आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में तोतापुरी आम की कीमतों में गिरावट को रोकने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए ICAR-CISH के सहयोग से एक व्यापक पुनरुद्धार परियोजना शुरू की गई है। इस पहल के तहत आधुनिक खेती और मूल्य संवर्धन पर जोर दिया जा रहा है।
- ICAR-CISH लखनऊ, IIHR बेंगलुरु और डॉ. YSR बागवानी विश्वविद्यालय के सहयोग से प्रोजेक्ट की शुरुआत।
- तोतापुरी आम के बागानों के लिए 'टॉप-वर्किंग' और गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिसेस (GAP) का कार्यान्वयन।
- पात्र किसानों को 4 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मूल्य कमी सहायता (Price Deficit Support) प्रदान की जाएगी।
आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में तोतापुरी आम की खेती को पुनर्जीवित करने और बाजार मूल्य में स्थिरता लाने के लिए राज्य बागवानी विभाग ने एक महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना का नेतृत्व लखनऊ स्थित ICAR-केंद्रीय उपोष्णकटिबंधीय बागवानी संस्थान (ICAR-CISH) कर रहा है, जिसमें बेंगलुरु के भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR) और डॉ. YSR बागवानी विश्वविद्यालय की सक्रिय भागीदारी है।
यह कदम एक केंद्रीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के बाद उठाया गया है, जिसने तोतापुरी आम की कीमतों में भारी गिरावट का विश्लेषण किया था। समिति ने सुझाव दिया था कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी 'वैल्यू चेन' (मूल्य श्रृंखला) को मजबूत करना आवश्यक है ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
शुक्रवार को चिन्नागोटिगाल्लू मंडल में आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान, लगभग 150 चयनित किसानों को 'टॉप-वर्किंग' और वैज्ञानिक बागवानी प्रबंधन के बारे में तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि कैसे पुराने पेड़ों का नवीनीकरण कर और आधुनिक ग्राफ्टिंग तकनीकों को अपनाकर उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों को बढ़ाया जा सकता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the shift from raw fruit selling to value-added processing is the only way to protect farmers from volatile market crashes. By integrating pack-houses and post-harvest infrastructure, the government is attempting to reduce wastage and increase the shelf-life of Totapuri mangoes, which are primary raw materials for the global pulp industry.
"Scientific orchard rejuvenation combined with market diversification is the key to transforming mango farming from a gamble into a sustainable business."
मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत, सरकार न केवल बागानों का कायाकल्प कर रही है, बल्कि पैक हाउस के निर्माण और फलों के कवर के वितरण के लिए सब्सिडी भी प्रदान कर रही है। ICAR-CISH के वैज्ञानिकों, एस.सी. रवि और एच.एस. सिंह ने बाजार विविधीकरण और उप-उत्पादों (by-products) के प्रसंस्करण पर जोर दिया ताकि नए बाजारों तक पहुंच बनाई जा सके।
प्रशासनिक मोर्चे पर, जिला बागवानी अधिकारी जया भारत रेड्डी ने पुष्टि की है कि पात्र किसानों को ₹4 प्रति किलोग्राम की सहायता राशि जल्द ही वितरित की जाएगी, जिससे तत्काल वित्तीय राहत मिलेगी।
परंपरागत बनाम आधुनिक बागवानी दृष्टिकोण
| विशेषता | परंपरागत तरीका | नया प्रोजेक्ट (GAP) |
|---|---|---|
| प्रबंधन | पारंपरिक खेती | वैज्ञानिक टॉप-वर्किंग |
| बाजार | स्थानीय मंडी निर्भरता | मूल्य संवर्धन और विविधीकरण |
| बुनियादी ढांचा | न्यूनतम भंडारण | सब्सिडी युक्त पैक हाउस |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: 'टॉप-वर्किंग' का क्या अर्थ है?
उत्तर: यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पुराने या कम उत्पादक पेड़ों की ऊपरी शाखाओं को काटकर नई, उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों का ग्राफ्ट लगाया जाता है।
प्रश्न 2: किसानों को मिलने वाली आर्थिक सहायता क्या है?
उत्तर: पात्र तोतापुरी आम किसानों को 4 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मूल्य कमी सहायता प्रदान की जा रही है।