सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) के नए आंकड़ों के अनुसार, तेलंगाना का निर्मल जिला अनौपचारिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी में देश में शीर्ष पर है, जबकि उत्तराखंड का रुद्रप्रयाग सबसे निचले स्तर पर है।

  • तेलंगाना का निर्मल जिला 78% महिला अनौपचारिक श्रमिकों के साथ भारत में पहले स्थान पर है।
  • उत्तराखंड का रुद्रप्रयाग केवल 6.7% भागीदारी के साथ सबसे निचले स्थान पर है।
  • भारत में अनौपचारिक महिला कार्यबल का औसत 29% है।
  • उच्च भागीदारी वाले जिलों में वेतन स्तर राष्ट्रीय औसत से काफी कम पाया गया है।

भारत के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी वार्षिक असूसा (ASUSE 2025) आंकड़ों ने देश के अनौपचारिक क्षेत्र में लैंगिक वितरण की एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। पहली बार जिला-स्तर के अनुमान जारी किए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि तेलंगाना का निर्मल जिला इस मामले में देश का नेतृत्व कर रहा है, जहां अनौपचारिक श्रमिकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 78% है।

दिलचस्प बात यह है कि भौगोलिक सीमाओं का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। जहां तेलंगाना का निर्मल शीर्ष पर है, वहीं ठीक सीमा के पार महाराष्ट्र का नांदेद जिला 288वें स्थान पर है, जहां महिलाओं की भागीदारी केवल 31% है। रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष 10 जिले या तो दक्षिण भारत से हैं या उत्तर-पूर्व भारत से, जो इन क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक सक्रियता को दर्शाता है।

क्यों है यह महत्वपूर्ण?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि उच्च महिला भागीदारी का मतलब अनिवार्य रूप से आर्थिक सशक्तिकरण नहीं है। डेटा स्पष्ट करता है कि जिन जिलों में महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक है, वहां वेतन काफी कम है। उदाहरण के लिए, मेघालय का साउथ वेस्ट खासी हिल्स शीर्ष 25 जिलों में सबसे अधिक भुगतान करने वाला जिला है, लेकिन फिर भी इसका वेतन राष्ट्रीय औसत (1.3 लाख रुपये) से केवल 35% अधिक है। इसके विपरीत, देहरादून जैसे जिलों में वेतन 4.6 लाख रुपये तक है, लेकिन वहां केवल 19% श्रमिक महिलाएं हैं।

अनौपचारिक क्षेत्र में महिलाओं की भारी संख्या उनकी उद्यमशीलता को तो दर्शाती है, लेकिन वेतन अंतराल यह बताता है कि वे अभी भी कम वेतन वाले और असुरक्षित कार्यों में फंसी हुई हैं।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि जिन जिलों में महिला भागीदारी अधिक है, वहां महिला स्वामित्व वाले उद्यमों की संख्या भी अधिक है। निर्मल जिले में लगभग 80% मालिकाना प्रतिष्ठान महिलाओं के स्वामित्व में हैं। हालांकि, कुल श्रमिकों की संख्या के मामले में पश्चिम बंगाल का उत्तर 24 परगना सबसे आगे है, जहां 21.3 लाख अनौपचारिक श्रमिक कार्यरत हैं।

ऐतिहासिक रूप से, भारत में अनौपचारिक क्षेत्र को अक्सर नजरअंदाज किया गया है, लेकिन ASUSE 2025 रिपोर्ट यह रेखांकित करती है कि गैर-कृषि अनौपचारिक क्षेत्र रोजगार और आजीविका का एक मुख्य स्तंभ है। कुल गैर-निगमित प्रतिष्ठानों की संख्या 2025 में बढ़कर 7.92 करोड़ हो गई है, हालांकि रोजगार सृजन की गति पिछले वर्ष की तुलना में धीमी हुई है।

जिला/क्षेत्र महिला भागीदारी (%) विशेषता
निर्मल (तेलंगाना) 78% भारत में सर्वाधिक
रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड) 6.7% भारत में न्यूनतम
अखिल भारतीय औसत 29% राष्ट्रीय स्तर
क्या आप जानते हैं?: भारत के शीर्ष 10 जिले, जिनमें प्रतिष्ठानों की संख्या सबसे अधिक है, देश के कुल सकल मूल्य वर्धित (GVA) का लगभग 11% हिस्सा पैदा करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. ASUSE रिपोर्ट क्या है?
यह 'एनुअल सर्वे ऑफ अनइनकॉर्पोरेटेड सेक्टर एंटरप्राइजेज' है, जो गैर-कृषि अनौपचारिक क्षेत्र के उद्यमों का डेटा एकत्र करता है।

2. महिला भागीदारी और वेतन के बीच क्या संबंध पाया गया?
डेटा दिखाता है कि जिन जिलों में महिलाओं की भागीदारी अधिक है, वहां प्रति श्रमिक औसत वेतन उन जिलों की तुलना में काफी कम है जहां पुरुषों का वर्चस्व है।