तेलंगाना के ग्रामीण इलाकों में महिलाएं पारंपरिक खेती छोड़ अब ड्रोन तकनीक अपना रही हैं। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से महिलाएं न केवल आधुनिक खेती सीख रही हैं, बल्कि स्वतंत्र उद्यमी भी बन रही हैं।

  • तेलंगाना के यादाद्री भुवनगिरी जिले में महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
  • DRDA ने हेटेरो (Hetero) और MIRAI जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी कर महिलाओं को तकनीकी कौशल प्रदान किया है।
  • यह पहल महिलाओं को पारंपरिक बचत समूहों से निकालकर आधुनिक कृषि-उद्यमिता की ओर ले जा रही है।

तेलंगाना के यादाद्री भुवनगिरी जिले के मोटाकोंदुर गांव में अब खेतों के ऊपर ड्रोन की गूंज सुनाई देती है। 33 वर्षीय किसान उसिरिका संध्या, जो एक स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं, अब घंटों के कठिन शारीरिक श्रम के बजाय कुछ ही मिनटों में ड्रोन के जरिए कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं। यह बदलाव न केवल काम को आसान बना रहा है, बल्कि स्वास्थ्य जोखिमों को भी कम कर रहा है।

संध्या का अनुभव ग्रामीण तेलंगाना में हो रहे एक बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलाव का प्रतीक है। पहले उनके पति महेश को कीटनाशकों के छिड़काव के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इस समस्या के समाधान और आय के नए स्रोत की तलाश में संध्या ने ड्रोन तकनीक को अपनाया। उन्होंने जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (DRDA) और जिला समाख्या की मदद से वित्तीय सहायता प्राप्त की और 10 दिनों का गहन प्रशिक्षण लिया।

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह पहल केवल तकनीकी प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के 'स्त्रीकरण' (Feminization) और सशक्तिकरण का एक नया मॉडल है। जब महिलाएं ड्रोन जैसे उच्च-तकनीकी उपकरणों का संचालन करती हैं, तो यह न केवल उत्पादकता बढ़ाता है बल्कि ग्रामीण समाज में उनकी सामाजिक स्थिति और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत करता है।

इस कार्यक्रम के तहत अब तक 13 मंडलों की 35 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है, जबकि पड़ोसी नालगोंडा जिले में लगभग 50 और लोग इस प्रशिक्षण का हिस्सा बने हैं। जिला कलेक्टर अनुराग जयंती के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षित महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा करना और किसानों को आधुनिक कृषि सेवाओं तक पहुंच प्रदान करना है।

"कृषि ड्रोन न केवल समय बचाते हैं, बल्कि रसायनों के सीधे संपर्क को कम करके किसानों के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं, जो ग्रामीण भारत के लिए एक गेम-चेंजर है।"

वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए, सरकार इन महिलाओं को प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत सब्सिडी प्रदान कर रही है, जिसमें इकाई लागत का 35% तक सरकारी अनुदान मिल सकता है। MIRAI के निदेशक एन. विजया सुसील का कहना है कि प्रशिक्षण केवल उड़ान भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ग्राहकों को जुटाना, फील्ड प्रदर्शन करना और व्यवसाय प्रबंधन जैसे पहलुओं को भी शामिल किया गया है।

क्या आप जानते हैं?: भारत सरकार की 'ड्रोन दीदी' योजना का उद्देश्य कृषि और अन्य क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना है।

प्रश्न 1: ड्रोन प्रशिक्षण के लिए महिलाओं को वित्तीय सहायता कैसे मिलती है?
उत्तर: महिलाएं DRDA और PMEGP जैसी सरकारी योजनाओं के माध्यम से ऋण और सब्सिडी प्राप्त कर सकती हैं, जिसमें लागत का एक बड़ा हिस्सा सरकार वहन करती है।

प्रश्न 2: ड्रोन का उपयोग खेती में कैसे फायदेमंद है?
उत्तर: ड्रोन से कीटनाशकों का छिड़काव बहुत तेजी से होता है, पानी की कम खपत होती है और किसान रसायनों के सीधे संपर्क में नहीं आते, जिससे स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है।