनी एमआईआई का डेटा नहीं संभालती, उसके कार्य नहीं करती या बुनियादी ढांचा साझा नहीं करती, तो उस पर ये नियम लागू नहीं होंगे।